मेरी फितरत

आम खाके गुठलियों का ढेर लगाना
है मेरी नहीं फ़ितरत।
एक गुठली से बृक्ष लगाना, चाह मेरी
और मेरी यही फितरत।।

Comments

3 responses to “मेरी फितरत”

  1. तं ज करती हुई सुंदर रचना

  2. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर भाव

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