सरकारें बदलती हैं यहाँ पर
नवयुवकों को आश्वासन देती हैं
झूठे भाषण देती हैं
पर नौकरियां नहीं देती हैं
हर जगह लम्बी हैं कतारें
व्यवस्था में हैं खामियां
बड़बड़ाते हुये घिसट जाती हैं ,देखो कितनी जिन्दगानियाँ
आत्मनिर्भरता का स्वप्न दिखाती
झूठी दिलासाएँ देती है
सब कुछ है कागजों पर
पर नौकरियां नहीं देती हैं
बेरोजगारी का आलम है ऐसा ,लोग कितना तड़प रहे
कल तो बस लिखते थे निबंध इस पर
आज खुद ही इस दौर से गुजर रहे
सरकारें अपनी महिमामण्डन का गीत गा रही
डिग्रियां नवुवकों को बेरोजगार कह कर चिढ़ा रहीं
अधूरे सपनों से लदे इस कंधे पर
काम का बोझ उठा रहीं
बेरोजगारी की इस महामारी में ,विद्वता दम तोड़ रही
मां बाप के सपनों को ये ,पैरों तले रौंद रही
बेशर्मी का आलम देखो
सरकारें इसे ही राम राज्य कह रहीं
देश के इस गम्भीर मुद्दे पर
मीडिया भी चर्चा नहीं कर रही
सोंचती क्यों नहीं सरकारें
भारत कैसे विश्वशक्ति कहलायेगा
यदि यहाँ का युवा बेरोजगार रह जायेगा
बेरोजगारी
Comments
6 responses to “बेरोजगारी”
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बेरोज़गारी का समसामयिक और सटीक चित्रण..
बेरोज़गारी की ज्वलंत समस्या पर बहुत सुंदर प्रस्तुति ।-

Thanks ma’am
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सटीक और सार्थक अभिव्यक्ति
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Thanks sir
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बहुत खूब
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Thanks sir
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