थकना नहीं है राही

जब तक तेरे कदम तल
मंजिल शिखर न चूमें
थकना नहीं है राही
चलते ही रहना तब तक।
टकरा ले पर्वतों से
तू शक्तिपुंज बनकर,
अपनी जगह बना ले
अपनी भुजा के बल पर।

Comments

22 responses to “थकना नहीं है राही”

  1. बढ़िया बहुत बढ़िया

    1. बहुत आभार

  2. बहुत सुन्दर कविता

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Pratima chaudhary

    अतिस

  4. वाह सर ग्रेट

    1. बहुत बहुत आभार

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    प्रेरणादायक और अति सुंदर प्रस्तुति

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  6. Geeta kumari

    वाह, सर बहुत ही प्रेरणादायक पंक्तियां।
    “मंज़िल शिखर ना चूमे,
    थकना नहीं है राही”…….very inspirational sir
    ऐसी रचनाएं वास्तव में ऊर्जा प्रदान करती है। आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। आपकी लेखनी को प्रणाम🙏

    1. Satish Pandey

      बहुत सुंदर टिप्पणी और समीक्षा। हृदय से आभार। सादर अभिवादन

  7. सचमुच आप शक्तिपुंज है
    अति सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      इन सुन्दर शब्दों हेतु बहुत सारा धन्यवाद ऋषि जी

  8. Satish Pandey

    सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

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