सीधे – टेढ़े रास्ते..

कलियुग ही सही, मुझे सीधे रस्ते चलने दे,
सतयुग न सही ,मुझे टेढ़े रस्ते रास नहीं आते हैं।
……………✍️गीता..

Comments

26 responses to “सीधे – टेढ़े रास्ते..”

  1. लोग मशहूर होने को टेढ़े रास्ते अपनाते हैं, लेकिन सच्चा कवि सच्ची राह चलता है। वाह

    1. Geeta kumari

      बात समझने के लिए और आपकी मूल्यवान समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏

  2. मैं देखकर दंग रह गयी उनकी भूख को,
    जो रात भर सोए नहीं मुझे हराने को।

    1. Geeta kumari

      सही कहा है मैम…..same here.
      इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद 🙏🙏

    2. सही कहा आपने इतनी भी भूख क्या होगी जो लोग इस कदर रात रात भर लगे रहते हैं दूसरों को पीछे करने में

      1. Geeta kumari

        जाने दो ना ईशा जी लगे रहने दो,हम तो ठाठ से सोए…. hahaha
        सुन्दर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत आभार 🙏

  3. सुन्दर पंक्तियां

    1. Geeta kumari

      आभार जी

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया मोहन जी🙏

  4. कलयुग इसे ही कहते हैं, जब लोग अनायास ही ….
    आपने बिल्कुल उचित लिखा है

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद जी 🙏

    1. बहुत बहुत शुक्रिया जी 🙏

  5. Suman Kumari

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका सुमन ही🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks pragya

  6. बहुत सुंदर और सटीक अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      कविता के भाव समझने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

  7. Devi Kamla

    वाह बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      Thank you very much kamla ji,very much obliged to you 🙏

  8. Indu Pandey

    सुन्दर पंक्तियां

    1. Geeta kumari

      हार्दिक धन्यवाद इन्दु मैम

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