प्यार करता हूँ कविता से
भले ही हथकड़ी डालो,
लिखूंगा स्वेद से अपने
गलफहमी नहीं पालो।
भले ही हथकड़ी डालो
Comments
21 responses to “भले ही हथकड़ी डालो”
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वाह, क्या ख़ूब लिखा है..
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उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद गीता जी, सादर अभिवादन
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कमाल लिखा है, गजब
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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आपका भी जवाब नहीं।
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सादर धन्यवाद अमित जी, आपने समीक्षा दी, मन में हर्ष की अनुभूति हुई।
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सर सलाम आपको आपकी लेखनी को
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बहुत सारा धन्यवाद ऋषि जी,
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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बहुत ही बढ़िया
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धन्यवाद जी
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बहुत ही उम्दा
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बहुत खूब
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सादर धन्यवाद
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ये बात दमदार
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धन्यवाद प्रज्ञा जी
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sundar
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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बहुत ही सुंदर
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बहूत बहुत धन्यवाद
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