Author: Vinita Shrivastava

  • साहित्य एक माला

    साहित्य सृजन इक,
    विश्व प्रेरणा होती है

    मिले प्रेरणा हर शब्द से,
    वो कविता ही माला होती है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • अकारण

    अकारण ही मनुज,
    क्यों मनुज से जलता है

    विजय पाने की होड़ मैं,
    विचारों से गिरता है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • डर

    मैं तूफाँ नहीं,
    क्यों मुझसे डरते हो

    ईर्ष्या मैं क्यों,
    जल जल कर मरते हो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • चल कहीं

    चल कहीं नदिया किनारे,
    प्रिय नयन,सुन्दर चितवन

    नैनों में दमके,तेरे काजल
    है मेरा मन ऐ पागल

    जब बजती तेरी पायल
    झूमे जहाँ बस चाँद तारे

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • विषम

    चन्दन का वन हो,
    प्यारा मधुबन हो

    विष धार ,न विषम हों
    श्रष्टि में सम हों

    चन्दन सा वन हो
    प्यारा मधुबन हो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • साज

    तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ
    आवाज़ दो ,संग संग आ जाऊँ

    लहर लहर आभास तेरा
    कश्ती दो तो पार हो जाऊँ

    तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • अलबेला मन

    कहाँ चला अलबेला मन तू,
    बेस जिया में,पिया हमारे

    इन प्रिय को,जग में न खोजो,
    बसी नयन सुरतिया प्यारी

    कहाँ चला अलबेला मन तू

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • रास्ते

    त्रिकोण से हैं रास्ते
    जिस रास्ते तू जायगा,

    फलित होंगे कर्म वैसे
    जिस रास्ते तू जायगा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • सांझ

    सांझ हुई,दीपक जलाओ
    आयंगे प्रियतम तुम्हारे

    हैं अँधेरे पंथ में जो
    है वही चांदनी हमारी

    सांझ हुई दीपक जलाओ

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • प्रभु

    है प्रभु विनती हमारी
    मार्ग दो संसार को

    है निशा जहाँ जगती पर
    प्रकाश दो संसार को

    तुम हो नाथ अनाथ के
    सानिध्य दो संसार को

    है प्रभु विनती हमारी
    सार दो संसार को

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • प्रभु विनती हमारी

    है प्रभु विनती हमारी
    मार्ग दो संसार को

    है निशा जहाँ जगती पर
    प्रकाश दो संसार को

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • राम

    दीन दयाल प्रनत पालक
    दीन बंधू हे राम

    जन्मूँ या मरुँ
    परे तुम्ही से काम

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • कान्हा

    कारो कारो सांवरो
    कारी जाकी सूरत

    कारी कारी कंगी है
    काली दह से कीरत

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • दामिनी

    सावन की काली रातों में
    उमड़ घुमड़ जब दामिनी दमके
    पट खोलो अंतर् मन के

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मेघ

    उमड़ घुमड़ कर छाये घटा
    देखो चहुँ ओर
    पंख फैलाय,नाचे वन में मोर
    ये मधुमास है प्यारा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • सावन

    अम्बर बरसे धरती भींगे
    नाचे श्रष्टि सारी
    सावन की बरखा प्यारी

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • पाश्यचात्य होड़

    आधुनिकता की होड़ में
    पाश्यचात्य संस्कृति अपना रहे

    हम शौर्य वीर भारतबासी
    किस मोह में हैं बंध रहे

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • धरा

    इस धरा पर किसका हक़ है
    जो तू इसे उजाड़ रहा

    मत खेल इस माया से
    तू खुद का नसीब बिगाड़ रहा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • नारी

    नारी नहीं जागीर किसी की
    मत इसका अपमान करो

    सम दृष्टि रख करके
    इसका सम्मान करो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • तक़दीर

    तक़दीर ऐ जुल्म
    नहीं है हमको इल्म

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • बहार

    बहार है तो फ़िज़ां है
    फ़िज़ां है तो बहार है

    हमको दोनों से ही
    प्यार है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • वक़्त

    कम्बख्त वक़्त ये नहीं कटता
    वक़्त का रुख हर वक़्त बदलता

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • बाधा

    आज हमारे रास्ते में
    बाधा हज़ार हैं

    हारो न हिम्मत
    जय बार बार है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • बुलबुले

    पानी के हम बुलबुले,
    लहर बन जायँगे
    सीने पर कश्ती चलायंगे

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • नाव

    हस कर चलते रहो
    आंसू न बहाओ

    ख़ुशी और गम की,
    है ये नाव

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • रंग

    रंग रंग हज़ार हैं,
    रंगों में एक रंग

    रंग लो अपने मन में
    देश भक्ति का रंग

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • नज़र

    नज़र ऐ खूब है खूब नज़राना
    देखूं तुझे या जमाना

    मनो न मनो मर्जी तेरी
    देदी मेने अर्जी मेरी

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • जागीर

    ऐ ज़िन्दगी किसी की जागीर नहीं
    आज़ाद परिंदा रूह सबकी

    रूह तक पहुंचा जो,
    दुनिया में आबाद रहा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • तालीम

    तालीम लो न नफरत की,
    आदमी से प्यार करो

    ये रास्ता नहीं जन्नत का,
    मत दुनिया बर्बाद करो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • फूले फले

    आबाद रहे नित फूले फले
    ये देश मेरा
    ये देश तेरा

    विजयी रहे मंगल बरसे
    ये देश मेरा
    ये देश तेरा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • चाँद

    अमावस की रातों में,
    चाँद कभी ही आते हैं

    लेते अँधेरा दुनिया का
    उजयारा कर जाते हैं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • शक

    इस पर शक,
    मत कर यारों

    विश्व विजयी ,
    ये भारत है

    हम संतानें हैं इसकी,
    करता मन से आरती है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मन्नत

    मन्नत मेरी पूरी हो जाये
    भारत में जो शांति आए

    सारा ताम दूर हो जाये
    मिल जुलकर ज्योत जलाएं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • वीर

    कायर नहीं वीर बनो
    मुश्किल में धीर बनो

    बादल तो छठ जायगा
    छा कर इनको घिरने दो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • अंगारे

    अंगारों पे चलने का
    शौक बहुत रखते हैं

    लाखों में कुछ ही
    आग पर चलते हैं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • विधि

    विधाता की विधि को
    न कोई जान सका

    अपरम्पार का पार
    कोई पा न सका

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • चन्दन

    कर्म काजल से न करो
    मेहको तुम चन्दन से

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मेरी बेटी

    मेरी शान है बेटी
    अभिमान है बेटी

    हर मुश्किल में
    साथ है बेटी

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • बेटी

    पायल की खनक रुनझुन
    सुखद एहसास करती है

    आंगन में बेटी जब
    छन छन करती आती है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • कागज की नाव

    कागज़ की नाव हम
    कश्ती तेरे हाथ में

    बंधन हूँ,
    मुक्ति तेरे हाथ में

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • बेवसी

    मजबूरी नहीं कोई
    फिर भी मजबूरी क्यों है

    आज़ाद हूँ फिर भी
    बेबसी क्यों है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • न्याय

    कब तक सहन करोगे
    अन्याय तो अन्याय है

    परिचय पालो खुद का
    न्याय करो,न्याय चलो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • कांच

    कांच की दीवार सा जीवन
    दरार न आए

    चेहरा देखो आईने में,
    पहचान हो जाये

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • जाग

    जाग्रति के इन पलों में
    जाग कर जाग्रत करेंगे

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • वहां

    तुम नहीं थे कल वहां
    तो हम नहीं थे कल यहाँ

    जो कदम तेरे चले
    वो कदम मेरे चले

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • सानिध्य

    आओ वरण करो,मैं तुम्हारे सानिध्य में हूं
    धरा में हूं या अंतरिक्ष में
    आभास है तेरे प्रतिनिधित्व में हूं
    नहीं पता किस लोक में हूं

  • पराजय

    रात रात भर जाग कर
    आगे बढ़ने की होड़

    चल कपट से जो जीता
    ये तेरी जीत नहीं

    संभल जा ऐ बंदे
    जीत के भी तेरी हार हुई

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • कर्म

    परिणाम न देख मनुज
    कर्म कर बस कर्म कर

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • द्वेष

    राग द्वेष अरु पाखंड
    कारण विनाश के प्रचंड

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मानवता

    मानव मानवता सीखो
    मत होड़ करो तुम बढ़ने की

    मत काव्य का अपमान करो
    देश हित काव्य सृजन करो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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