Author: Ajnabi

  • Love is a Sweet Poison

    Love is a Sweet Poison
    It makes life useless
    It makes life maverick
    It makes life sometime over

    Love is a Sweet Poison
    Since in it, we have to live as dead
    It finishes our thinking &
    We finished ourself by it

    Love is a Sweet Poison
    It ends our life slowly-slowly
    It gives us lot of pain too
    And we begin to end ourself completely

    Love is a Sweet Poison
    It is always sweet as candy
    It has a chrecterstic of Sweetness too
    But it makes us as like live statue

    Love is a Sweet Poison
    Some people says that it is very good
    Some says that it is very bad
    It is totally depand on situation to situation

    Love is a Sweet Poison
    Since if we fall in it then
    We can’t overcome ourself
    It dissolves our life with its…………………..!!

    Dev Kumar

  • दहलीज़-ऐ-इश्क़…….

    न रखो उम्मीद-ओ-बफा इस दहलीज़-ऐ-इश्क़ पर साहिब
    लूट जाते है दिल अक्सर, चाहत के इस बाजार में………………………!!

    D K

  • कहा से सुन लिया तुम सब ने…….

    कहा से सुन लिया तुम सब ने, ये सरासर झूठ है
    माना इश्क़ किया है हमने, मगर सजा का हक़दार तो वो भी है……………!!

    D K

  • शब्दों की कमी है………

    आज लिखू क्या, बस ये समझ ले शब्दों की कमी है
    दिल लबरेज़ है तेरी यादो से, और आँखों मैं नमी है…………….!!

    D K

  • हमारा मशवरा है ये……..

    इस मोहोब्बत ने बहुत आज़माया है हमको साहिब
    हमारा मशवरा है ये, कभी मोहोब्बत को न आज़माना…………..!!

    D K

  • बूँद-ऐ-आंसू……

    क्यों डरते हो साहिब, बारिश के इन बौछारों से
    भूल गए क्या, बूँद-ऐ-आंसू अपनी आँखों के……………!!

    D K

  • It’s a very good scene of morning…….

    It’s a very good scene of morning
    When we awake up from our bed

    We see sun rises from the east
    As well as hearing of sparrow’s chirping

    It’s a very good scene of morning
    We go for a morning walk

    We feel fresh air, fresh enviourment
    Besides of one fresh day ahead

    It’s a very good scene of morning
    When we once again start our day

    Take bless from god & parents
    It gives us lot of hopes & wants……………………..!!

    D K

     

     

  • बहुत रो चुके है……..

    सुकून हम अपने दिल का अब कहू चुके है
    हम खुद को गम-ऐ-सागर में डुबो चुके है
    क्यों मजबूर करते हो हमें, ये खत दिखा कर
    हम पहले से ही उदास है, बहुत रो चुके है………………….!!

    D K

  • ख्याल करती,बेहाल करती……..

    शुक्र है मोहोब्बत का कोई मज़हब नहीं होता
    वर्ना ये भी अमीरी और गरीबी का ख्याल करती

    मिल जाती हर शक्श-ऐ-आमिर को
    और हम जैसो को ये बेहाल करती……………………………!!

    D K

  • वो मुँह छुपा-छुपा कर रोये……..

    हमको तन्हाई में बुला-बुला कर रोये
    अपने आंसुओं को छुपा-छुपा कर रोये

    जब देखी उस ने हमारी सिद्क़-ऐ-दिल लोगो
    अपने ही आँचल में, वो मुँह छुपा-छुपा कर रोये…………….!!

    D K

  • उसके नाम का लोगो……..

    यूँ ही नहीं लबरेज़ हो रही, हमारे दिल में यादें उसकी
    के हमने पिया था मय-ऐ-गुल्ल-रंग उसके नाम का लोगो……………..!!

    D K

  • निगेबानी……..

    कौन कहता है कम्बक्त, के हम बे-सरो-सामान सोया करते है
    के रात कटती है सिर्फ, निगेबानी इस दिल-ऐ-गम की करते करते……………!!

    D K

  • सफा-सफा रहते है……..

    हमारी इस बात से भी लोग हमसे खफा रहते है
    के हम सब से क्यों रफा-दफा रहते है

    के रंग-ऐ-बईमानी जब सब पर चढ़ी है इस दुनिया में
    तो क्यों हम हरदम सफा-सफा रहते है…………………………..!!

    D K

  • रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

    रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

    रंग नहीं महज़ ये तीनो
    हमारे हिंदुस्तान की शान है

    झंडा है ये हमारे देश का
    तिरंगा इसका नाम है

    सर से भी ऊँचा रखेंगे हम इसको
    जब तक जिस्म में जान है

    हर पल देते है सलामी दिल से
    के ये हमारी पहचान है

    दुश्मन क्या समझेगा इसकी ताकत
    अभी वो बहुत अनजान है

    पूछो जा कर उन लोगो से
    जिनकी ज़िन्दगी तिरंगे के बिना वीरान है

    मर मिटेंगे इसके खातिर हम
    के ये हमारा गुमान है

    अशोक चक्र से सुसज्जित है ये
    हर फौजी को इसका ध्यान है

    जा देकर भी इसको झुकने नहीं देंगे
    ये हम भारतीयों का अरमान है

    सबसे प्यारा देश हमारा
    हमारा भारत महान है…………………………!!

    जय हिन्द, जय भारत
    वन्देमातरम

    D K

     

  • कइस अकेला है वह, मुझे जाने दो…….

    कइस अकेला है वह, मुझे जाने दो
    जो किया है वादा, मुझे निभाने दो

    वो समां भी कितना रंगीन होगा
    जब मिल बैठेंगे दीवाने दो

    चलेंगी रात भर इस दिल की बातें
    और भरेंगे मय के पैमाने दो

    बनना चाहता है वो गवाह इस मंज़र का
    खैर,रोको मत उसको, अंदर आने दो

    अभी तो हाथ में लिया है जाम-ऐ-खुशनसीबी
    कुछ देर तेहरो, ज़रा इसको हलक में उतर जाने दो

    मुमकिन नहीं है समझना, बातें दिलो की
    रुको तुम, ज़रा उसको समझाने दो

    रोशन हो जाएगा तुम्हारा, ये बेहाल कूचा भी
    ज़रा उस चाँद को ज़मी पैर उतर जाने दो

    कहते हो की इश्क़ में कोई दर्द नहीं है
    ज़रा एक बार हमें भी इश्क़ को सताने दो

    सुना है हल्का हो जाता है दिल कइस,
    चलो आज हमें भी आंसू बहाने दो

    तुम्हारी मोहोब्बत का अंजाम भी ठीक वैसा ही है
    जैसे हो किसी सागर के किनारे दो………………………………!!

    D K

  • सको तो चलो………..

    हमारे साथ कदम से कदम मिला चल सको तो चलो
    के इस इश्क़ में कुछ देर ठहर सको तो चलो

    बहुत ही हौसला चाहिए, इस दिल की निगेबानी करने को
    अगर तुम इसकी पहरेदारी कर सको तो चलो

    सफर लंबा है ज़रा, मंज़िल-ऐ-वाम तक का
    बे-सरो-सामान निकल सको तो चलो

    यादों से लवरेज़ है दिल मेरा, खता मेरी नहीं
    तुम इसकी हर बात समझ सको तो चलो

    रात की ख़ामोशी और अजीब सा सन्नाटा भी
    तुम इन सब से निकल सको तो चलो

    सफर-ऐ-आम नहीं ये, औरो की तरह
    खुद को गुमनाम कर सको तो चलो

    इस सफर में कुछ दुश्मनो से भी मुखातिभ होंगे
    तुम ये ख़ंज़र रख सको तो चलो

    है पता है हमको बहुत से सवाल है तुम्हारे ज़हन में
    इन सब के जवाब अगर तुम सुन सको तो चलो

    कदम-कदम पर सबब-ऐ-परेशानी का मंज़र है
    तुम संभल-संभल कर गर चल सको तो चलो

    वादा किया है तुमने साथ निभाने का
    गर साथ सही से निभा सको तो चलो……………….!!

    D K

  • वक़्त तो लगता है…….

    किसी को भूल जाने मे वक़्त तो लगता है
    के आँखों के आंसू मिटाने में वक़्त तो लगता है

    जब बैठे हो चाहत-ऐ-किस्ती मे, तो सब्र करो
    इसको साहिल तक पहुचाने में वक़्त तो लगता है

    क्यों रोते हो अब अपने ही किये हुए उस काम पर
    गमो के दिन बिताने में वक़्त तो लगता है

    धीरे-धीरे भरेंगे, के ये गम और आंसू से बने है
    जख्म को भर जाने में वक़्त तो लगता है

    ए दिल ज़रा ठहर जा, ज़रा तस्सली रख
    किसी शहर जाने में वक़्त तो लगता है

    चलो मान लिया ये दरिया गहरा है लेकिन
    किसी की गहराई नापने में वक़्त तो लगता है

    तुम्ही ने कहा था एक दिन उसको मोहोब्बत जरूर होगी
    के किसी के दिल में जगह बनाने में वक़्त तो लगता है

    लौट जाऊँगा में भी इस शहर से लेकिन
    खुद को तालुक सब से करने में वक़्त तो लगता है

    इतनी जल्दी कहा ख़ाक होता है कोई
    खुद को जलने में वक़्त तो लगता है

    ये दिल भी एक कच्ची बस्ती है लोगो
    बस्तियां बसने में वक़्त तो लगता है………………!!

    D K

  • वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ……..

    वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ
    के एक बार मिल कर मुझ से, फिर बिछड़ जाने के लिए आ

    मुमकिन है अब ये होश भी साथ ने दे मेरा
    मुझ बेहोश पर एक चादर चढ़ाने के लिए आ

    कुछ तो मेरे पाक-ऐ-मोहोब्बत की जूनून को समझ
    के कभी तो तू भी मुझको मानाने के लिए आ

    जनता हू अब वो रिस्ता-ऐ-रस्म-ऐ-दिल नहीं है
    खैर एक नया रिश्ता ही बनाने के लिए आ

    किस किस को बताऊ मैँ, इस दिल के किस्से को
    तू मेरे लिए न सही, इस ज़माने के लिए आ

    यकीं-ऐ-चिराग अब भी जल रहा है मेरे सीने मैँ
    एक आखरी अहसान कर, इसको बुझाने के लिए आ………………….!!

    D K

  • बरसने के बाद…………

    हो गयी रुकसत घटा बरसने के बाद
    खिला मौसम नया बरसने के बाद

    मेरे गमो से रूबरू हो कर ये हवा भी
    जोर से बहने लगी बरसने के बाद

    होता आमना-सामना कुछ पल के लिए ही
    दिल-ऐ-खुवाईश बनी ये बरसने के बाद

    मेरी तन्हाईयों को देखने के बाद
    मेरी उदासी कुछ बोली बरसने के बाद

    उस चाँद को अकेला देख आसमा में
    एक तारा रो दिया बहुत बरसने के बाद

    चला जा रहा था मैँ अकेला ही उन रास्तो पर
    सरे पत्थड़ नर्म पड़ गए बरसने के बाद

    गीले कपड़ों पर नज़र पड़ी मेरी
    रो पड़ा दिल मेरा बरसने के बाद

    लिखा एक पन्ने पर मैंने उसका नाम
    कलम भी रो पड़ी बरसने के बाद

    चलो ये दिन भी याद रहेगा मुझ को इसलिए भी
    कोई बहुत याद आया था बरसने के बाद……………………………..!!

    D K

  • बेअसर कर दे……..

    अपनी सूरत को ज़रा सा इधर कर दे
    मेरे हर दिल-ऐ-गम को बेअसर कर दे………..!!

    D K

  • ढूंढते क्या हो हमें अब……..

    ढूंढते क्या हो हमें अब, इन वीरान कूचों मे
    मिलने की खुवाईश हो, तो हमारे कब्र पर चले आना…………!!

    D K

  • आँखों से आंसू गिर पड़े……

    आँखों से आंसू गिर पड़े आज, इस यकीन लव्ज़ को सुन कर
    के कभी हमने कहा था उस से मोहोब्बत यकीन का दूसरा नाम है………….!!

    D K

  • शख्शियत…..

    इस चाँद की शख्शियत भी कुछ काम नहीं तुझ से ज़ालिम
    जब भी मन करता है देखने को, कम्बख्क्त ये नज़र नहीं आता……………!!

    D K

  • मुझे भी शौख हुआ था………

    मुझे भी शौख हुआ था इस मोहोब्बत का साहिब
    जब गए इसको खरीदने, तो पूरी ज़िन्दगी ही बैचनी पड़ी……………!!

    D K

  • तस्वीर……

    न जाने कैसे और कब इस घर की तस्वीर बदल गई
    के कभी मरीज़-ऐ-मोहोब्बतो का यहाँ जमघट लगा करता था………….!!

    D K

  • वक़्त भी हार जाता है…….

    कुछ ज़ख़्म हमको ताउम्र याद रह जाते है साहिब
    के वक़्त भी हार जाता है, उन जख्मो के आगे…………..!!

    D K

  • एक इंसान कहते हुए………

    न मोहोब्बत, न साथी और न कोई घर अपना
    शर्म आती है हमें खुद को, एक इंसान कहते हुए……………!!

    D K

  • हमारी ज़िन्दगी का एक हिस्सा…..

    तन्हाई खुद-बा-खुद बन गयी हमारी ज़िन्दगी का एक हिस्सा
    चलो कोई ये तो नहीं कहेगा अब, ये तन्हा है दुनिया में………………..!!

    D K

  • खेल मे हारे तो…….

    इस खेल मे हारे तो इतना रोना आया है तुमको
    सोचो मोहोब्बत की बाज़ी हारते, तो क्या होता……………..!!

    D K

  • बंदिशे-ऐ-मोहोब्बत…….

    बहुत ही अजीब थी हमारी बंदिशे-ऐ-मोहोब्बत साहिब
    न वो हमको कैद कर सके, और न हम कही फरार हो सके…………!!

    D K

  • तो कर के देख लेना…….

    बड़ी ही ज़िल्लत-ऐ-ज़िन्दगी मिलती है इस इश्क़ मे साहिब
    हो अगर शौख-ऐ-चाहत दिल में, तो कर के देख लेना………………!!

    D K

  • हमारी आँखों को वो……

    हमारी आँखों को वो कभी गौर से देखता देखता साहिब
    तो वो भी रूबरू, रोने के सबब और जागने की खुमारी से होता……….!!

    D K

  • Kawwali…….

    वो कहने लगे रुख से पर्दा हम हटा नहीं सकते
    हम ने कहा तुम्हारे हुस्न को देखे बिना हम जा नहीं सकते

    वो कहने लगे इस से हमारी रुसवाई होगी
    हमने कहा होने दो गर जो जगहसाई होगी

    उस ने कहा कभी तो हमारा कहा भी मान लिया करो
    हमने कहा हरदम परदे में रह कर न जान लिया करो

    वो कहने लगे बड़े ही लाचार नज़र आते हो
    हमने कहा कभी बेपर्दा आप आते हो

    मुस्कुरा कर वो बोले अबके जरूर आउंगी
    हमने कहा वादा करो के अबके निभाऊंगी

    इतना कहना था के वो मुस्कुराने लगे
    धीरे धीरे नज़रें अपनी वो उठाने लगे

    फिर धीरे से कहा ये वादा है हमारा
    हमने कहा अब बस इंतज़ार है तुम्हारा

    इतना कह कर वो महफ़िल से जाने लगे
    कसम इश्क़ की वो और भी याद आने लगे

    उनके दिल को जाना शायद मंज़ूर न था
    मगर वक़्त को शायद ये मंज़ूर न था

    अब तो इंतज़ार है हमको उनके आने का
    और उनके बेपर्दा हुस्न पर गौर फरमाने का………………….!!

    D K

  • ओ बेवफा…….

    ताजुब नहीं मुझे तेरे बदल जाने से ओ बेवफा
    के कुछ लोग बदल नहीं सकते फितरत-ऐ-दिल अपना………….!!

    D K

  • खूब किया…….

    अपनी मोहोब्बत का हमने तमाशा भी खूब किया
    एक बेवफा ने हमको इश्क़ मे बेहताशा भी खूब किया

    सोचा था मर कर अब हम किधर जाएंगे, मगर
    उस बेवफा ने काम-ऐ-दिलासा भी खूब किया……………….!!

    D K

  • इंसा, इंसा को क्या देता है…….

    इंसा, इंसा को क्या देता है
    जख्म और सिर्फ दगा देता है

    पिला कर घूँट धोके का सबको
    ये बड़े आराम से सबको सुला देता है

    करता है विश्वास घात चंद रुपयों के खातिर
    दिल के रिश्तों को ये क्या सिला देता है

    बना लिया है इस ने रुपयों को खुद अपना
    इंसानियत को तो अब वो बहा देता है

    बागबानी करता है, झूठ के बीज बो कर
    धोके का फूल वो खिला देता है

    कोई हाल-ऐ-दिल अपना सुनाये कैसे किसी को
    हर कोई अब झूठा दिलासा दिला देता है

    दोस्त बन कर वार करता है खंज़र से
    इस पाक रिश्ते को भी भुला देता है

    अपना फ़ायदा देखते ही आज कल वो
    दूसरों को रास्ते से हटा देता है

    इंसा तो वो शक्श होता है दोस्तों
    जो एक बिछड़े को दूसरे से मिला देता है

    कभी सोचूंगा मैं फुरसत मे बैठ कर
    आखिर इंसा, इंसा को क्या देता है………………….!!

    !…..D K…..!

  • जैसे रहता हो समुन्दर तन्हा, किनारों की तरह…….

    पहली मोहोब्बत का तकाज़ा क्या करे हम
    वो मिला था हमको बहारों की तरह

    दीवानगी इस से बढ़ कर और क्या होगी
    हमने चाहा था उसको तलबगारों की तरह

    खता क्या हुई एक छोटी सी हम से
    वो हमें देखने लगा गुनाहगारों की तरह

    के ज़िन्दगी जी हमने तब से खानाबदोशों जैसे
    और रहने लगे हम बंजारों की तरह

    इस शहर से उस शहर, इस नगर से उस नगर
    छुपते रहे बस हम पनाहगारों की तरह

    गमो ने ज़िन्दगी मे जगह बना ली इस कदर भी
    के खुशियां रह गई महज़ ज़िन्दगी मैं बाज़ारों की तरह

    अच्छा सिला मिला उसकी इस चाहत का हमको
    ज़िन्दगी बन गई तन्हा, दीवारों की तरह

    रातों को जगना, और करवटें बदलना
    शरीर हो गया हमारा, बीमारों की तरह

    कभी वो मिलता, और पूछता हाल-ऐ-दिल मेरा
    खुवाईश बन गई थी, दरारों की तरह

    मौत भी डर रही थी मुझ तक पहुचने से जाने क्यों
    रूह बन चुकी थी, बैज़ारों की तरह

    लाते कहा से हौसला ज़िन्दगी जीने का
    हर एक दिन बीता था, तड़प के किरदारों की तरह

    लौटना था मुश्किल इस इश्क़-ऐ-सफर से अब
    के हालत हो गई थी हमारी कर्ज़दारों की तरह

    उसको तो मिल गया था आशियाना अपना
    हम बस तन्हा रह गए थे, बफ़दारों की तरह

    सहारा लिया हमने मयखाने का इसलिए भी
    हर पल बीतता था ग़मखारों की तरह

    थोड़ी देर के लिए सब कुछ भूल जाते थे हम
    वह लोग मिलते थे सब से यारों की तरह

    मोहोब्बत एक हसीं गुनाह है दोस्तों
    जिस मे सब फिरते है यहाँ वह मारो मारो की तरह

    आंसू बरसते है सबके आँखों से ऐसे
    जैसे बरसता है बादल, फुआरों की तरह

    मौत जल्दी नसीब होती नहीं उन सब को
    और ज़िन्दगी जीते है वो सब एक बेसहारों की तरह

    बंध गई ज़िन्दगी किसी दायरे मे ऐसे
    जैसे रहता हो समुन्दर तन्हा, किनारों की तरह…………………….!!

    !……….D K……….!

  • कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

    कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

    कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है
    बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है

    ज़िन्दगी सिर्फ अमीरों की नहीं है
    ये तो तोहफा है खुदा का, ये गरीबों की भी है

    क्यों करते हो नफरत तुम इन सब को देख कर
    ये हम जैसों की ज़िन्दगी को सरल कर रहे है

    जब आते है गली मे, कुत्ते भोंकते है इन पर
    सब देखते है इनको शक की नज़र से

    कभी झाँक कर देखो इन सब के घर और आंगन मे
    ये अपनी ज़िन्दगी का क्या हस्र कर रहे है

    अक्सर हम फैंक देते है कचरे को यूँ ही
    ये सब उन्ही कचरों मे रोटी ढूंढते है

    ये भी काम रहे है अपनी आजीविका
    ये भी हमारी तरह इधर से उधर कर रहे है

    ज़िन्दगी इनकी भी बड़ी आम सी दिखती है
    बस ज़रा बदनाम सी दिखती है

    हम सब भी करते है काम अपना अपना
    वो सब भी इसी तरह अपना अपना कर्म कर रहे है

    कड़ी मेहनत से जूझना पड़ता है उन सब को भी
    थकान शरीर की होती है उन सब को भी

    हम सब उठाते नहीं कचड़ा शर्म के मारे ये सच है
    मगर ये सब ये काम बेधड़क कर रहे है

    शिकार होते है ये बस हमारे बनाये हुए समाजो के
    मिलती है गालियां, डांट और गुस्सा

    कचड़ा अगर ये न उठाये तो गंदगी बहुत बढ़ जाये हर जगह पैर
    ये सब ऐसा कर के, बहुत बड़ा धर्म कर रहे है

    कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है
    बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है …………………………………..!!

    !……….D K……….!

  • Love……

                     Love

    I find myself, in love, waste
    I thought, love is, totally waste

    But someone told me, it is nice
    By which, every human become wise

    It includes sorrow, reliance & emotion
    That is why it is found in every relation

    It makes our life as like a heaven
    It is very innocent, not a clever

    Once again when I thought on it
    Then I found truthiness in it

    That was not my fault, I said
    Despite of, some person addressed me “Bad”

    I didn’t know about facts of love at that time
    That it spread fragrance & make our life as shine

    Then I began to think about it more
    I found sometime it is sweet, sometime it is sour

    After that I knew, one special thing about love
    That it is very special & very precious for all…………………!! By: D K

  • इश्क़-ऐ-नाकामी का सबब……

    अपनी इश्क़-ऐ-नाकामी का सबब बस इतना था साहिब
    मांग बैठे थे खुदा से वो चीज़, जो बहुत अज़ीज़ थी खुदा के लिए…………!!

                                                                                …………………D K

  • ऐ खुशियां…….

    ऐ खुशियां अब तो लौट आ तू
    मेरी ज़िन्दगी में सुलह कर करके

    के अब न वो रहा, न उसकी यादें,
    और न कोई बहाना इस दिल का…………!!

                                       ……………..D K

  • हाल-ऐ-दिल……..

    कही तन्हा न कर दे तुझे,
    ये आदत तन्हा रहने की

    रातों को अपना हाल-ऐ-दिल
    तू चाँद, तारो से कह दिया कर……………….!!

                                             ………………D K

  • सारे मौसम रो रहे है………

    इस बारिश के रुकने का इंतज़ार न करना तुम आज
    हमने पीया है गम-ऐ-आंसू, सारे मौसम रो रहे है……………..!!

                                                                 …………………D K

  • चिराग की तरह……..

    तू हुकुम ही नहीं दे सका, हमको रोशन करने के लिए
    के हम तो पड़े थे तेरे ही घर मे, चिराग की तरह……………..!!

                                                              …………………D K

  • ज़िन्दगी अपनी……

    ताश के पत्तों की तरह हो गई है ज़िन्दगी अपनी,
    जो भी आता है बस खेल कर चला जाता है………………!!

                                                             ………………D K

  • पूरी ज़िन्दगी……..

    इतना भी आसान नहीं,
    किसी को इश्क़ मे पा लेना

    पूरी ज़िन्दगी दाव पर लगनी पड़ती है,
    हर तरह से किसी का होना पड़ता है…………..!!

                                                    …………D K

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