बेटी

मैं भी तो नन्ही कली हूँ, तेरे अंदर ही पली हूँ
तू ही तो ज़रिया है माँ, मैं तेरे कदमों से चली हूँ
बस मुझे इतना बता माँ,
क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ?

मैंने तेरे पेट में दुनियांं समझकर जी लिया,
जो मिला तुझसे वही खाया वही था पी लिया..
क्या हुई मुझसे खता माँ,
क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ?

मैं बड़ी होकर भी तुझ पर बोझ न बनती कभी,
साज़ बन जाती तेरा मैं, सोज़ न बनती कभी..
क्यूँ मिली मुझको सज़ा माँ,
क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ?

मायने:
साज़ – संगीत वाद्य
सोज़ – जलन

Comments

13 responses to “बेटी”

    1. धन्यवाद आपका

  1. Geeta kumari

    ह्रदय स्पर्शी एवं मार्मिक रचना

    1. Prayag Dharmani

      शुक्रिया जी

  2. अतिसुन्दर

    1. Prayag Dharmani

      धन्यवाद आपका

    1. Prayag Dharmani

      बहुत शुक्रिया

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