आज सुकून की तलाश करने को जी नहीं करता तुमसे बात करने को भी जी नहीं करता जलते हुए चिरागों में रह लिये बहुत, चिराग दिल के जलाने को जी नहीं करता।।
आज सुकून की तलाश करने को जी नहीं करता तुमसे बात करने को भी जी नहीं करता जलते हुए चिरागों में रह लिये बहुत, चिराग दिल के जलाने को जी नहीं करता।।
जुलाई की शुरुआत है कहाँ खोई सावन की बरसात है ? तन पर लिपटे कपड़े सर्प के समान लगते हैं झोपड़पट्टी वालों का तो और भी बुरा हाल है। रूखे रूखे पत्ते हैं डालियाँ मुरझाई […]
कुमार विश्वास की कविता:- मांग की सिंदूर रेखा” एक प्रेमी के हृदय की वेदना को तो बखूबी व्यक्त करता है। जब उसकी प्रेमिका का विवाह किसी और के साथ हो रहा होता है, तब प्रेमी […]
मेरे हृदय की घंटियों को किसी ने जोर से बजाया है मैं आनंदित हो उठी हूं तुम्हारा फोन आया है तुम्हारा फोन आया है। ह्रदय की सरजमी को तुमने अंदर तक हिलाया है तुम्हारा फोन […]
कंबल की अभिमंत्रित प्यासी जटाएं, एकाकीपन में डूब गईं… जिसकी सुगंध वासुकी की स्वांसों को महका रही थी•• तभी कोई अनजानी अन- पहचानी आकृति, बादलों के कंधों पर सो गई और दृढ़ हनु को अंश […]
मेरे हिस्से की स्वांस पूछती है- रात्रि में श्यामल ओस से लक्षित वह कौन-सा प्रतिबिंब है जो सुनाई तो देता है, परंतु दिखाई नहीं देता चौमास की अर्धगन्ध से बने पुतलों से फूले हुए पलस्तर […]
हरदोई के गोपामऊ में जन्मे रघुवंश सहाय वर्मा जी को उनकी जन्मतिथि पर, प्रज्ञा शुक्ला’ की तरफ से शब्दों का सुनहरा गुलदस्ता सप्रेम भेंट:- ————————– 30 जून को जन्मे रघुवंश सहाय जी जन्मतिथि पर उनकी […]
संजय गांधी जी की पुण्यतिथि ———————— 23 जून 1980 को चिराग एक बुझ गया संजय गाँधी नाम था उनका एक विमान दुर्घटना में चला गया। दिलचस्पी थी उनको विमान कलाबाजी में प्रतियोगिताओं में भाग लेकर […]
श्री राम’ के नाम पे बोलो कब तक तुम राजनीति करोगे? ब्रह्म विरोधी, कर्म विरोधी बोलो कब तक तुम छुप पाओगे पूँछ रहा है मुझसे भारत कैसी ये राजनीति हुई है चारों ओर है संकट […]
जितिन प्रसाद जी को प्रज्ञा शुक्ला की पाती:- सेवा में, प्रिय जितिन चाचा’ भगवाधारी ‘कांग्रेसी चाचा श्री, आज तुम्हारी छवि धूमिल हो गई जितिन जी, या कि कहूँ मैं छवि ही तो मिट गई जितिन […]
नागार्जुन जी के जन्मदिवस पर सप्रेम भेंट मेरी कुछ पंक्तियां:- ———————- हिंदी साहित्य के यात्री’ युवाओं के सारथी राजनीतिक विश्लेषक थे वह जय हो भारत भारती हिंदी में विख्यात हुए वह नागार्जुन’ के नाम से […]
जीवन में स्वाभिमान और झुकाव दोनो जरुरी हैं स्वाभिमान कभी°°° स्वयं का अपमान होते नहीं देख सकता और झुकाव कभी अपमान होने नहीं देता। •••झुकी हुई झाड़ियां कभी नहीं टूटती बड़े बड़े दरख्ते अक्सर टूट […]
बाँस की तरह सदा तना रहता हूँ मुश्किलों के आगे भी नहीं झुकता हूँ पवन के झोंको के थपेड़े खाकर अनर्गल वार्तालाप और प्रपंच में फंस कर कई बार रोया हूँ कई बार टूटा हूँ, […]
मृत्यु है निश्चित तो डरना कैसा ? जीवन है एक सत्य तो घबराना कैसा ? सीड़ियों पर बैठी मुश्किल देखे रस्ता•• जब हो बाजुओं में बल तो घबराना कैसा! करते रह तू प्रयत्न तो सुलझेगी […]
भुला दो दर्द भरे गीतों को, •••बुला लो अपने हमदर्द और मित्रों को। मिट जाएगा मन का हर संताप, क्यों करते रहते हो तुम इतना प्रलाप। बुरा वक्त है धीरे-धीरे कट जाएगा, °°°तुम्हारे उदास होठों […]
“श्रद्धेय स्वामी विवेकानंद पर कविता” उतरा वह जहाज से अपने रेत में ऐसे लोट गया जैसे बरसों से बिछड़ा बच्चा हो मां की गोद गया जब नरेन’ से बने विवेकानंद तभी जानी दुनिया वाह थे […]
किनारे पर बैठकर क्यों नाव का इंतजार करते हो! छुपाते हो, डरते हो, फिर भी प्यार करते हो नेह की चादर में जिस दिन सोए थे तुम संग हम जान गए थे हमसे कितना प्यार […]
“वक्त” ——— मैं डूबता-सा कल हूँ आऊंगा नहीं जकड़ लो बांहों में फिर आऊंगा नहीं जो भी करना है निश्चय कर तुम आज ही करो बैठा हूं सीढ़ियों पर तुम ध्यान तो धरो गुंजाइश नहीं […]
लिफाफे में बंद करके कुछ शिकायतें भेजती हूँ उनको तुम्हारे पास अभिलाषा है तुम तक पहुंचेंगी मेरी चिट्ठियां और मेरे मन की बात सुनवाई होगी या मुह फेर लोगे! या फिर आ लौटोगे मेरे पास […]
आकाश से एक बूंद गिरी मचल कर धरा पर विरहाग्नि में स्तब्ध उर्मिला को देख कर••• बोली हे उर्मिला! तू है दीपक जलाए उधर इंद्रजीत ने वो दीपक बुझाए। शक्ति से किया है प्रहार उसने […]
तेरे नैनों से प्रेम की बरसात हो गई लड़ झगड़ के देखो मेरी रात हो गई प्यार में हार गए हम सौ दफ़ा क्या करें अब तो जमानत भी जप्त हो गई सावन में बौर […]
मैं फिर से नींद के आगोश में जाना चाहती हूँ तेरे नैनो के गंगाजल से गंगा स्नान करना चाहती हूँ मैं हूँ पतित, पापों की गगरी हूँ अपने गुनाहों को पश्चाताप की चादर में छुपाना […]
ले गई मुझको रोशनी जाने कहां! रहा तिमिर में बसेरा अपना सदा। कोशिशों की बनाकर के बुनियाद हम, रोज कोसों चले नंगे पैरों से हम। बनाती रही हमको महरुम वो, स्वप्न देखे सदा जब कभी […]
कैप्टन मनोज पाण्डेय जी को नमन है जिनके बलिदान के कारण हम भारतीय साँस लेते हैं कारगिल के युद्ध को हम कैसे भूल सकते हैं ! अपने प्राणों को किया न्योछावर भारत माँ की खातिर […]
दुश्वार हो गया जीना अब तो काटों से छिल गए तलवे अब तो। मोहब्बत में हुए हम तबाह लोग कहते हैं, हम बन गए शायर अब तो। पथरा गई आँखें इन्तज़ार में उसके, जागते-जागते हम […]
तड़पाने के अलावा और तुमने किया ही क्या है बार बार मुझको चरित्रहीन कहा है ये कैसी मोहब्बत है तुम्हारी ? जिससे प्यार किया उसी को बाजारू कहा है जो तुम्हारी मोहब्बत में सराबोर होकर […]
नींद गई रैन गई सांसें बेचैन भईं रात गई बात गई आधी-सी साँस गई मीत गया गीत गया आंगन का फूल गया मेरा सर्वस्व गया हाय रे! वर्चस्व गया नहीं गया आज भी ईर्ष्या और […]
सर्वस्व न्योछावर कर दिया तुझ पर मोती, माणिक्य पन्ना, हीरा हृदय की विक्षिप्त भावनाएं, क्रूर सम दृष्टियों से दृष्टिपात करके यौवन की प्रथम वर्षगांठ पर हृदय हीन किया तूने••• हृदयगति हुई मद्धम स्वांस की ऊर्जावान […]
फादर्स-डे स्पेशल:- तेरी उंगली पकड़ कर बचपन की रेलगाड़ी में सफर किया सफर सुहाना था मन को आनन्द मिला जीवन की आड़ी-टेढ़ी रेखाओं में दुखों की बाहुबली भुजाओं में एक तेरे सहारे से ही ताकत […]
मेरे भावों में हो संवेदनाएं इरादा ना हो किसी को ठेस पहुंचाने का मलिन हो जाए चाहे तन के कपड़े इरादा ना हो दिल में मैल रखने का विश्वास से भरा हो हर रिश्ता कोई […]
“बाल श्रम निषेध दिवस” —————— नन्हे सुमन हैं इनसे क्यों करवाते हो मजदूरी पढ़ने दो स्कूल में इनको ना करवाओ अब मजदूरी खिलेगे नन्हे पुष्प तो भारत का नक्शा बदलेगा इनके आगे बढ़ जाने से […]
जिंदगी की उलझनों से फुर्सत लेकर आओ बैठो मेरे पास कुछ पल••• दो आराम अपनी सांसों को बंद कर दो मुट्ठी में सितारों को ……जुगनू बिछा दो पैरों के तले आ पंख फैलाकर आसमान में […]
कर्तव्य पथ पर बढ़ चल ना फिकर कर जो मिले राह में मुश्किलें ना फिकर कर हौसला बुलंद रख किस्मत को मुट्ठी में बंद रख पुष्पों पर चलकर कभी नहीं मिलती है मंजिल याद रख […]
एक दिन यूं ही अनजाने में खाया था एक आम चूस कर उसकी गुठलियां फेंकी थी जमीन सूखी ही थी, फिर कभी बरसात हुई वो आम की गुठली पृथ्वी के गर्भ में समा गई, सावन […]
सौंदर्य एक परम अनुभूति है, हमारे नेत्रों से आत्मसात होकर अन्तस तक जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य हर मन को भाता है। काव्यगत सौंदर्य काव्य के गुण-धर्म से परिचित कराता है। विचारों का सौंदर्य व्यक्तित्व को […]
तेरी कल्पनाओं का कायल हुआ जाता हूँ भावनाओं में तेरी बहता-सा जाता हूँ शब्द तुम्हारे फूटते हैं अंकुरित होकर तेरी स्मृतियों में खोया सा जाता हूँ दोपहर में तू घनी छांव सी है प्रज्ञा’ तेरी […]
खुशियों के रंग फैलाओ बिखरा दो तुम पुष्पों को नए नवेले पंख लगाकर सच कर दो तुम स्वप्नों को चित चंचल है नयन बिछाए देख रहा है अम्बर में चाँद को शायद लाज़ आ गई […]
बन्धन में होना बाध्य नहीं अपितु एक स्वतंत्रता है विचारों की स्वतंत्रता, भावों की स्वतंत्रता, जीवन के अद्भुत अनुभवों की स्वतंत्रता, सागर के विशाल गर्भ में विचरण करने की स्वतंत्रता, नव- विटप के वातास होने […]
फिर मुझे याद कर रहा होगा फिर वो आँसू बहा रहा होगा उसके नैनों की झील से बहकर फिर कोई खत आ रहा होगा।।
गुंजाइश ही नहीं थी कि चांद यूँ बदली में अपना मुँह छुपा लेगा, मुझे देखेगा और कुछ ना बोलेगा। मेरी नाउम्मीदी को नकार कर पूर्णिमा की अनघ चांदनी में संवर कर, चला गया वो घने […]
खामोशियों को अपनी बस एक राज रहने दो आज कुछ मोहब्बत की बातें हो जायें, शिकायतों के पुलिंदे कल खोल लेना, आज रहने दो। अंधेरों की, उजालों की, बातें आज करते हैं, बड़ा गमगीन है […]
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस:- जीवन में ये जहर क्यों घोलते हो अपने फेफडों को तुम धुयें से क्यों सेंकते हो छोंड़ दो तम्बाकू का सेवन करना सीख लो तंबाकू छोड़ कर जीना ये तुम्हारी सेहत […]
क्यों लुटती हुई जिन्दगानी मिली है क्यों हर नब्ज़ आज पानी से भरी है बहुत रो लिये हम अंधेरों में जाकर क्यों हमको ये पीर की निशानी मिली है ना आँखों में अब रह गये […]
मेरी बेसुध, बेजान पड़ी रूह बेआबरू हुआ जिस्म आज फना हो रहा है जा रहा है अन्तरिक्ष की वृहद सैर पर, जीवन में कुछ लूटेरों मेरे वजूद को ही मार दिया मेरे औरत होने पर […]
जख्मों को हमारे वह कुरेदते जा रहे हैं, कुछ इस तरह वह मुझे आजमा रहे हैं। मेरी रूह में सांस धुंधली हुई जाती, हम उनकी मोहब्बत के कर्जदार होते जा रहे हैं।
हे ईश्वर! उस दिवंगत आत्मा को शांति दे ममता की घनी छांव आज उदास हुई उस माँ की ममता को शक्ति प्रदान करे कोख का उजड़ जाना कैसे सहेगी वो, भला बेटी बिन अब कैसे […]
रोई तो होगी आज चांदनी भी, टपक के गिरी होगी जमीं पर बूंद बूंद बन के पिघली होगी वो हाय ! कैसे संभली होगी वो निराश नैन पथरा गये होंगे दिल के टुकड़े हो गए […]
ओ मेरी घृणित, उपेक्षित ईर्श्या! तू अभी जिंदा है!! मेरे पीर के तम में मेरे आज में कल में पर्वतों की विशालता सम तू अभी जिंदा है!! मेरे जीवन में उजास-सी किसी क्लेश की तलाश-सी […]
रुक गई सांस, भर आया हृदय दुख के सागर में मन डूब गया व्यथित हुआ भारी हुई पलकें तुझसे मिलने को मन छटपटाने लगा.. कैसे तुझसे अब कहूँ कुछ मैं कैसे तुझको अब संभालूँ मैं […]
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