तूफ़ान तो नहीं हूँ
लेकिन पवन हूँ चंचल
तेरे आसपास चलकर
शीतल करूंगा पल-पल।
संगीतमय करूंगा
कविता से तेरा आँचल
उन्मुक्त खुशियाँ दूंगा
तोडूंगा गम के सांकल।
पवन हूँ चंचल
Comments
9 responses to “पवन हूँ चंचल”
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बहुत खूब बहुत शानदार
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बहुत खूब
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बहुत खूब
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बहुत सुंदर
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सुंदर प्रस्तुति।
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सुंदर पंक्तियां
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वाह , बहुत ख़ूब । बहुत सुंदर पंक्तियां
तूफान परेशान कर देता है,और ठंडी पवन सुकून देती है।
वाह, इंदु जी कमाल का लेखन है👏👏 -
शानदार रचना
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क्या बात है
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