सरोवर

दिखे शांत सरोवर का उर,
भीतर हो रही हलचल
रह-रह कर उठती हैं लहरें,
बता रही व्याकुलता प्रतिपल..

*****✍️गीता

Comments

15 responses to “सरोवर”

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  1. Praduman Amit

    Wah

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद अमित जी 🙏

  2. वाह, बहुत सुंदर पंक्तियाँ लाजवाब अभिव्यक्ति गीता जी।

    1. समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी🙏

  3. अतिसुन्दर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी 🙏

  4. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    चन्द शब्दों में अथाह सार छिपा है ।

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका कमला जी🙏

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