मैं बुरा हूं या नहीं,
मगर बनाने वाले बहुत हैं।
मैं मौन-सा बना; चुप हूं,
क्योंकि नहीं समझने वाले बहुत हैं।
नहीं समझने वाले बहुत हैं… (शायरी)
Comments
11 responses to “नहीं समझने वाले बहुत हैं… (शायरी)”
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वाह
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, धन्यवाद
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सुन्दर
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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🙏🙏
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सुन्दर
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🙏🙏
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बहुत अच्छा
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सादर आभार
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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