लाखो दर्द सहकर भी रहते हैं खामोश जिंदगी बिता दी तुम्हारी तकदीर बनाने में जिनकी एक हंसी देखने को तरसती है मेरी निगाहें तुम 1 मिनट लगाती हो उनको रुलाने में
लाखो दर्द सहकर भी रहते हैं खामोश जिंदगी बिता दी तुम्हारी तकदीर बनाने में जिनकी एक हंसी देखने को तरसती है मेरी निगाहें तुम 1 मिनट लगाती हो उनको रुलाने में
मैं कहती हूं बिल्कुल गरीब है तू यह जानकर कि तुझ पर संपत्ति विराट है दौलत से नहीं जो दिलों से राज करें वही तो असल में होता सम्राट है
आब ए चश्म की नुमाइश ना आंखें करें मेरी एहतियात से दूर करें अख्ज की भीड़ को आफताब की किरण भी ना छू सके मुझे अकिबत की फिक्र है दिल अजीज को
ना जाने क्यों लड़ते रहते हैं लोग जिंदगी बिताते हैं एक दूसरे पर रोष में ना जाने क्यों सभी भूल जाते हैं एक दिन सोना होगा मौत के आगोश में
आकाश से पाताल की होगी बातें पर बातों का कोई भी तर्क ना होगा जो शब्दों के सागर से ढूंढे ना मोती तो मुझ में और मुझमे फर्क क्या होगा
गजब एहसास है तुम्हारे पास होने का दूर जाने का गम भी कम नहीं तुम्हारी महक आज भी महसूस होती है जैसे सूखे फूलों में बास आती है
सिलसिला यूँ ही चलता रहे मुलाकातों का बीते ना पल यूं ही चलता रहे तेरा मेरा मिलना बिछड़ना फिर मिलना और हमेशा के लिए बिछड़ जाना
रूहानियत नहीं रही अब तेरे अल्फाजों में क्या करें मौत तगाजए ने तुझे रह ही बना दिया
तुम्हारे पास दास्तां सुनने को वक्त नहीं…. तो हमारे पास भी कहने को कोई लफ्ज़ नहीं…. अगर बसा लिया है तूने गैरों को घर में तो मेरे दिल में भी तू कमबख्त नहीं …. वो […]
फूलों में महक है कागज़ में अल्फ़ाज़ आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं दिल में उतर आया है चांद। और बरस रहा है सावन कितनी ही यादें ताज़ा हो गई हैं
लफ्जों को कविता में पिरोते जा रहे हैं जज्बातों को सहेज कर रखते जा रहे हैं । बहुत हो गया अब मरने का सामान चलो छोड़ दिया तुम्हें अब जीने जा रहे हैं
तू ही तो था वो कन्धा जिस पर सिर रख रो लेती थी। तू ही तो था यार मेरा जिसको कान्हा मैं कहती थी
उसका चेहरा ही नज़र आता है देखूँ मैं जिधर वो रूबरू आता है मुझे अक्सर नज़र
मेरी बदकिस्मती थी जो तुम ना मिले मैंने तुम्हें ढूंढा है मूंगफली के दाने की तरह।
है कितनी ताकत तुझमें मुझे तोड़ने की बता तू मुझे मै हद देखना चाह्ती हूँ तेरे गिरने की।
उनसे बिछड़ कर हम रोए हैं देखना चाहिए क्या वह भी रोए
दिल की अठखेलियां और अंगड़ाइयाँ धीमे-धीमे बढ़ती जा रही हैं उम्र चांदनी की तरह घटती जा रही है तुम्हें होश है कि नहीं अब सितम करना बंद कर बेखयाली में भी खयाल आता है तेरा […]
आँखों के सामने बैठे हुए हैं सिर झुकाए हुए शायद उन्हें एहसास है मेरे साथ किये जुल्म सितम का।
मोहलत की जरुरत थी थोड़ा सा इंतजार कर लेते बहुत कुछ सोंचा था तुम्हारे लिये हमनें।
दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए वो फिर किसी के दिल को, शीशे सा तोड़ेंगे उस बदनसीब का अभी से गम मनाइए
दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए वो फिर किसी के दिल को, शीशे सा तोड़ेंगे उस बदनसीब का अभी से गम मनाइए
जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसमें पत्थर हैं या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]
जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसने पत्थर है या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]
नीली छतरी कुर्ता ढीला ढीला पहनकर पजामा निकला वह छैल छबीला…… हाथ में गुब्बारे और बच्चे प्यारे-प्यारे पीछे पीछे उसके दौड़े जा रहे थे…… थोड़ा सा बूढ़ा पर होठों पर मुस्कान हाथों में खिलौने और […]
गुलाबी आसमान ख़्वाब धुंधले से धुआं धुआं है चारों तरफ कोई उम्मीद भी दिखाई नहीं देती तुझे सुधारने की हर कोशिश नाकाम ही रही तूने कभी भी कोशिश ही नहीं की मुझे समझने की या […]
आंसुओं से नहा कर धूप का चंदन घिस कर तेरे प्रेम का उबटन लगाकर उजली तो थी ही और निखर भी गई
कयामत से पहले तेरा चांद देखना चाहते हैं सितारों के जुगनू खुद में समेटना चाहते हैं आसमान जैसा मेरा दिल ज़मी है तू मेरी हम तुझमें उतरना चाहते हैं।
छुप कर आंसू बहाते हैं रो-रोकर जातेहैं सपने मेरे तड़पकर टूटते जा रहे हैं या खुदा हम तेरे पास आ रहे हैं
सफ़र की शाम हो गई ज़िन्दगी की आरज़ू में मौत बदनाम हो गई ।
जुस्तजू की और खो बैठे चैन और करार आते हैं सपनें उसके बार-बार
करी थी आरजू एक जो पूरी ना हुई पर एक सबक दे गई किसी को इतना नजदीक मत लाओ कि वह आपकी शुभ -ओ-शाम जाए
क्या हुआ अगर आप हमसे खफ़ा हो गये । सांसे थम गई सपनें जुदा हो गए
तुम्हें क्या पता के हमें छोड़ कर तुमने क्या खोया है कोहिनूर को शीशा समझ कर तुमने हीरा खोया है। सिर्फ़ उसे पाने की खातिर जो चन्द दिनों के लिए तेरा है।
तुम्हें क्या पता के हमें छोड़ कर तुमने क्या खोया है कोहिनूर को पीतल समझ कर तुमने हीरा खोया है। सिर्फ़ उसे पाने की खातिर जो चन्द दिनों के लिए तेरा है।
मात खा गए हम आज ज़िन्दगी की आरज़ू में । मौत भी ना नसीब हुई इश्क की आरज़ू में । समझते थे प्यार को खूबसूरत ग़ज़ल हम दर्द ही पाये हर कदम पर जीते थे […]
कभी सोचा ना हो वह काम हो जाता है, जो करीब है वह दूर चला जाता है। मासूम सा चेहरा इन नाज़ुक-ए- हथेलियों से, हिना का रंग-चंद अश्कों से उतर जाता है। फरेब करने वाले […]
जिसे अपना समझकर चाहतें रहे एक उम्र भर जिसे अपना कहकर इतराते रहे एक उम्र भर जिससे आईने में देखकर शर्माते रहे एक उम्र भर जिसे अपनी हर दुआ में खुदा से मांगते रहे उम्र […]
रूठ जाना भी भला है तुम्हारा मुझे मनाने का मौका तो मिलता है कर देते हो नज़रंदाज़ मुझे सताने का मौका तो मिलता है…. कर जाते हो जो बेवफाई की बातें उन्हें पहचानने का मौका […]
आलोक हो महाकाल तुम मेरे जीवन का आधार तुम कल्पना की दहलीज़ पर आये हो बन मेहमान तुम….. मीत हो तुम प्यार का संगीत हो और धीरज का दमकता गीत हो रूबरू होने का मौका […]
जान लेते अगर मनाने का सलीका तुम तो चंद दिन ज़िन्दगी के तेरी चाहत में और कुर्बान कर देते और रो लेते कुछ रातें तुम्हारी यादों में तड़पकर कुछ और तुम्हें जान लेते और बदनाम […]
है गुजारिश इतनी ही के अब और ना रुलाओ तुम किये जिन्दगी भर सितम अब और ना सताओ तुम नहीं हूँ पत्थर मैं इन्सान की ही मूरत हूँ जान कर बेजान अब और ना ज़ुल्म […]
अच्छा हुआ जो तुमसे मुलाकात नहीं हुई मुझे कितनी शिकायतें हैं तुम मेरी आँखों में पढ़ लेते।
सावन के पावन कवियों और शाइरों के बीच मेरी कही गई गज़ल प्र्स्तुत की जाती है. 1-फिर हयात पाएगा मौत पाके आदमी. रुक ना पायेगा कभी सिलसिला हयात का. 2-तू जहान मै ना चल ख़ुदस […]
सब को बाट रहा है खुशियां खुदा एक मेरा ही घर सुना रह गया ऐसी बेरुखी क्यों जवाब सबको नहीं मिलता इस लिए तोह सिर्फ़ फरियाद का दामन छोड़ तोह नहीं सकते
तीय विलापम में शुद्ध अपनी विषारी शक्तिहीन हुए शक्तिशाली विलाप में भयानक रूप धरा था शांत करें ब्रम्हा और त्रिपुरारी त्राहि-त्राहि हो सर्वत्र नटराजन बदले नक्षत्र बलशाली भी भय से कँपे शिव के सामने उठे […]
दर्द की आह में तड़पते हैं तुमसे मिलने को तरसते हैं है इतनी गमगीन ज़िन्दगी फिर भी तुम हाल पूछते हो तो कह देते हैं के अच्छे हैं ।
जब बात नहीं होती तुमसे शब्द मेरे खो जाते हैं कलम की कूँची टूट जाती कागज उड़ उड़ जाते हैं जो तुम संग लाई थी अपने खुशियां वह खो जाती हैं बिन तेरे भाव मेरे […]
एक दिन धरा की गोद में डाला मैंने अंकुरित बीज जैसे ईश्वर बांधे खग को मातृत्व ताबीज उस बीज को जल दे देती हो जान कभी अनजान फिर उस नन्हे शिशु में देखो दो दिन […]
मुझे कैद गुलामी पसंद नहीं मुझे उड़ने दो मुझे उड़ना है इस अंबर की रणभूमि में मुझे खोल के पंख उतरना है मेरा जीता जीवन मृत् हो गया घर की चार लकीरों में मैं उड़ […]
मुझे कैद गुलामी पसंद नहीं मुझे उड़ने दो मुझे उड़ना है इस अंबर की रणभूमि में मुझे खोल के पंख उतरना है मेरा जीता जीवन मृत् हो गया घर की चार लकीरों में मैं उड़ […]
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