जीवन की गाडी
चले निरंतर
पहियों की पकड़
सड़क से हो।
कोई फिसले नहीं कहीं पर ,
पहचान सुपथ पर
पकड़ से हो।
ह्रदय हो तो
हो प्रेम भरा
जिसकी पहचान
धड़क से हो।
आवाज उठानी हो
सच की तो
सच्ची में वह
कड़क सी हो।
कलम उठे यदि लिखने को
तो धार कलम की
खड़क सी हो।
जीवन की गाडी
चले निरंतर
पहियों की पकड़
सड़क से हो।
—– डॉ. सतीश पांडेय
जिसकी पहचान धड़क से हो
Comments
9 responses to “जिसकी पहचान धड़क से हो”
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nice
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Thank you ji
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Nice
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Thanks
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पहियों की पकड़
सड़क से हो।
शानदार भाव हैं, समझने को इशारा दिया है , गजब-
Thanks
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जीवन साथी के साथ जीवन पथ पर साथ साथ चलने की सुंदर पंक्तियां…वाह
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भाव पर सटीक पकड़ की गई है, सादर धन्यवाद
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गाड़ी
जीवन की गाड़ी, सजीव चित्रण
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