14 Comments

  1. सात रंग के कलश भरे हैं,
    अबीर उड़ रहे हैं पवन में l
    राहें भी रंगीन हुई है,
    जब से आप बसे हो मन में l
    —– होली के रंगों से सरोबार कवि गीता जी की बहुत सुन्दर रचना। अत्यंत सुंदर रचना।

    1. इस सुंदर और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी अभिवादन सर

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