रंग दो मुझको साॅंवरिया

होली में मिलें कई रंग,
रंग दो मुझको साॅंवरिया
लाल, गुलाबी प्रेम रंग है,
हो गई मैं तो बावरिया,
रंग दो मुझको साॅंवरिया l
हरा रंग खुशहाली का रंग,
हरे रंग से खेल मेरे संग
रंग दो आकर मोहे हरे रंग में सांवरिया l
पीत, नारंगी रौशनी बरसाए,
रौशनी की बनूं किरण
रंग दो मोहे पीले रंग l
सात रंग के इंद्रधनुष सा,
रंग बिखेरो साॅंवरिया
प्रीत में तेरी हो गई मैं तो बावरिया l
आई है होली खूब खेलेंगे हम-तुम,
पिचकारी ना मारना, मोहे भीगने से डर लागे l
टूटें ना कभी भी प्रेम के ये धागे l
सात रंग में, होली पर
रंग दो मोहे साॅंवरिया॥
_____✍गीता

Comments

13 responses to “रंग दो मुझको साॅंवरिया”

  1. बहुत खूब वाह

    1. Geeta kumari

      प्रोत्साहन हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद कमला जी🙏

  2. वाह अतिसुन्दर कविता

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  3. होली में मिलें कई रंग,
    रंग दो मुझको साॅंवरिया
    लाल, गुलाबी प्रेम रंग है,
    हो गई मैं तो बावरिया,
    रंग दो मुझको साॅंवरिया l
    —– बहुत सुंदर रचना। कवि गीता जी की बेहतरीन रचना। होली में बहुत सुंदर रचना।

    1. Geeta kumari

      उत्साहवर्धक समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद सर

  4. अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी🙏

  5. vikash kumar

    JAY RAM JEE KI

    1. जय राम जी की🙏

  6. बहुत ही शानदार प्रस्तुति

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