मत झिड़क बूढ़े मां-बाप को
मत झिड़क बूढ़े मां-बाप को
उनकी सेवा में खुद को लगा ले,
यह तो मौका मिला है तुझे
आज मौके का फायदा उठा ले।
एक दिन सबने माटी में घुल के
शून्यता में समाना है प्यारे
आज वे वृद्ध हैं कल तू होगा,
अपने कल के लिए ही कमा ले।
आज जैसा करेगा तुझे कल
तेरी संतान से वो मिलेगा
ब्याज भी मूल के साथ होगा,
जो भी अच्छा-बुरा तू करेगा।
बूढ़े मां-बाप घर की हैं पूँजी
घर अधूरा है उनके बिना,
पूज ले वृद्ध मां-बाप को
अपने कल के लिए तू कमा ले।
– – – डॉ0 सतीश पाण्डेय
बेहतरीन
सादर धन्यवाद
बहुत सुंदर विचार
धन्यवाद गीता जी
बहुत खूब
धन्यवाद जी
धन्यवाद कैसा सर
इतनी सुंदर कविता लिखने को धन्यवाद
थैंक्स
वाह
Thank you
अति उत्तम विचार
हरघर में पनपे यह सद् विचार
सुमन जी को हार्दिक धन्यवाद
बहुत सुन्दर।
सादर धन्यवाद जी
बहुत सुंदर विचार
सादर आभार जी
Waah
Thanks Neha Ji
क्या कहने बहुत बढ़िया
Thanks
बहुत सटीक कहा है
Thank you
True
Thanks
Very true