
Author: Ankit Bhadouria
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“नींद” #2Liner-42
ღღ___हाँ ये सच है की हम जागेंगे, उम्र-भर तन्हा तेरे बगैर;.मगर नींद तुझको भी नहीं आएगी, किसी और की बाँहों में!!…..#अक्स.
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“खुशनसीब” #2Liner-41
ღღ___अब ये कैसे कह दूँ “साहब”, कि खुशनसीब नहीं हूँ मैं;
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आखिर एक अरसे से उसको अपना, नसीब कहता रहा हूँ मैं !!….#अक्स
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“ताबीज़” #2Liner-40
ღღ___कोई ताबीज़ आता हो, तो पहना दो मुझको “साहब”;
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तुम्हारे इश्क़ का जूनून, अब सर से उतर रहा है !!…….#अक्स.

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“लम्हा” #2Liner-39
ღღ___मैं हँस रहा था जिस लम्हे में, बस अभी-2 तो गुज़रा है;
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और लोगों से सुना है, गुज़रा हुआ वापस नहीं आता !!……#अक्स.
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“ख्याल” #2Liner-38
ღღ__तुमने रोका है इनको “साहब”, या हम भूलने लगे हैं अब;
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कि अब ख्याल भी तेरे, हमसे मिलने नहीं आते !!………#अक्स -
“गम” #2Liner-37
ღღ___कुछ इस तरह से आकर, गम लिपट रहे हैं मुझसे;
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कि जैसे हर एक दरिया, समन्दर से जाके मिलता है!!……#अक्स -
“गुमराह ” #2Liner-36
ღღ__ज़रा देखो तो निकल के “साहब”, अब तक वो आए क्यूँ नहीं;
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कहीं ऐसा तो नहीं रस्तों नें, उन्हें गुमराह कर दिया !!……..#अक्स -
“निगाह-ए-इश्क़” #2Liner-35
ღღ__अक्सर भीग उठती हैं “साहब”, पलकें तेरी नज़र-अन्दाज़ी से;
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निगाह-ए-इश्क़ पे कोई फ़र्क, ज़माने का नहीं पड़ता !!………#अक्स -
“हद” #2Liner-34
ღღ__ना जाने कैसे तुझको, “बे-हद” चाह बैठा “साहब”;.ये दिल जो अक्सर मुझको, मेरी “हद” बताता था !!………#अक्स -
“इन्तजार” #2Liner-33
ღღ__नज़रों को इंतज़ार की, सजाएँ इतनी भी ना दो “साहब”;.ये बारिशें बिन मौसम की, हमसे अब देखी नहीं जाती !!…….#अक्स -
“आगाज़” #2Liner-32
ღღ__आगाज़ तो इस बरस का, लाजवाब हुआ है “साहब”;.बस यही अन्दाज़, मेरे अन्जाम तक बनाये रखना !!……#अक्स.समस्त मित्रों एवं शुभचिंतकों को नूतन वर्ष २९१६ की हार्दिक शुभकामनाएँ !! -
“देखा नहीं जाता” @2Liner-31
ღღ__दूर आप जा रहे हो ‘साहब’, या फिर ये दिसम्बर;
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कोई भी दूर जाये हमसे, ये देखा नहीं जाता !!…….
#अक्स -
#2Liner-30
कुछ तो खता तुम्हारी, बेशुमार यादों की है ‘साहब’;.ღღ___यूँ ही बे-सबब कोई, आवारा नहीं होता !!…….#अक्स -
“आवारगी” #2Liner-29
ღღ__इक उम्र गुज़ारी है आशिक़ी में, तो जाना है;
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कुछ नहीं मिलता, इसमें इक आवारगी के सिवा !!……..#अक्स -
“साँसें”
ღღ__बाकी हैं चन्द साँसें अब, बेज़ार से दिसम्बर की;.एक नए दिन की तलाश में, पूरा साल ही जा रहा है !!…….#अक्स -
“ठंड” #2Liner-28
ღღ__माफ़ करना पर आज, कोई शायरी नहीं है “साहब”;.कि रिश्तों की ठंड में, लफ्ज़ भी जम गये मेरे !!……..#अक्स -
” फैसला” #2Liner-27
ღღ__मेरे गुनाह-ए-इश्क़ का, कोई फैसला तो सुना दो “साहब”.इस दिल को समझाने में, कुछ वक़्त भी तो लगता है!!…..#अक्स -
“सितम” #2Liner-26
ღღ__जो तुम कर रहे हो “साहब”, सितम की इन्तहा नहीं तो क्या है;.कि दूर भी जा रहे हो मुझसे, वो भी ज़रा-ज़रा कर के !!………#अक्स -
“वफ़ा” #2Liner-25
ღღ__भला और क्या दूँ तुझको, सुबूत अपनी वफ़ा का मैं;.कि ख़ुद का भी ना हुआ हूँ, जबसे तेरा हुआ हूँ मैं !!…….#अक्स -
“ख्वाहिशें” #2Liner-24
ღღ__शायद ये आँखें मूँद लेने का, सही वक़्त है “साहब”;.कि रोज़ ख्वाहिशों का मरना, हमसे अब देखा नहीं जाता !!……#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“बेबसी” #2Liner-23
ये सर्दियों का मौसम, और ये तन्हाईयों का आलम;.कहीं जान ही ना ले-ले, इनसे मिलके बेबसी मेरी !!……#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“याद” #2Liner-22
ღღ__इस कदर भी याद, ना आया करो “साहब”;.मेरी खुशियों की नींद में, खलल पड़ता है !!…….#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“गुनाह” #2Liner-22
ღღ___तुझको पाने की कोशिश भी, तू जो कह दे तो ना करूँ;.पर पाने की आरजू रखना, तो कोई गुनाह नहीं !!………#अक्स -
कोई मेरा नहीं होगा !!#2Liner-21
ღღ__कुछ इस तरह से लिक्खा है, उस ख़ुदा ने मेरा नसीब;
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कि मैं तो सबका हो जाऊंगा “साहब”, कोई मेरा नहीं होगा !!…….#अक्स -
“वक़्त तो लगता है !!”
मोहब्बत से नफरत तक आने में, वक़्त तो लगता है;
जागती आँखों को सुलाने में वक़्त तो लगता है!!
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इतनी जल्दी कहाँ से सीखा, तुमने रक़ीबों-सा हुनर;
अपने महबूब को रुलाने में, वक़्त तो लगता है !!
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अब ऐसी भी क्या जल्दी थी, हमसे दूर जाने की;
और जा ही चुके हो, तो भुलाने में वक़्त तो लगता है!!
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हम भी वक़्त दे रहे हैं सबको, आस्तीनों से निकलने का;
अभी तो ख़ुद से रूठे हैं, मनाने में वक़्त तोलगता है!!………#अक्स -
“मैं आदमी-सा था”
सूरत तो उसकी देखी, पर सीरत नहीं देखी;
ღღ_है मेरी खता ये, कि मैं आदमी-सा था !
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ღღ_वक़्त के साथ उनके, बदला किये ख्याल;
इन हालात में बिछडना, तो लाज़मी-सा था!!……#अक्स -
“लालच” #2Liner-19
ღღ__वो तो लालच है उनके ख्वाबों का, जो हमें सुला देता है “साहब”;
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वरना नींदें तो उनकी यादों ने, एक अरसे से उड़ा रक्खी हैं !!…….#अक्स -
“Love”
My friend says, love never dies,
She wants from me, only sacrifiec,
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I was a mad, who fell in love,
It’s all waste, mind gave advice,
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Now a days, she wants to come back,
what I do ‘AksS’, for love’s sake !
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“अजनबी” #2Liner-18
ღღ__हमको सताने के मौके, वो छोड़ते नहीं हैं “साहब”;.कल ख़्वाब में भी आए, तो अजनबी बनकर !!…….#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“ღ महबूब ღ”
मेरे महबूब के जलवों की तो, पूरी दुनिया ही दीवानी है,
ये जहाँ जो इक गुलिस्ताँ है, इसकी वो रात-रानी है;
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चाल है गज़ालों सी, रुख में मौजों सी रवानी है,
होंठों पे शबनम का बसेरा है, आँखें मैखानों की निशानी हैं;
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रंगत में धूप सी चमक है, जुल्फें हैं स्याह रातों सी,
जहाँ भर के हसीनों में, उसके चर्चे ज़ुबानी हैं;
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माना ये ख्वाब दिलकश है ‘अक्स’, ज़द में रह के देखो तो अच्छा है,
अमूमन तो ये ख्वाब पूरे नहीं होते, हो जाएँ तो ख़ुदा की मेहरबानी है!…….#अक्स
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“इन्तजार”
“इन्तजार” ! बहुत ‘मतलबी’ लफ्ज़ है ना ‘साहब’ ??ღღ__रख लो तो अमानत, दे-दो तो इक ज़मानत;.ღღ__चाहो तो मोहब्बत, सोचो तो सिर्फ नफ़रत,काट तो दो तो इक उम्र, और जी लो तो ज़िन्दगी !!……#अक्स -
“इन्तजार” #2Liner-17
ღღ___ज़िन्दगी तो कटती जा रही है “साहब”, इन्तजार की कैंची से;.और सिलसिला-ए-इन्तजार है, कि कटता ही नहीं कभी !!…….#अक्स -
“आसमाँ” #2Liner-16
ღღ__इक परिन्दा हो के भी, अब उड़ नहीं सकता;
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कि मेरे साये ने ही मेरा, मेरा आसमाँ चुरा लिया !!……..#अक्स -
“क़ैद” #2Liner-15
कुछ इस तरह ख्याल उसका, मेरी डायरी में क़ैद रहता है;
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ღღ___जैसे मेरा वजूद, मेरी शायरी में क़ैद रहता है !!…….#अक्स -
“मोहब्बत” #2Liner-14
क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने, जब माँगा हमसे ज़िन्दगी का हिसाब;.ღღ__ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, ‘मोहब्बत’ की है इसने!!……#अक्स -
“तारीख़” #2Liner-13
ღღ__हमको भी अपनी बारी का, इंतज़ार रहेगा “अक्स”;
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लोग कहते हैं तारीख़, खुद को दोहराती ज़रूर है !!………#अक्स -
“अक्स” #Liner-12
वो मुझमें बस गया है ‘साहब’, आईने में “अक्स” की मानिन्द;
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ღღ___नज़र के सामने होकर भी, अक्सर सामने नहीं होता !!…….#अक्स -
“ऐतबार” #2Liner-11
ღღ__मेरे मनाने से आखिर, क्यूँ लौट आएँगे वो भला;
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वो छोड़ कर ही न जाते, अगर ऐतबार होता !!……..#अक्स -
“ख़ामोशी” #2Liner-10
ღღ___कल मेरी ख़ामोशी का उसकी यादों से, झगड़ा हो गया “साहब”;
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और शोर इतना हुआ दिल में, कि नींद जागती ही रात भर !!…..#अक्स -
“ख़ुशी” #2Liner-9
ღღ___अच्छे-बुरे का हिसाब, हम नहीं रखते “साहब”
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हम तो बस वो करते हैं, जिसमें तुमको ख़ुशी मिले !!…….#अक्स -
“रातें” #2Liner-8
ღღ___सवाल तो बे-आवाज़ रातों का है “साहब”;
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दिन तो गुज़र ही जाता है, ज़रूरतों के शोर में !!…….#अक्स -
“ऑंखें ” #2Liner-7
ღღ___मेरी आँखों में जो क़ैद है “साहब”, वो समुन्दर ही है शायद;
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कि सूखता भी नहीं, बहता भी नहीं, बस भरा ही रहता है !!…….#अक्स -
“हासिल” #2Liner-7
ღღ___हासिल-ए-इश्क़ के बारे में, सोंचता हूँ जब भी ;
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तेरा मिलना याद आता है, तेरी बेरुखी नहीं !!………..#अक्स -
“तजुर्बा” #2Liner-6
ღღ__लोग कहते हैं, इश्क़ मत कर, आखिर इश्क़ से क्या होगा;
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अरे कुछ हुआ तो ठीक है “साहब”, ना हुआ, तो तजुर्बा होगा !!……..#अक्स -
ღ दर्द ღ #2Liner-5
ღღ__दर्द की चाशनी में, डुबोना भी पड़ता है “साहब”;
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महज़ इल्म की शायरी में, मिठास नहीं आती !!……..#अक्स“इल्म = ज्ञान”
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“किताब” #2Liner-3
ღღ__हम वो किताब थे “साहब”, जो कभी पढ़े ही नहीं गए;
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काश, हमपे भी नक़ाब-ए-जिल्द, अच्छी चढ़ी होती !!…….#अक्स -
“क़त्ल” #2Liner-3
ღღ__नींद आँखों तक आने में, अब डरती है साहब;
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इक रात इनमें कुछ ख्वाबों का, क़त्ल हो गया था !!……..#अक्स -
ख़्वाब !! #2Liner-2
ღღ__मेरे ख्वाबों की इक झलक, देखने की कोशिश तो करो कभी;
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खुद-ब-खुद समझ जाओगे, तुमने क्या खोया है, इक मुझे खोकर !!…..#अक्स -
वादा !!
ज़िन्दगी से उम्मीद, कुछ ज्यादा ही सही,
‘सब-कुछ’ खोकर, “कुछ” पाने का इरादा ही सही;
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मिलना, ना-मिलना तो, उस खुदा क हाथ में है,
तू मिलने का वादा तो कर, एक झूठा वादा ही सही !!……#अक्स