महफिल सजाए बैठे हैं

कब से तुम्हारी राह में नजरें बिछाए बैठे हैं।
चले भी आओ कि महफिल सजाए बैठे हैं।।

Comments

14 responses to “महफिल सजाए बैठे हैं”

  1. Suman Kumari

    सुन्दर

  2. Vasundra singh Avatar

    आये थे हम, मगर देखा ही नहीं तुमने।
    अब तो हम तनहाई को गले लगाये बैठे हैं।।

  3. बहुत ख़ूब

  4. Praduman Amit

    वाह पंडित जी।

  5. बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ, जय हो

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