मेरे घर पर आए चोर

एक रात की बात बताऊं मित्रों ,
मेरे घर पर आए चोर ।
थी मैं अकेली उस दिन घर पर,
मुझ पर आज़माने लग गए ज़ोर ।
“पैसे देदो, ज़ेवर देदो”, उनकी मांगों का ना था छोर
एक ने मुंह बंद किया मेरा,
दूजे ने पिस्तौल लगाई
मैने भी फिर तुरंत अपनी थोड़ी अक्ल दौड़ाई,
ले गई दूजे कमरे में, जहां रौशनी थी नहीं।
झटका उसका हाथ मैंने ,मुंह पर फ़िर एक चपत लगाई
दौड़ के खिड़की खोली मैंने, मचा दिया जी भर के शोर,
मदद करो, सब मदद करो,
मेरे घर पर आए चोर।
सारे पड़ोसी भागे लेकर लाठी, डंडे, रस्सी की डोर।
सिर पर पैर रख कर भागे,
भागे सरपट देखो चोर ।।

नोट:– ये कविता मेरे जीवन की सत्य घटना पर आधारित है।

Comments

12 responses to “मेरे घर पर आए चोर”

  1. ओह! उम्दा

    1. शुक्रिया प्रज्ञा जी

  2. वाह वाह, बहुत खूब

  3. Geeta kumari

    बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी 🙏

  4. This comment is currently unavailable

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद विवेक भाई..

  5. Geeta kumari

    आभार सहित धन्यवाद आपका 🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you Kamla ji

  6. Piyush Joshi

    अतिसुन्दर

    1. Geeta kumari

      Thank Allot Piyush ji 🙏

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