दुनिया में रहकर दुनिया को तकता हूँ आईने को किसी दुश्मन सा तकता हूँ बेनूर से मंजर का हक़ लिए फिरता हूँ , आँखों से बस ढहते ख्वाबों को तकता हूँ राजेश’अरमान’

कुछ खत रेत पे लिखे , मैंने तेरे लिए फिर हवाओं को सदा दी, मैंने तेरे लिए अपने हिस्से की बूंदे तोगिरा दी मैंने कुछ आँखों में छुपा दी ,मैंने तेरे लिए तेरे खत को […]

नज़राना क्या दूँ ,दोस्त तेरी दोस्ती का हक़ अदा कैसे करूँ ,दोस्त तेरी दोस्ती का कहने को अल्फ़ाज़ कुछ इस तरह है मौजूँ न छूटे कभी साथ ,दोस्त तेरी दोस्ती का राजेश’अरमान’

आदरणीय ‘कार्टूनिस्ट ‘ प्राण जी को श्रद्धांजलि याद तो बहुत आओगे और भूलना बेहद मुश्किल तुम मेरे यादों में बसे तुम मेरे बचपन के साथी तुम मेरे भीगी आँखों की मुस्कान तुम मेरे सपनो को […]

अब तो दिन बौने आदमकद रातें हो गई है बर्क आसमां पे आँखों से बरसातें हो गई है किस वफ़ा की तलाश में सिर खपाते हो वफ़ा की बातें डायनासोर की बातें हो गई है […]

गर समझ न सके मेरे मौन को शब्दों को क्या समझ पाओगे पास आकर भी तुम मन के हाशिये से दूर ही रह जाओगे सब जायज है जुबान से निकले हुए तल्ख़ चिंगारी वास्ते तेरे […]

तुम कहाँ रहते हो? मैं अपनी आत्मा की परछाई में रहता हूँ तुम क्या करतेहो ? मैं चुपचाप सब कुछ सहता हूँ तुम क्या देखते हो ? हर तरफ आंसूं जो आँखों से बहते रहता […]

कभी तो मेरे माजी का क़त्ल कर दिया जाएँ जख्म जैसा भी हो कुछ पल भर दिया जाएँ माना की शब की जीस्त दुआओं से है भरी हो असर ऐसा ख़्वाबों को सहर कर दिया […]

कोई आहट नहीं कोई आवाज़ नहीं टूटा पत्ता हूँ कोई शाख नहीं अपने हाथों से किया क़ैद खुद को पंख तो हूँ मगर परवाज़ नहीं कैसे खुद को बना दिया क़ाफ़िर ज़िंदगी तुझसे मगर नाराज़ […]

एक जरूरी दस्तावेज ही तो है जीवन न कागज़ अपना न स्याही अपनी फिर भी भ्रम अपना कहने का अपनी सासें अपनी धड़कन से विवाद करती कभी तालमेल नहीं मन से मन का फिर भी […]

ज़िंदगी क्या है एक अदाकारी है न तुम्हारी है न हमारी है ख्वाब आये भी तो रात के पिछले पहर क्या कहे कैसे बाकी रात गुजारी है मुझसे मत पूछ वफ़ा क्या होती है ये […]

हाथ की रेखाएं न बदनाम कर डालो कुछ नज़र अपने करम पर भी डालो तेरा वज़ूद खड़ा एक गुनहगार सा क्या हर्ज़ खुद को कातिल समझ डालो तीर तरकश से निकल कब लौटे है अब […]

हर सांस है मुजरिम न जाने किस गुनाह में हर ख्वाईश है क़ैद न जाने किस गुनाह में न कुछ बस में तेरे न कोई डोर हाथ में जाएँ तो ज़िंदगी किन क़दमों की पनाह […]

हर चेहरे अपने पर कोई आश्ना न मिला गिला खुद से मगर कोई आईना न मिला अपनी तक़दीर-बुलंदी का क्या कहना बर्क़ को जब कोई आशियाँ न मिला फ़िज़ां मिली तो मगर खुशगवार न थी […]

कहाँ से फिर निकला आरजुओं का सैलाब चंद कागज़ लपेट ,जिंदगी बन गई है किताब / कभी लगता पहन ल़ू ,लगता कभी ओढ़े बैठा हूँ नज़र क्यों आती है ,हर चेहरे पे नकाब/ तेरे सवालों […]

बेज़ुबान दर्द सो गया ,करवट न ले सकी नींद हमारी लम्हे रुके रुके से रहे , थक के सो गयी किस्मत हमारी क्या रखा था सिरहाने मेरे अपने कापते हाथों से कमबख्त हरसूँ छोड़ गयी […]

एक आहट सी सुनी है तेरे जाने के बाद कोई समझाए क्या बारहा समझाने के बाद डूबा बैठा हूँ न जाने किस सोच के समुन्दर में हर लहर लौट आ जाती एक लहर जाने के […]

सिर्फ एहसास है वफ़ा फिर छूने को जी करता है यह कौन देता है सदा सुनने को जी करता है हर शख्स का वज़ूद जुदा फितरत भी जुदा फिर भी उम्मीद वो खुद के वज़ूद […]

कतरा कतरा लहूँ का जिस्म में सहम गया चलो इसी बहाने रगों में बहने का वहम गया वो कोई हिस्सा था मेरे ही जिस्म का जुदा हुआ वो तोड़ कोई कसम गया मेरे मिटने की […]

आंधियो मेहमां बन जब जी चाहे तुम आया करो अर्ज़ बस इतनी तुम दरख्तो को न गिराया करो तूफा तो हर तरफ हर जगह आते रहते है अर्ज़ बस इतनी तुम कश्तियों को न डुबाया […]

आंसुओं का क्या है निकलते है फिर कुछ बह जाते ,कुछ सूख जाते है लफ्जों के जहर ही तकलीफ दे जाते है लहूँ में घुल नसों में मुझसे तेज दौड़ जाते है काश लम्हों की […]