कब से तुम्हारी राह में नजरें बिछाए बैठे हैं।
चले भी आओ कि महफिल सजाए बैठे हैं।।
महफिल सजाए बैठे हैं
Comments
14 responses to “महफिल सजाए बैठे हैं”
-

सुन्दर
-

bahut khoob
-
Thank you
-
-

आये थे हम, मगर देखा ही नहीं तुमने।
अब तो हम तनहाई को गले लगाये बैठे हैं।।-
Wah
-
-
बहुत खूब
-
Dhanyawad
-
-
बहुत ख़ूब
-
Shukriya bahin
-
-

वाह पंडित जी।
-
Thank you
-
-
क्या बात ह
-
बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ, जय हो
-

वाह! वाह!
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.