शायद किया बेचैन तूने

आज क्यों एकांत में
याद तेरी आ रही है,
क्यों हुआ बेचैन यह मन
क्यों उदासी छा रही है।
शायद किया बेचैन तूने
इसलिए ही मैं व्यथित हूँ
पर करूँ क्या प्रिय मेरे
तुझ से थोड़ा दूर जो हूँ।

Comments

17 responses to “शायद किया बेचैन तूने”

  1. बहुत उम्दा

    1. सादर धन्यवाद प्रज्ञा जी

  2. बहुत ही लाजबाब

    1. सादर आभार जी

  3. बहुत खूबसूरत अलफाजो में अपने अकेलेपन की पीङ बयां करना

    1. कविता के भाव तत्व को समझने हेतु हार्दिक धन्यवाद।

  4. Geeta kumari

    कवि ने अपनी तन्हाइयों का दर्द बहुत ही दिल को छू देने वाले अंदाज़ में बयां किया है। आपका लेखन वास्तव में काबिले – तारीफ़ है।
    …….. कलम को मेरा सलाम है सर ।

    1. आपके द्वारा बहुत ही सुन्दर समीक्षा की गई है। हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ

      1. Geeta kumari

        🙏🙏

  5. बहुत अच्छी पंक्तियाँ

    1. सादर धन्यवाद

  6. बहुत बढ़िया

    1. बहुत सारा आभार प्रज्ञा जी

Leave a Reply

New Report

Close