सगरों साल बहानेबाजी
आय नञ चलत सजना।
धनतेरस में चांदी नाही
चाही सोनक गहना।।
पैरक पायल नहियें लेबय
लेबय हाथक कंगना।
धनतेरस में चांदी नाही
चाही सोनक गहना।।
नञ औंठी न लेबय नथिया
कर्णफूल नञ चाही।
सब कंजूसी छोड़ि छाड़ि केॅ
जुनि करू कोताही।।
चमचम हीरा मोती लागल
लेबय सोनक कंगना।
धनतेरस में चांदी नाही
चाही सोनक गहना।।
हम कोनो उपहार न मांगी ।
नौलक्खा हम हार न मांगी। ।
‘विनयचंद ‘हम अहीं के प्यारी
नञ छी कोनो अदना।
धनतेरस में चांदी नाही
चाही सोनक गहना।।
मैथिली गीत
Comments
4 responses to “मैथिली गीत”
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वाह भाई जी मौके का लाभ उठा रही हैं भाभी जी
दिलवा ही दीजिए अब तो सोने का गहना
धनतेरस के पर्व पर बहुत सुंदर रचना-
धन्यवाद
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मीठी भाषा का प्रयोग
एवं सुंदर शिल्प विनोदप्रिय रचना.-
शुक्रिया
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