चल कहीं नदिया किनारे, प्रिय नयन,सुन्दर चितवन नैनों में दमके,तेरे काजल है मेरा मन ऐ पागल जब बजती तेरी पायल झूमे जहाँ बस चाँद तारे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ आवाज़ दो ,संग संग आ जाऊँ लहर लहर आभास तेरा कश्ती दो तो पार हो जाऊँ तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

कहाँ चला अलबेला मन तू, बेस जिया में,पिया हमारे इन प्रिय को,जग में न खोजो, बसी नयन सुरतिया प्यारी कहाँ चला अलबेला मन तू -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

सांझ हुई,दीपक जलाओ आयंगे प्रियतम तुम्हारे हैं अँधेरे पंथ में जो है वही चांदनी हमारी सांझ हुई दीपक जलाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

है प्रभु विनती हमारी मार्ग दो संसार को है निशा जहाँ जगती पर प्रकाश दो संसार को तुम हो नाथ अनाथ के सानिध्य दो संसार को है प्रभु विनती हमारी सार दो संसार को -विनीता […]