21 Comments

  1. बहुत ही लाजबाब रचना है। दैनिक वार्तालाप को हास्यपुट देकर बेहतरीन रचना की सृष्टि की है। आपकी लेखनी जीवन के हर छोर को कवर करती है। जीवन के लिए हंसी एक औषधि की तरह है, हास्य रचना प्रस्तुत करने हेतु आप धन्यवाद की पात्र हैं। यूँ ही प्रखरता से लिखती रहें। keep it up

    1. समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी।🙏
      आपकी समीक्षाएं मुझे लेखन क्षेत्र में बहुत प्रेरणा और नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। सावन पे माहौल कुछ गमगीन सा था🤭 ..तो सोचा थोड़ा हंस लिया जाए।

    1. हाहाहा, ऐसा नहीं है भाई साहब, में तो बहुत अच्छी सब्जी बनाती हूं।
      समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

    1. धन्यवाद प्रज्ञा…. हास्य रचना में तुम्हें हंसी आ गई बस,मेरा प्रयास सफल हो गया। बहुत सुंदर समीक्षा की है तुमने। Thank you dear.

      1. अरे! समीक्षा और मैं असंभव
        बस भाव व्यक्त किया है दी…

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