ऊचाईयों के दौर में

ऊँचाईयों के दौर में
हर कोई ऊँचा उठना चाहे।
विनयचंद इस दौर में
आखिर पीछे रहते हो काहे।।
कर्म करो ऊँचाई पाओ
औरों को नाहीं गिराना तुम।
जो गिरे हुए को उठाओगे
कीर्ति यश वैभव पाना तुम।।
सबको साथ लेकर चलना
प्रस्थ करेगी कामयाबी की राहे।
ऊँचाईयों के दौर में
हर कोई ऊँचा उठना चाहे।।

Comments

9 responses to “ऊचाईयों के दौर में”

  1. Praduman Amit

    वाह क्या बात कही है आपने।

  2. बहुत सुंदर रचना

    1. धन्यवाद पाण्डेयजी 

    2. बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति शास्त्री जी

  3. Amita Gupta

    कर्म करो ऊंचाई पाओ,
    औरों को नहीं गिराना तुम
    बेहतरीन रचना है आपकी सर

  4. बहुत कुछ कह गए आप अपनी कविता में। बहुत ही सुंदर प्रस्तुति है। 

    1. बहुत बहुत धन्यवाद बन्धश्रेष्ठ

  5. Pragya

    आप ऊँचाई के उस मुकाम पर हैं
    जिसके बारे में कोई सोंच भी नहीं सकता

  6. बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुति 

Leave a Reply

New Report

Close