मेहनत बेकार नहीं जाती है
आज नहीं तो कल वह उग कर,
नई कली बन
मुस्काती है।
आज सोचते हैं हम इतना
करने पर भी मिला नहीं कुछ,
लेकिन करने पर मिलता है,
यही शाश्वत जीवन का सच।
आज अगर हम पेड़ लगाएं
तब ही फल पा सकते हैं कल
छाया-पत्ती तो पायेंगे
अगर नहीं लग पायेंगे फल।
मेहनत है अपने हाथों में
फल देना दाता का काम,
मेहनत कर लो मेहनत कर लो
हासिल होगा तुम्हें मुकाम।
मेहनत बेकार नहीं जाती है
Comments
12 responses to “मेहनत बेकार नहीं जाती है”
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अभिधा शब्द शक्ति का प्रयोग
सुन्दर प्रस्तुति-
सादर आभार
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Bahut badhiya
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Thanks
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बहुत खूब
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Thanks
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सुंदर रचना
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Thank you sir
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बहुत सुंदर
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सादर धन्यवाद
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Very nice
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बहुत बहुत धन्यवाद
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