हम अपनी रातों को गुलजार ना बैठे थे किसी बेवफा को अपना यार बना बैठे थे। सूंघ के देखा तो खुशबू तक नहीं आई, बासी फूलों से हम हार बना बैठे थे।

तू मेरा है मगर मेरा तो नहीं ये दिल तेरा है मगर तेरा तो नहीं एक उम्मीद की डोर है जिसने मुझको तुझसे बाँध रखा है तू रब है मेरा मगर मेरी मन्नत तो नहीं।

जख़्म देकर वो मुझसे कहता है पीर दिल में तो नहीं उठती है । आँसू हैं तेरे या पानी हैं तू उदास क्यों नहीं दिखती है। तेरे होंठों की जो रंगत है क्यों मुझे फीकी […]

कुछ दिनों से दिल में लहरें सी उठती थी, उसके नाम से मन में एक आस सी जगती थी। वो मेरी आंखों का सिर्फ एक धोखा था, प्यार तो बहुत था पर प्रज्ञा’ पर एक […]

मेरी हर सांस में तुम ही हो मेरी हर बात में तुम ही हो। जीवन की सुंदर छवि में जब ढूंढती हूँ मैं, मेरे मन मन्दिर के प्राणनाथ तुम ही हो। परिवर्तन की इस लहर […]

जीवन ज्योति की एक ललित सरिता बहे सुंदर सुकोमल कविता बने, हो चहुँ ओर प्रकाश फैला हुआ मेरी लेखनी में वो बात रहे। नहाए हुए से लगे शब्द मेरे भाव तो जैसे खो ही गए […]

तुम्हारे बिन ये चार दिन हमने कैसे काटे हम नहीं जानते, तुम मेरे जीवन साथी हो पर मेरे कब तक हो यह भी हम नहीं जानते। तुम्हें रातों में नींद तो जरूर आई होगी, पर […]

जीवन की सत्यता में झांक कर अपने फर्ज को अदा करना सीखा है। गिरे तो कई बार पर गिर कर उठना भी सीखा है। यूं तो हम खड़े रहते हैं अपने फैसलों पर, पर कभी-कभी […]

एक दुआ है खुदा से कि खुदा ऐसे ख्वाब ना दिखाएं जो पूरे ही ना हो ऐसे लोगों से ना मिलाए जो कभी अपने ना हो होठों पर मुस्कुराहट रलाने वाले लोग भले ही ना […]

जीवन में बहुत सी कठिनाईयाँ आती हैं जाती हैं कभी तो रुलाती है तो कभी कुछ सिखाती हैं हम नहीं जान सकते हमारा भविष्य क्या है पर ये जो पल है हमारे हाथ में है […]

लिख भेजा एक संदेश जा पहुंचा उनके पास आया ना कोई खत मुझे ना आया कोई जवाब ऐसा प्रेम किया हमनें ऐसी कैसी प्रीत ना ही मेरी हार हुई और ना ही हुई है जीत।

हम गलत हैं या सही हमें कुछ भी पता नहीं पता बस इतना चला है ये दिल मचल चला है फिर एक बार गुनाह करने चला है क्या करें, क्या कहे हम नहीं जानते ये […]

जिन्दगी में परेशानियां जब हद से बढ़ने लगे ये निगाहें निगाहों से लड़ने लगे मुकद्दर भी जब मुह फेर ले कोई तड़पता हुआ ही छोड़ दे तब जीवन में आगे बढ़ो अपने भावों को आवाज […]

कभी-कभी लगता है हम दुनिया के सबसे बदकिस्मत इन्सान हैं पर°° जब अपने हाथ पैरों को सही सलामत देखते हैं तो अमीरी का एहसास होता है।। By pragya shukla

संसार में ईश्वर के बाद एक कवि ही है जो हथेली पर सूरज उगा सकता है और पथ्थर पिघला सकता है ये काम साधारण मानव की सामर्थ्य से बाहर है…

विपक्ष हो या आलोचक दोनों हमारी कमियों को उजागर करते हैं ————————- अतः सरकार हो या कवि उसे स्वयं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

वाह क्या बात है! अजय मिश्र दोषी नहीं हैं और ना उनका बेटा ये तो साफ साफ जताता है कि तुम झूठे हो मक्कार हो और कुर्सी के लोभी हो। दोषी को निर्दोष बताया ये […]

ये अगर किसी को सांत्वना दें तो राजनीति आँकी जाती मोदी या योगी भ्रमण करें तो भावुकता क्यों दिख जाती! इतनी ओछी राजनीति तो पहले कभी नहीं हुई भारत की यह भूमि कभी इतनी धूमिल […]

जिसने कुचला गाड़ी से वह गोदी में बैठा है सीतापुर की जेल में बंद एक कांग्रेसी नेता है ये वर्तमान सरकार मुझे अंग्रेजों की याद दिलाती है जो बैठे हों गोदी में बस उनको न्याय […]

तुम्हें क्या लगता है योगी ? इंटरनेट बंद करने से तुम्हारे गुनाह छुप जायेंगे बीजेपी में रह कर कोई कुछ भी करे उसके पाप धुल जायेंगे हम सीतापुर वाले हैं साहब ! अगर सीतापुर में […]

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस —————- बोझ नहीं आशीर्वाद हैं बुजुर्ग, जीवन में आती जाती समस्याओं का सामना करने की प्रेरणा देते हैं। मन में हो मलाल तो अपने स्नेह भरे हाथों से सहला कर हमें संभाल […]

सुबह की पहली किरण को नमस्कार आशा है सबके जीवन में हो प्रभात खुशियाँ झूम कर दें दस्तक किस्मत टेक दे कर्मों के आगे मस्तक, मस्तक रहे ऊँचा सदा करो ऐसा काम। घटने ना देना […]

नारी की अस्मिता पर जैसे ही बात आती है नारी रौद्र रूप और जाती है जब जब पुरुष की इच्छा हुई तब तब नारी के चरित्र की परीक्षा हुई नारी तो है निर्मल पावन गंगा-सी, […]

गाँव की गलियाँ और गाँव का सवेरा झिलमिल सितारे और कलियों का सेहरा बीतने लगीं अब तो शामे भी लम्बी बाजरे की रोटी और भिंडी अब तो जैसे जमाने हो गए ! अब हमें भी […]

कभी-कभी हंसी आ जाती है तुम्हारी बातों पर। रातें भी मुस्कुराती हैं तुम्हारी बातों पर। जाग उठते हैं दिल में अरमान मेरा कल मुस्कुराता है तुम्हारी बातों पर। कोशिश लाख करूं तुमसे नफरत करने की […]

कभी फुर्सत मिले तो हमको भी तुम याद कर लेना भले झूँठी ही हो आहें मगर एक आह भर लेना। हम भी हैं तुम्हारी राह के एक मुरझाए हुए से पुष्प, जब कभी हो अकेले […]

जाने कैसी है तुम्हारी याद वक्त बेवक्त आती है कभी मुह ढक कर कभी मुह दिखाई के लिए आती है तुम्हारे नाम का सिन्दूर लगा कर मुझे रोज चिढ़ाती हैं सिरहाने पर बैठ कर कोई […]

माँ के आँचल में छुप गए जब डर लगा पापा ने हिम्मत सिखाई और राह चलना सिखला दिया बहन ने रखी पहनाई स्नेह से घर भर दिया कौन कहता है कि रिश्ते दर्द देते हैं […]

डॉटर्स डे स्पेशल:- बेटियां हैं पराई तो क्या मान और सम्मान देती हैं, आँख में आते हैं आँसू तो हाँथों से पोंछ देती हैं। जिन्दगी में कोई भी हो तकलीफ मगर होंठो पर मुस्कान रखती […]

जीत ली तुमने दुनिया तो क्या हमारा हृदय न जीत सके देश जीते होगे तुमने पर प्रेम को न जीत सके। एक वक्त था जब तुम मेरे लिये गीत गाते थे स्वयं गाते थे उसे […]

नहीं करनी हमें तुमसे बराबरी क्योंकि तुम हमसे एक कदम आगे हो अच्छाई में भी आगे और बुराई में भी आगे हो। कल जब कोई तिनका भी तुम्हारा साथ ना देगा कल जब तुम्हें कोई […]

संस्कार है हमारे जीवन का आधार जिसकी दहलीज़ पार करने पर समाज बहिष्कृत कर देता है और जिसका पालन करने पर महापुरुष की उपाधि देता है। जीवन में संस्कार और शुद्ध आचरण हमें दैवीय शक्तियों […]

नहीं बैठ पाया वो पंक्षी किसी भी डाल पर, जिसके बच्चों को वृक्ष सहित गिराया गया हो। विश्वास अब किस पर करे वह जब यह कृत्य देवरूपी दिग्गजों ने किया हो। अब कहाँ रहे वो […]