चुन नई राहें पथिक

कवि कलम कहती है मत रह
तू निराशा में पथिक,
भूल जा बीती सभी कुछ
चुन नई राहें पथिक।
याद मत कर दर्द को
या दर्द की उस बात को तू,
भूल जा बच्चा सा बन जा
कर नई शुरुआत तू।
जिन्दगी है, हर तरह के
लोग होते हैं यहाँ,
कोई लुटाते नेह कोई
ठेस देते हैं यहाँ।
ध्यान रख ले वक्त भी
रहता नहीं है एक सा,
क्या पता राहों में कब
मिल जाये साथी नेक सा।
इसलिये तू मत समझ
खुद को अकेला, ओ पथिक,
आज दुख है तो तुझे कल
सुख मिलेगा, ओ पथिक।

Comments

12 responses to “चुन नई राहें पथिक”

  1. Geeta kumari

    ज़िन्दगी है,हर तरह के लोग होते हैं यहां
    कोई लुटाते नेह, कोई ठेस देते हैं यहां ….
    ….. वाह, बहुत सुंदर पंक्तियां है सर…..
    As usual beautifully written satish ji…. लेखनी को प्रणाम

    1. बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी, भावों को समझने और इतनी सुन्दर समीक्षा करने हेतु हार्दिक आभार। आपकी समीक्षा शक्ति अदभुत है। सादर अभिवादन।

  2. बहुत ही जबरदस्त

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Pratima chaudhary

    सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  4. बहुत ही बढ़िया कविता

    1. धन्यवाद जी

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. सादर धन्यवाद जी

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