हम तुम्हें भूल गये!
यह गलतफहमी पालकर बैठे थे
एक दिन आ गये तुम
अचानक सामने
तब से दिल हार कर बैठे हैं..
हम तुम्हें भूल गये!
Comments
12 responses to “हम तुम्हें भूल गये!”
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बहुत खूब
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Thanks
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NICE
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Thanks
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धन्यवाद
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सुन्दर
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Thanks
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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वाह कवि प्रज्ञा जी की कलम से प्रस्फुटित बेहतरीन रचना
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धन्यवाद
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अतिसुंदर
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