कलियुग ही सही, मुझे सीधे रस्ते चलने दे,
सतयुग न सही ,मुझे टेढ़े रस्ते रास नहीं आते हैं।
……………✍️गीता..
सीधे – टेढ़े रास्ते..
Comments
26 responses to “सीधे – टेढ़े रास्ते..”
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लोग मशहूर होने को टेढ़े रास्ते अपनाते हैं, लेकिन सच्चा कवि सच्ची राह चलता है। वाह
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बात समझने के लिए और आपकी मूल्यवान समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏
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मैं देखकर दंग रह गयी उनकी भूख को,
जो रात भर सोए नहीं मुझे हराने को।-
सही कहा है मैम…..same here.
इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद 🙏🙏 -

सही कहा आपने इतनी भी भूख क्या होगी जो लोग इस कदर रात रात भर लगे रहते हैं दूसरों को पीछे करने में
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जाने दो ना ईशा जी लगे रहने दो,हम तो ठाठ से सोए…. hahaha
सुन्दर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत आभार 🙏
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सुन्दर पंक्तियां
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आभार जी
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सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏
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सुंदर पंक्तियां
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बहुत बहुत शुक्रिया मोहन जी🙏
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कलयुग इसे ही कहते हैं, जब लोग अनायास ही ….
आपने बिल्कुल उचित लिखा है-
बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद जी 🙏
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बहुत खूब
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बहुत बहुत शुक्रिया जी 🙏
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बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका सुमन ही🙏
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Very nice
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Thanks pragya
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बहुत सुंदर और सटीक अभिव्यक्ति
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कविता के भाव समझने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
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वाह बहुत खूब
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Thank you very much kamla ji,very much obliged to you 🙏
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सुन्दर पंक्तियां
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हार्दिक धन्यवाद इन्दु मैम
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