मीठे मीठे सपने संजोने दो
होता है जो उसे होने दो
कल का पता नहीं क्या होगा
बाहों में और थोड़ा सोने दो ।………..
जागी है अखियां हम सो गए हैं
यादों में उनके हम खो गए हैं
रोको ना रस्ता उनकी निगाहों का
प्यार के बीज और बोने दो ।
मीठे मीठे सपने संजोने दो ………….
कैसे बुझाए अब दिल की लगी को
खिलने से कौन रोके मन की कली को
प्यार की राहों में छिप जाए अगर
ढूंढना न मुझको और खोने दो
मीठे मीठे सपनों संजोने दो …………
मन की पतंग बिन डोर उड़ी
जहां भी चाहा न, उस ओर मुड़ी
यौवन भी लेने लगा अंगड़ाई
दिल ने कहा मेरे मन से, होता है जो और होने दो।
मीठे मीठे सपने संजोने दो …………
होता है जो उसे होने दो
कल का पता नहीं क्या होगा
बाहों में और थोड़ा सा दो।
वीरेंद्र
मन की पतंग
Comments
5 responses to “मन की पतंग”
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सुन्दर
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उत्तम
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वाह
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👌👌
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👏👏
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