आज अपने ही सवाल पर मायूस खड़े हो क्यों तुम
तुम ही तो कहा करते थे न, वो हर किसी का नहीं होता है…………….!!
………………….D K
आज अपने ही सवाल पर मायूस खड़े हो क्यों तुम
तुम ही तो कहा करते थे न, वो हर किसी का नहीं होता है…………….!!
………………….D K
कौन किस से कितना मुकातिफ़ होता है
ये तो वक़्त जनता है, और वक़्त ही बता देता है……………!!
……………….D K
तू मुझे अगर धुल भी कहे तो कोई बात नहीं
के हवा चलने पर ये भी आँखों मे समां जाती है……………!!
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हमारे जाने के बाद किसी से इश्क़ फरमा कर देख लेना
अगर कोई चाहे शिददत से हमारी तरह, तो कहना………………!!
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मैंने जिस शक्श से मोहोब्बत फरमाई थी
आज वही शक्श मुझे बेवफा कहता फिरता है…………..!!
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उसकी आंखें झील सी गहरी तो है मगर,
उस में परछाई मेरे चेहरे की नहीं
उसकी बेरुखी से न नाप, इश्क़-ऐ-गहराई को तू
वो आदतन मजबूर है, मगर दिल का बुरा नहीं……………………..!!
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आंखें निकलवा कर हमारी वो अंगारों से, बोले
अब इज़ाज़त है तुमको, हमसे रूब-ओ-रू होने की……………….!!
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अपने चाहत की तपन से उसको हमने सोना तो बना दिया
मगर, अब उसको ख़रीदे कैसे, यही सोचते है हम………………..!!
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हँस दिए आप ने रोते रोते यूँ ही क्यों साहिब
ऐसा कौन सा ख़ुशी का पल याद आ गया आपको……………!!
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अब उसे याद न करू तो कुछ अधूरा सा लगता है
एक अरसा हो चला है, उसको याद करते करते…………..!!
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वो कहते है, झूठ है तू और तेरी बातें
तो क्यों याद करता है वो, मुझे और मेरी बातें………………!!
………………….D K
मुमकिन है वो किसी रोज़ लौट आये हमारे शहर की तरफ
इसलिए भी रोज़ बदल देता हू, मैं हालात-ऐ-दिल अपना…………..!!
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भला मुक्कदर का लिखा कोई मिटा पाया है
वो खामखा ही फ़िज़ूल कोशिशें करा करते है……………!!
……………….D K
जिस शक्श को आप ढूंढ रहे हो, वो अब ख़ाक हो गया
जला था किसी की चाहत मे, जल कर राख हो गया…………………!!
…………….D K
वो रोज़ देखता है चेहरा अपना, आईने मे सुबह उठ कर
काश मैं भी उसके घर के आईने का हिस्सा होता…………………..!!
………………..D K
अपनी ही हँसी पर आज मुझे हँसी आ गयी
के हैरान हू मैं, कैसे मुझे हँसी आ गयी…………..!!
…………………D K
आज भी मेरी उँगलियाँ मायूश दिखाई पड़ती है मुझको
शायद,उनको आज भी इंतज़ार है उस बेवफा के आने का…………..!!
……………..D K
हमारी तख़लीफ़ों से सरोकार अब किसको है
राज़ की बात है ये, वो किसी और के लिए रोया होगा………..!!
……………..D K
लो दे आओ कुछ खत उसको, दीदार-ऐ-मौसम की तरह
सुना है रात की तन्हाई उसको सोने नहीं देती………………….!!
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तुम्हारे सिवा कोई और मिले तो बताना
हम छोड़ रहे है दिल अपना, तलाशी के लिए………….!!
…………D K
चलो आज चाहत की हम आखरी किश्त अदा करते है
दे कर ज़िन्दगी उनको, ये क़र्ज़ रफ-दफा करते है……………..!!
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चलो आज ये कलमा भी पूरा हो गया
एक और इश्क़ का किस्सा अधूरा हो गया…………….!!
……………..D K
अब इसे किस्मत का तकाज़ा कहे,या बेरुखी दिल की
के लोग भी अब बदलने लगे, हाथों की लकीरों की तरह…………….!!
………………….D K
बीती नहीं ज़िन्दगी, अब भी आधी बाकी है
मुझे और तड़पना है, अब भी ज्याती बाकी है…………..!!
…………….D K
उस वक़्त आँख मे आंसू आ जाते है
जब दिल पर गम के बादल छा जाते है…………..!!
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ज़िन्दगी तो हमारी गुज़री….
मगर, गुज़र…..गुज़र…..कर गुज़री….. ……………..!!
…………………D K
उस मंज़र को देख कर हमारा दिल जला करता है
के उसकी तस्वीर के सामने जब भी चिराग जला करता है………..!!
………………..D K
चलो आज उनको इश्क़ का खिताब दिया जाये
उनकी बेवफाई का आज हर हिसाब किया जाये……………!!
……………….D K
बर्बाद करने के लिए मैँ ही मिला,उस से पूछुंगा एक दिन
बस उस पल तक, उसकी ज़िन्दगी सलामत रहे मेरे खुदा……………!!
………………..D K
मेरी ज़िन्दगी में खुशियों की उम्र ज़रा कम है लोगो
ख़तम हो जाती है ज़िन्दगी उनकी, मुझ तक पहुचने से पहले………..!!
………………D K
दिल से पूछ कर आज तुम भी एक फैसला कर लो
हमारी मोहोब्बत को मुक्कमल करने का गुनाह कर लो……………..!!
………………..D K
आँखों में बर्बादी का मंज़र दिखाई देता है
हर आंसू में गमो का समुन्दर दिखाई देता है…………!!
…………..D K
दो लम्हे फुरसत मे और जी लेने दो
प्यास हु मैं, मुझे थोड़ा मय और पी लेने दो……………..!!
……………….D K
सिर्फ एक मोहोब्बत का उजाला रह गया
हसरते ख़ाक हो गई, जीने का बहाना रह गया……….!!
……………………D K
बहुत शराफत से पेश आये कुछ लोग
हमारे जनाजे पर आये कुछ लोग
आखरी रस्म की कदर करी उन सब ने
हमें कांधा देने आये कुछ लोग
रस्म-ऐ-बफा सब निभा नहीं सकते है
काबा पर हमने बुलाये कुछ लोग
सोचा था सब अपने है इस दुनिया मे
मगर, रस्म-ऐ-अपनापन निभा पाए कुछ लोग
यूँ तो मायूस दिख रहे थे वह पर सभी
मेरी कब्र पर मगर आंसू बहा पाए कुछ लोग
बहुत शराफत से पेश आये कुछ लोग
हमारे जनाजे पर आये कुछ लोग…………………..!!
……………….D K
हसरत-ऐ-दिल हमारी बस इतनी थी लोगो
के वो अपने कूचे से एक बार तो बाहर आते
रोते, बिलखते और गम से कराहते
और उनकी आँखों से आंसूं बेशुमार आते………….!! (d k)
एक बार क्या गुज़रे हम उनके कूचे से लोगो
चैन-ओ-अमन हमारे दिल का खो गया
गम ने दिल मैं दस्तक दे दी हमे
खुशियों का हर समां सो गया……………………!! (d k)
अब न होगी तकलीफ उनको हम से मिलने मे साहिब
के बनाया है हमने काबा अपना उनके कूचे मैं साहिब……….!! (d k)
इसलिए भी अंधेरे की पनाह मे चला जाता हु में
के मेरे गम-ऐ-दिल को अहसास-ऐ-तन्हाई न हो…………!! (d k)
न जला मेरे दिल को और, न कुरेद मेरे जख्मों को
ऐ मोहोब्बत तुझ से गुज़ारिश है,ज़िन्दगी को तू अब बक्श दे…………..!! (d k)
Friendship is a beautiful Relation
By which we can remove our all tension
Friendship is a very good thing for our life
We should not compare it with our Wife
Friendship is the symbol of true Relation
We should follow the rules of this Relation
Friendship is not like to a War
It means “Dosti” and we call Friends “Dost” or “Yar”
Friendship includes sorrow & emotions
True friends can search us on any Locations
Friendship is like a Happiness’ Tree
It is the Relation, which is made on basis of Free
Friendship never gives any Tension
We don’t need to give it any Pension
Friendship doesn’t show attitude to Anybody
So it is made, in the world, by Everybody………………….!! (d k)
Love…..Love…..Love…..
Strange, Astonished & Powerful
Love…..Love…..Love…..
Beautiful, Attractive & charming
Love…..Love…..Love…..
Good, Fair & Excellent
Love…..Love…..Love…..
Change, Value & Nature
Love…..Love…..Love…..
Precious, Useful & Valuable
Love…..Love…..Love…..
Life Changer, Maker & Destroyer
Love…..Love…..Love…..
Parents, Friends & Wife
Love…..Love…..Love…..
Feeling, Emotion & Reliance………………….!! (d k)
वो कहते है हमारे निगाह को यूँ देखा न करो
हम कहते है के तुम अपनी निगाह से हमें यूँ देखा न करो
वो कहते है बहुत शर्म-ओ-हय्या आती है हमको
हम कहते है की तुम अपनी निगाह को यूँ उठाया न करो
वो कहते है आज फिर मौसम थोड़ा मदहोश हो चला है
हम कहते है की तुम अपनी निगाह को यूँ झुकाया न करो
वो कहते है आज फिर काली घटा छाने लगी है
हम कहते है की तुम अपनी निगाह में सुरमा लगाया न करो
वो कहते है क्यों सब हमारे हुस्न के दीवाने है
हम कहते है की तुम अपनी निगाह से सबको सताया न करो
वो कहते है हमारे निगाह को यूँ देखा न करो
हम कहते है के तुम अपनी निगाह से हमें यूँ देखा न करो ……………!!
तेरी निगाह ने कैसा कोहराम मचाया साकी,
सब शराब को पीना भूल गए
हाज़िर जवाबी कर रहे है सब तेरी अब तो,
सब ज़िन्दगी को जीना भूल गए………………!! (d k)
अपनी निगाह से आज तुम एक फैसला कर दो
कबूल कर लो मेरा इश्क़, या मुझको फनाह कर दो…………!! (d k)
न रख अपनी निगाह हमारे चेहरे पर इस तरह ज़ालिम
तेरी चाहत के मरीज़ है, कही मर ही न जाए………………..!! (d k)
आज फिर आये है वो खाली हाथ हमारे घर पर
शायद निगाह से कत्ल करने का इरादा है उनका……….!! (d k)
एक सवाल दिल का, एक सवाल इश्क़ का,
इश्क़ मैं जो बिछड़ जाते है, वो फिर किधर जाते है
एक सवाल ज़िन्दगी का, एक सवाल इबादत का,
जब इंसा हो जाता है फनाह तो इश्क़ क्यों फरमाते है
एक सवाल ज़िन्दगी का, एक सवाल आशिक़ी का,
जब चाहते है इतनी शिद्दत से तो फिर जुदाई क्यों आती है
एक सवाल ख़ुशी का, एक सवाल होंठों का,
जब बिछड़ जाते है तो क्यों नाम लेने से कतराते है
एक सवाल गम का, एक सवाल ख़ामोशी का
जब अकेले होते है तो तन्हाई क्यों तड़पती है
एक सवाल दिल का, एक सवाल इश्क़ का,
इश्क़ मैं जो बिछड़ जाते है, वो फिर किधर जाते है…………..!!
एक आस दिल की, एक विश्वास ज़िन्दगी को
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
दिल को जिसकी चाहत, करी दिल ने जिसकी इबादत
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
ज़िन्दगी का सवेरा, सुनहरी और चमकती शाम
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
जो दे करार दिल को, खुशियां अपार ज़िन्दगी को
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
जुबा पर जो नाम, होंठों को मिले जिस नाम से आराम
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
किसी को पाने की ज़िद, किसी को अपना बनाने का ख्याल
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
आंखें जिसको देखने को तरसे, बादल भी रह रह कर बरसे
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
जिसके नाम पूरी ज़िन्दगी, खुद की तरह जिसकी बंदगी
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
जिसको लिखने के लिए कलम भी तरसे, न लिखू तो कागज़ भी भड़के
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम
एक आस दिल की, एक विश्वास ज़िन्दगी को
वो हो तुम, वो हो तुम और सिर्फ तुम……………………..!! (d k)
सुना था इश्क़-ऐ-हिज्र मैं आ जाती है मौत सबको
मगर, हमें तो नींद तक नहीं आयी एक भी हिज्र-ऐ-रात में……….!! (d k)
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