14 Comments

  1. बहुत सटीक वर्णन अनु…

    यह सब हमारा कर्म है जो आज कुदरत आक्रोश दिखा रही है
    हमें संभलना होगा

  2. मानवता का फर्ज निभाने, प्रकृति का कर्ज उतारने का वक्त आया है आज,
    बहुत सुंदर रचना

Leave a Reply