भले ही हथकड़ी डालो

प्यार करता हूँ कविता से
भले ही हथकड़ी डालो,
लिखूंगा स्वेद से अपने
गलफहमी नहीं पालो।

Comments

21 responses to “भले ही हथकड़ी डालो”

  1. Geeta kumari

    वाह, क्या ख़ूब लिखा है..

    1. उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद गीता जी, सादर अभिवादन

  2. कमाल लिखा है, गजब

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  3. Praduman Amit

    आपका भी जवाब नहीं।

    1. सादर धन्यवाद अमित जी, आपने समीक्षा दी, मन में हर्ष की अनुभूति हुई।

  4. सर सलाम आपको आपकी लेखनी को

    1. बहुत सारा धन्यवाद ऋषि जी,

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  5. बहुत ही बढ़िया

    1. धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      बहुत खूब

    2. सादर धन्यवाद

  6. ये बात दमदार

    1. धन्यवाद प्रज्ञा जी

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  7. MS Lohaghat

    बहुत ही सुंदर

    1. बहूत बहुत धन्यवाद

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