तुम जाओगे ,कल नहीं;
आज चलें जाओ,
छोड़ जाओ, रोकूंगा नहीं,
मगर काम ज़रा-सा करके जाओ,
फिर कभी टोकूंगा नहीं।
ये यादें जो घर बनाएं बैंठी है दिल में,
ज़रा मेहरबानी ! ले जाओ,
फिर कभी भी; ईमान से, कोसूंगा नहीं।
तुम जाओगे…
Comments
18 responses to “तुम जाओगे…”
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बहुत खूब, लेखनी को सलाम
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बहुत बहुत धन्यवाद सतीश सर
🙏🙏 शुभ रात्रि
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✍👏✍👏
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बहुत बहुत आभार 🙏 सर
शुभ रात्रि -

बिल्कुल सही👏👏👍
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हार्दिक आभार 🙏
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आपकी लेखनी को सलाम
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 ऋषि जी
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क्या बात है, सैल्यूट
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बहुत बहुत शुक्रिया मैम 🙏🙏
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काबिले तारीफ
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बहुत बहुत आभार
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सुन्दर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Atisunder kavita
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Bahut sundar
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धन्यवाद जी
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