6 Comments

  1. मगर आयी अब होली,
    तेरी कान पड़ी मीठी बोली,
    हाँ, मारी मैंने पिचकारी
    तुझे मारी मैंने पिचकारी।
    _______ होली के सुंदर पर्व पर एक सखी से वार्तालाप करते हुए कवि सतीश जी की बहुत ही सुंदर कविता, कवि ने इस कविता को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है शानदार प्रस्तुति बहुत उमदा लेखन

  2. गाली न दे मुझे आली
    नहीं मारी तुझे पिचकारी
    मैंने मारी नहीं पिचकारी,
    भर कर रंग, चला कुंज गलियन,
    मारी नहीं पिचकारी।
    शायद तुझको भूल हुई है..
    होली पर एक सखी से कुंजगलियों मे हुई मीठी तकरार को लिखती हुई सुंदर रचना

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