आस्तीन के फन को रौद कर रख दो, गुलाब के पंखुड़ियों को मसल कर रख दो। हर नकाब को अब तुम बेनकाब कर दो, कातिल को सरेआम बीच बाजार में निलाम कर दो।। ✍महेश गुप्ता […]

ख्वाहिशों को थोडा सा हवा दो, जिंदगी को लाड प्यार दुलार दो। कुर्सियों के चक्कर में ना पड़ो, सत्ता को हथिया थोड़ा सा हवा दो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कपटी छलिया को बेनकाब करने आया हूं, आशा का एक नया दीप जलाने आया हूं। तीर और फरसा को म्यान में ही रखकर, बातों बातों से दुश्मन को अपना बनाने आया हूं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कलयुगी संसार में फकिर बना लुटेरा, ज्ञान की बातें करके झोले को अपने संभाला। धन दौलत की चाह में दोस्त के गले को काटा, बनाकर कर सतरंगी चेहरा खेल रचा है सारा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

ख्वाहिशों में ना जाने कितने मर गये, ज़मीर को अपने बेंच नरक चले गये। सत्ता को हथियाकर भी बेचैन रहें, खुशीयों को पाने के लिए अपने आपको खो गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

छल कपट को मिटाना सबके बस की बात नहीं, स्नेह का ज्योति जलाना सबके बस की बात नहीं। नर नारी के शब्दों का राह भाव से मिट नहीं सकता, गुनहगार के धब्बे को मिटाना सबके […]

अंधेरे से डरकर ना भागो, उठो मोह को त्याग कर जागो। धरा को रोशन करके प्यारे, कटुता के झोंके से राह ना त्यागो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

दिल की बात कागज पर ना लिख सकें, दिल और मन की बात करत मोहे लागे लाज। अपनी वेवसी किसको सुनाएं बता दो मेरे नाथ, दिल मन की बात दबी रह गयी हुई बावरी आज।। […]

नैन हमारे व्याकुल है देखन खातिर सखी, ना तुम मिली ना नयन को सुख मिले। मन बाबरा होकर ढुंढ रहा तुमको सखी, आस हमारे टूट रहें आंखों के बनकर आंसू सखी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कृष्ण कन्हैया छलिया तेरे, कितने हैं अद्भूत रुप। किया बांवरा नर नारी को, बता दो कितने हैं स्वरुप।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मेरे मोहन प्यारे नंदकिशोर की छवि निराली, मेरे तन मन में बसती नंदकिशोर की प्रतिबिंब। चित चोर मुरली धारी करें मेरे दिल पर सवारी, अद्भुत सुरत श्याम सलोने गाथा गाते हम सब।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मेरे गिरधर गोपाल मेरे हैं भगवान, दुजा कोई नहीं है मेरा अभिमान । मेरे नंन्दकिशोर के माथे सोहे मोर मुकुट, यशोदा दुलारे कृष्ण कन्हैया हैं मेरे शान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

गीत बनकर तुम्हारी जिंदगी में आई थी एक रोज …….. गजल बनकर तुम्हारी ज़िंदगी बन गई। और रुबाई बनकर आंखें भिगोई तुम्हारी… एक दिन ख्वाब बनकर तुम्हारे सपनों के खटखटाने लगी दरवाजे और जगाने लगी […]

कभी कभी हम किसी को कुछ ऐसा कह देते हैं कि कहने के बाद पछताना पड़ता है बड़ी तकलीफ होती है ऐसे शब्द मुंह से निकालने के बाद बड़ा अफसोस होता है अपनी गलती पर।

तलाशी जिस्म की खुलेआम दे दी। सब दिखाया पर दिल दिखाया नहीं। ढूढ़ते रहे हार के लौटना पड़ा सबको, जब हाथ लगाया दिल धड़काया नहीं। ढूंढते ढूंढते रात दिन हाथ से निकले, रूह में रहे […]

लाॅकडाउन में लाॅकजीवन ,आखिर कब तक चले। कोरोना का असर सब पे भारी, हम तुम हाथ मले ।। सब कुछ चाह कर भी ए दोस्त, कहाँ कुछ कर पाए। जो भी कुछ था हमारे पास […]

इंसा के भावनाओं में तर्क बहुत है, प्रेम और बैर में फ़र्क बहुत है, सेवा धर्म प्यार से उपजे प्रेम का संगीत, कांटे चाटे स्वान से उपजता ईष्र्या में प्रेम है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

खाने पीने ऐंसो आराम को समझे सभी सुखी संसार, गहरी निद्रा मोह माया को समझे है उपहार। दुःख की गठरी बांध कबीरा चिंतन करके सोवे, झूठे विचार को सच्चा समझे प्रभु भक्ति खोवे।। ✍महेश गुप्ता […]

सदैव बचकर रहना दो विचारों वाले प्राणी से, मोह माया के संसार में छल ही जाते हैं ये। अपने झूठे वादों में सबको रखना चाहते, खुद के घिनौने इरादों से राज करना चाहें ये।। ✍महेश […]

स्वार्थ के चक्कर में पड़कर, बल बुद्धि विद्या खो देता इंसान। अपने द्धारा बनाये कटिलें जाल में फंसकर कैद हो जाता इंसान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी