दिन आ रहे मधुमास के By Manohar Abhay Posted on January 13, 2016November 26, 2018 Category : गीत हिन्दी-उर्दू कविता दिन आ रहे मधुमास के शीत है भयभीत खुशनुमा वातावरण ले रहा अँगड़ाइयाँ तोड़ हिम के आवरण कह गई कोकिला कान में कुहास के दिन आ रहे मधुमास के | गुनगुनी सी धूप होगी मधुभरी सी सुनहरी मंजीरे बजाने आ रही मधुमती सी मधुकरी मकरंद ले कर झूमते झोंके झुके सुवास के | तितलियों से भर गईं क्यारियाँ फुलवारियाँ कलियाँ सियानी मारती रस गंध की पिचकारियाँ ढपली बजाते मधुप चंचल फागुनी उल्लास के | अब जलेंगीं अवदमन की थरथराती होलियाँ देखना है राजपथ पर कब तक बँटेंगीं थैलियाँ द्वार खुलने को विवश हैं अब नए आवास के |
कलियाँ सियानी मारती रस गंध की पिचकारियाँ ढपली बजाते मधुप चंचल फागुनी उल्लास के | बहुत अच्छा लिखा है Log in to Reply
beautiful work 🙂
nice
वाह
कलियाँ सियानी मारती रस गंध की पिचकारियाँ
ढपली बजाते मधुप चंचल फागुनी उल्लास के |
बहुत अच्छा लिखा है