10 Comments

  1. मन के हारे हार है, मन के जीते जीत । इसी भावना को व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना । कविता का कथ्य हृदय के भावों को व्यक्त करने में सक्षम है , बेहतर शिल्प और लय बद्ध शैली के साथ बहुत सुंदर कविता

  2. यह न कहो अवरोध खड़े हैं,
    कैसे मंजिल को पाऊँ मैं,
    जहां-तहां बाधाएं बैठी
    कैसे कदम उठाऊँ मैं।
    यही निराशा खुद बाधा है
    जो आगे बढ़ने से पहले
    डगमग कर देती है पग को
    चाहे कोई कुछ भी कह ले।

    बहुत सुंदर पंक्तियां
    हारकर बैठने के लिए नहीं वरन् आगे बढ़ने का संदेश देती रचना

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