16 Comments

  1. कविता की दूसरी पंक्ति को कृपया इस तरह पढ़ें..
    ‘यूँ गुज़रे साल की सब बंद रिसालें कर दो..’

    कविता लिखते वक्त ये सोचा था कि आखिर में करेक्शन कर दूंगा लेकिन अपलोड करते वक्त याद ही नही रहा..क्षमाप्रार्थी हूँ..

    1. जी बहुत शुक्रिया..और बिल्कुल ठीक कहा आपने दरअसल लोकडाउन के बाद से 60 प्रतिशत वेतन हो जाने के कारण दो जगह काम करना पड़ रहा है इसलिए वक्त नही निकाल पाता लेकिन कोशिश करूँगा कि कभी कभी ही सही लेकिन उपस्थिति दर्ज़ कराता रहूँ..

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