लिख कवि लिख कवि लिख भावनाओं में बहकर लिख खुशीयों में फूदक कर लिख दर्द आह महसूस कर लिख तन्हाई को साथी बनाकर लिख लिख कवि लिख अफसर का रौब लिख नेता की बेईमानी लिख […]

महंगाई का दास्तान लिहली थैला पांच सौवा नोट खरीदे निकली सब्जि और तेल सब्जि में हि खत्म भईल पांच सौवा बड़का नोट कक्का के सुरती रही ग बुढवा बाबू के तम्बाकू टहल टहल बजारे हम […]

वफादारी देश हित में कुछ काम करो भारत मां को जंजालों से आजाद करो अपने विचारों से योगदान करो करके श्रम देश में सहयोग करो जाति धर्म को भूलकर इंसान बनो अपने देश के लिए […]

संस्कार बदलते दौर के साथ बदल गया संस्कार पैसे की होड़ में बिक कर रह गया संस्कार पैर छूने की परम्परा है विलुप्त के कगार हाथ जोड़ अभिवादन का चला है संस्कार मां बाप के […]

बड़े बड़े भामाशाह और उद्योगपति का संस्कार को मार दिया कोरोना ने मति सोनू सूद नमन है आपके प्रेरणा को मजदूर के हातालो को बखूबी समझा महेश गुप्ता जौनपुरी

आरक्षण वाली चाय की दुकान मैंने मन ही मन एक प्लान बनाया आरक्षण वाला चाय का दुकान खुलवाया दुकान के अंदर तीन सिट बनवाया अलग अलग कैटगरी को अलग बैठवाया जनरल ओबीसी एससी एसटी का […]

वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ आंदोलन को चलाना‌ है, वृक्षारोपण से धरा को हरा भरा बनाना है । मिलकर आओ सभी धरा के प्रकृति प्रेमियों, वृक्ष कटने से हम सभी प्रहरी को बचाना है।। महेश गुप्ता […]

वियोग स्वीकार करके हार ना मानो, प्यार में अपने आप को मार ना डालो। हे प्रियतमा मेरे बातों को तुम समझो, खुद को तड़पा कर अब जान ना लो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मोह माया के चक्कर में पड़कर, ना करो ज्ञान की धारा को चौपट । सिखों और सिखाओ समाज को, ना करो अपने ज्ञान से तुम कपट।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

अकेले रहकर पशु पंक्षी बनकर नहीं जीना, इंसान बनकर इंसानियत से है राह दिखाना। मान गये तो गले लगाकर समाज का करेंगे उध्दार, नहीं तो मुंह तोड ज़बाब देकर है सबक सिखाना।। महेश गुप्ता जौनपुरी

इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा, बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा। जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे, करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।। […]

इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा, बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा। जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे, करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।। […]

नर नारी के वेष में आया कोई छलिया, तन मन को करके वश में ठगा मुझे ठगिया। अन्तर्मन के लिलाओ से बनाया भेष अद्भुत, मग्न होकर अपने अधर्म के बल से नाचे भेड़िया।। 🙏महेश गुप्ता […]

आंखों के सामने घुम रहे हैं भेड़िया, सोच समझ के परख लो ऐंसे छलिया। बकरें के संग बकरा बनकर कब तक खेलोगे खेल, उठा कर डण्डा पीटकर छुड़ा दो अपना गलियां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

आस्तीन के फन को रौद कर रख दो, गुलाब के पंखुड़ियों को मसल कर रख दो। हर नकाब को अब तुम बेनकाब कर दो, कातिल को सरेआम बीच बाजार में निलाम कर दो।। ✍महेश गुप्ता […]

ख्वाहिशों को थोडा सा हवा दो, जिंदगी को लाड प्यार दुलार दो। कुर्सियों के चक्कर में ना पड़ो, सत्ता को हथिया थोड़ा सा हवा दो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कपटी छलिया को बेनकाब करने आया हूं, आशा का एक नया दीप जलाने आया हूं। तीर और फरसा को म्यान में ही रखकर, बातों बातों से दुश्मन को अपना बनाने आया हूं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कलयुगी संसार में फकिर बना लुटेरा, ज्ञान की बातें करके झोले को अपने संभाला। धन दौलत की चाह में दोस्त के गले को काटा, बनाकर कर सतरंगी चेहरा खेल रचा है सारा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

ख्वाहिशों में ना जाने कितने मर गये, ज़मीर को अपने बेंच नरक चले गये। सत्ता को हथियाकर भी बेचैन रहें, खुशीयों को पाने के लिए अपने आपको खो गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

छल कपट को मिटाना सबके बस की बात नहीं, स्नेह का ज्योति जलाना सबके बस की बात नहीं। नर नारी के शब्दों का राह भाव से मिट नहीं सकता, गुनहगार के धब्बे को मिटाना सबके […]

अंधेरे से डरकर ना भागो, उठो मोह को त्याग कर जागो। धरा को रोशन करके प्यारे, कटुता के झोंके से राह ना त्यागो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

दिल की बात कागज पर ना लिख सकें, दिल और मन की बात करत मोहे लागे लाज। अपनी वेवसी किसको सुनाएं बता दो मेरे नाथ, दिल मन की बात दबी रह गयी हुई बावरी आज।। […]

नैन हमारे व्याकुल है देखन खातिर सखी, ना तुम मिली ना नयन को सुख मिले। मन बाबरा होकर ढुंढ रहा तुमको सखी, आस हमारे टूट रहें आंखों के बनकर आंसू सखी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कृष्ण कन्हैया छलिया तेरे, कितने हैं अद्भूत रुप। किया बांवरा नर नारी को, बता दो कितने हैं स्वरुप।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मेरे मोहन प्यारे नंदकिशोर की छवि निराली, मेरे तन मन में बसती नंदकिशोर की प्रतिबिंब। चित चोर मुरली धारी करें मेरे दिल पर सवारी, अद्भुत सुरत श्याम सलोने गाथा गाते हम सब।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मेरे गिरधर गोपाल मेरे हैं भगवान, दुजा कोई नहीं है मेरा अभिमान । मेरे नंन्दकिशोर के माथे सोहे मोर मुकुट, यशोदा दुलारे कृष्ण कन्हैया हैं मेरे शान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

गीत बनकर तुम्हारी जिंदगी में आई थी एक रोज …….. गजल बनकर तुम्हारी ज़िंदगी बन गई। और रुबाई बनकर आंखें भिगोई तुम्हारी… एक दिन ख्वाब बनकर तुम्हारे सपनों के खटखटाने लगी दरवाजे और जगाने लगी […]

कभी कभी हम किसी को कुछ ऐसा कह देते हैं कि कहने के बाद पछताना पड़ता है बड़ी तकलीफ होती है ऐसे शब्द मुंह से निकालने के बाद बड़ा अफसोस होता है अपनी गलती पर।