हम तुम्हें भूल गये!

हम तुम्हें भूल गये!
यह गलतफहमी पालकर बैठे थे
एक दिन आ गये तुम
अचानक सामने
तब से दिल हार कर बैठे हैं..

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12 responses to “हम तुम्हें भूल गये!”

  1. वाह कवि प्रज्ञा जी की कलम से प्रस्फुटित बेहतरीन रचना

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