मांग की सिन्दूर रेखा
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हर सुबह बड़े
स्वाभिमान से सजाती हूँ
अपनी मांग में लाल सिन्दूर
मेरे रूप लावण्य में
मैं स्वयं एक
वृहद परिवर्तन पाती हूँ….
मांग की सिन्दूर रेखा
खूब लम्बी सजाती हूँ और
मैं आत्मिक संतोष पाती हूँ
यह मांग की सिन्दूर रेखा
मेरे परिणय के
सुंदर वट के समान है
यह महावर
मेरे आत्मगौरव का मान है…..
मेरी मांग का सिन्दूर
अन्तरिक्ष का ज्ञान है,
मनचलों के प्रेम का
अन्त है,
लौकिक प्रेम की पराकाष्ठा है
मेरे जीवन का मधुर आधार है
ये मेरी मांग की सिन्दूर रेखा……
*मांग की सिन्दूर रेखा*
Comments
4 responses to “*मांग की सिन्दूर रेखा*”
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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अति सुन्दर भाव
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बहुत खूब
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सुन्दर
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