मेहनत करते जाओ परिणाम अपने आप ही मिल जाएगा जो बोया है वही तो मिलेगा बिन मेहनत कोई क्या पायेगा?
मेहनत करते जाओ परिणाम अपने आप ही मिल जाएगा जो बोया है वही तो मिलेगा बिन मेहनत कोई क्या पायेगा?
बहरूपियों से क्या डरना जब सर पर हाथ है मां का उसके पैरों तले है आसमां जिसके सिर पर हाथ है मां का
गिरगिट के रंग को समझ, अपने आप को अलग रखना। संसार के चतुर प्राणी का, याद रखो साथ बहुत है खलता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बहरूपियों को पहचानने की आदत डालो, अपने आप पास के शोहदों को कम मत आंकिए। चेहरे से दिखते मियां मिट्ठू मन के काले रहते, समय के बदलते चक्र में याद इतना रखिए।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मैं हर बात समझती हूं दिमाग की थोड़ी कच्ची हूं नादानियां कूट-कूट कर भरी है मुझमें फिर भी दिल की अच्छी हूँ मैं हर बात समझती हूं कल्पनाओं में विचरण करती हूं खट्टे मीठे सपनों […]
घात लगाये बैठे हैं स्वार्थ के सारे पुजारी, बचकर रहना मेरे अनमोल मित्र तुम। ये दुनिया में बहरूपिए के शक्ल में बहुत है, जालसाज कुत्ते भेड़िए से बचकर रहना तुम।। महेश गुप्ता जौनपुरी
लोभ मोह माया में खोता है इंसान, मदिरा के लत में जलाता है इंसान। खुद के महानता में अंधा होता है इंसान, संसार के कलह से मर जाता है इंसान।। महेश गुप्ता जौनपुरी
साथ निभाने वाले सच्चें दोस्त को परखों, ज्वहरी की तरह सोने की शुद्धता समझो। मन के काले जो रहते चोर की तरह छिपते, उनके खूबी बखुबी और अच्छाईयों को समझो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
श्वान हमारे आस पास के ही, लगाकर बैठते घात यहां। मौका पाते काम कर जाते, समझते नहीं दुःख दर्द यहां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
इश्क के दो पन्ने मैं भी लिखूंगी तुम्हारी याद में रात भर मैं भी जागूंगी। —————————— प्रीत की चादर ओढ़ कर अंबर के तले, तेरे सपने मैं भी बुनूँगी इश्क के दो पन्ने मैं भी […]
ये तो महानता है आपका, जो खुद के अवगुणों को पा रहें। यहां लोग बैठे हैं घात लगाये, एक दुसरे की गलती गिना रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बातों में अमृत का रसपान, घात लगाये देखो बैठे यहां। मनुज है बढ़कर एक से एक, मन को रखते कुलक्षित यहां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वृक्ष लगाकर खुशीयां बांटो धरा को हरा भरा करो, भूमण्डल को स्वच्छ बनाकर धरा के सारे पाप हरो। एक एक कदम बढ़ाकर हाथों हाथ वृक्ष लगाओ, नन्हें अंकुरित को सहरा देकर धरा को सिंचित करो।।
जब मैं उदास होता हूँ तेरे कितने पास होता हूँ रात भर रोती हैं आंखें इश्क में आदमी तब खास होता हूँ ।
जब हमें तुम याद आये रात भर आंसुओं ने ग़म बहाये रात भर। ख़्वाब कितने ही सजाये रात भर जिनको चाहा वो न आये रात भर। एक सूरज ढल गया जब शाम को चांद तारे […]
रोते हो अब काश। पकड पाते जाता समय। अँधेरा हुआ ढल गई है शाम यौवन की। रात मिलेगा प्रियतम मुझको चांद जलेगा। आ जाओ तुम एक दूजे मैं मिल हो जाएं ग़ुम। पहाड़ी बस्ती अंधेरे […]
बेपरवाह है फिरता दर दर रमता जोगी। चलते जाओ यही तो है जीवन नदिया बोली जनता से ही करता है सिस्टम आंखमिचोली। घूमो जाकर किसी ठेठ गांव में भारत ढूँढ़ो। लक्ष्य है पाना तुम एक […]
कितनी ही मेहनत करके दो जून रोटियां पाते हैं भाग्य विधाता लोकतंत्र के सड़कों पर रात बिताते हैं। अफ़सोस नहीं हो रहा उन्हें जो कद्दावर बन बैठे इन्हीं के पोषित देश भूमि के जो सत्ताधर […]
सुनो संगी चमन वीरों तुम्हारा सत्य हो सपना हौसला दिल में उम्मीदें निगाहें लक्ष्य पर रखना। जो है संकल्प करता तू अटल स्वलक्ष्य पाने को रगो में जोश इतना भर हो सक्षम नभ झुकने को […]
अब मैसेज से ही काम चलाना। यही कहे आज कोरोना जमाना।।
संभल संभल दिल ए नादान। यहाँ कोई नहीं इश्क़ ए क़द्रदान।।
क्या कहूँ!! दिल में कितनी उदासी छाई है, तेरी बेरुखी मेरी जान पर बन आयी है। ———————————— मैं एक गुमशुदा सी शाम हूँ और, तू मेरी रुसवाई है। ——-‐———–‐—————- इन तूफानों के आगे, दिल में […]
पागल, आवारा, लोफर, दीवानापन, यही इनाम मिला है मुझे। कागज की किश्ती दरिया में नहीं चलती, यही कहते हैं वो मुझे।।
यूँ ना बुलाओ करके नजर के इशारे इस दिल पे तो डाका पर जाएगा। भला तुम्हारा क्या बिगड़ेगा मेरा सब कुछ लुट जाएगा।।
ज़िन्दगी में गर किसी को, कोई खाश नहीं रहता। किसी को आज किसी का, इंतजार ही क्यों रहता।।
वृक्ष लगाकर खुशीयां बांटो धरा को हरा भरा करो, भूमण्डल को स्वच्छ बनाकर धरा के सारे पाप हरो। एक एक कदम बढ़ाकर हाथों हाथ वृक्ष लगाओ, नन्हें अंकुरित को सहरा देकर धरा को सिंचित करो।।
तुम्हारे भोलेपन से हीं मुझको बहुत प्यार है। वरना इस दुनिया में दिल लगाने को बथेरे यार हैं।
”मेरा भोला प्रियतम” जिनकी नज़रों से ललित कलाएं निकलती हैं, अधरों पर राग अंगड़ाइयां लेते हैं। केशों से बसंत दुग्ध पान करती है, और रात अठखेलियां करती है जिनसे। जिनकी एक चितवन मात्र से, बिजलियां […]
आज दादी की बहुत याद आई! वो बेचैन आत्मा ना जाने कहाँ घूमती होगी…. ब्रह्मांड के किन कोनों से गुजरती होगी… कोई नहीं जानता… जब मैं भूखी होती थी तो दादी मां अपने हाथों से […]
Jindagi ki raho me kahi to daga kha gaye ham , jaha se chale the fir wahi aa gaye ham.🤔
पर्वत से निकली खिल-खिल गंगा सागर में जाकर शांत हो गई। जान गई जंजाल में तो उड़ती चिड़ियाँ भी शांत हो गई।।
ना छेड़ कुदरत को कुदरत परेशान हो जाएगी। इसकी परेशानी के संग संग तेरी जान जाएगी।।
कुदरत के संग बदफेली के खुद हीं हम शिकार हो गए। आबोहवा संग धरती भी तो दूषित हो गई और हम बीमार हो गए।
सीडियाँ अनगिनत चढ़नी पड़तीं हैं, जब पानी होती है इश्क की मंज़िल ।
किस ओर गया मेरा सुकून फकत इतना-सा बता दे कोई, दिन-रात आगोश में रहता हूँ बेचैनी के ।
ले गया दिल ए नशाद! मुझे जाने कहाँ , जब एक निगाह उसने कर दी मेरी तरफ।
ली गया दिल ए नशाद! मुझे जाने कहाँ जब एक निगाह उसने कर दी मेरी तरफ
रहने देंगे हम तुम्हें लोगों के करीब तुम खुमार में रह लो थोड़ा शरीक
जैसा कहिये वैसा करिये ऐसे लोग जहां में कम ही होते हैं अपनी कथनी और करनी में जो कोई फर्क न करे ऐसे लोग बड़ी मुश्किल से मिलते हैं
मिठे बचन सदैव बोलिए, सुख की उत्पत्ति होय । बसीकरन मंत्र जाप करें, जग का सदा हित होय ।। महेश गुप्ता जौनपुरी
रमता साधु का जात ना पुछो, पुछ लो ज्ञान की बात । तलवार के वजन को ना आंकिए, जोरदार घाव से करें बात ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जमाने का हित हम करते रहें, लोग हमें गुनहगार समझते रहें। मिठी बाणी बोलकर मुझसे, पीठ पीछे मुझे ही ठगते रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कटु वचन को तांक में रखकर, करता मैं दिन का शुरुआत । हृदय को अपने स्वच्छ रखकर, कुरितियों को देता मैं मात ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अपराध को सहना पाप है, जुल्म को सहना महापाप। सच्चाई का दामन पकड़ कर, करो नारायण का जाप ।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
संयम वाणी है साधु का पहचान, गलत कार्य में बांधा डाल देते ज्ञान। साधु संगत जीवन में रस को घोले, वाणी के विष का कर ना सकत विज्ञान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मिठे बचन सदैव बोलिए, कटु वचन का करें त्याग। आत्मा के मिठे विचार से, मन के बुझाये जलते आग।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
धर्म अध्यात्म का साथ देकर, करें अपने संस्कृति का सम्मान। विज्ञान के अनुठे खोज पर, करें सदैव वैज्ञानिक पर अभिमान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गोविन्द गोपाल चरावत गैया, बंसी के धुन से समझावत मैया। वृंदावन के गलीयन में मुरारी, लागत नटखट नंद दुलारे कन्हैया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
तन मन की मोह माया विष के है सामान, गुरु के कटू बात लागे है अमृत समान। गुरु सदैव है वन्दनीय यही मिला है ज्ञान, गुरु के लिए न्योछावर है यह मेरा जान।। ✍महेश गुप्ता […]
गुरु गुणों के खान हैं, इस तन में ज्ञान से ही जान है। खाली गागर चटक है जाता, ज्ञान से ही मानव का पहचान है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
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