माना कुछ बुराईयां है मुझमें,
मगर सारी अच्छाईयां नहीं है तुझमें,
फर्क इतना-सा ,
मैं हुबहु कहता,
और तू बनाकर।
माना कुछ बुराईयां…..
Comments
25 responses to “माना कुछ बुराईयां…..”
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वाह क्या बात है, वाह
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, धन्यवाद सर 🙏
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सुन्दर भाव
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धन्यवाद जी ,🙏सुप्रभात
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NICE
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Thank you
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वाह
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धन्यवाद जी
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True Lines
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Thank you
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सच्चाई से परिपूर्ण सुंदर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद मैडम जी
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बहुत ही सुंदर, बहुत ही लाजबाब
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🙏🙏
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दशरथ के तरकस से
यह शब्दबेदी बाण हो लाए|
जो शब्द सुन कर तीर चलाए
वह दशरथ की कला हो लाए|
कवियों की पहचान यही है,
मर जाएं बीन सत्य कहे ना रह पाए||
✍✍✍✍👌👌👌👌👌👌-
वाह, क्या बात है, वाह
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बहुत सुंदर ऋषि जी
मेरी रचना “चश्में वाले नेता जी” उसको आज प्रकाशित करूंगा
सच को अपने विचारो में प्रकट करने की कोशिश की है उसमें भी।🙏🙏-
Yessssssss
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वाह,वाह
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🙏🙏
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Nice
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बात में दम है
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🙏🙏🙏
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🙏🙏
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बहुत खूब
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