हे शिव! स्त्रियों की मन स्थिति जानने को पार्वती संग. … अर्धनारीश्वर रूप रखा होगा। इस रूप में आने के बाद आपने खुद ही एहसास किया होगा। जीवन गाड़ी के दो पहियों के समान है, […]
हे शिव! स्त्रियों की मन स्थिति जानने को पार्वती संग. … अर्धनारीश्वर रूप रखा होगा। इस रूप में आने के बाद आपने खुद ही एहसास किया होगा। जीवन गाड़ी के दो पहियों के समान है, […]
जय शिव शंभू कृपा करो, गलतियां सभी की क्षमा करो। भोलेनाथ तुम कृपासिंधु हो, दया के सागर कृपा करो। ध्यान मग्न तुम हरदम रहते, भक्त हमेशा रहते घेरे। ध्यान में रहकर ध्यान हो रखते हैं, […]
युग बीता बातें याद बन गई, लिखते – लिखते ….. तुम एक किताब बन गई। रचनाओं में रोने की हंसने की गढ़ावत है तुम्हारे साथ हर पल दुबारा जीने की लिखावट है। किताब के बहाने […]
होली —— रंग भरे ख्वाब से, हाथ में गुलाल है। श्याम रंग में भीगने को राधा बेकरार है। नटखट कान्हा तेरी बांसुरी से प्यार है। बांसुरी के स्वरों में प्रेम का मनुहार है। फूलों की […]
आज भी शाम है हाथ में जाम है दिन बदलने का आज भी तुझ पर एतराम है
जमाने की बाते क्या करुँ सब अपने मे व्यस्त रहते है। सपनो को पूरा करने को हर पल जगते रहते है।।
सुबह सवेरे अब तो कोलाहल होता है। आधुनिकता मे शान्ति कहा मिलती है।
हर किसी से मोहब्बत की यू ही हांमियां भरना ठीक नहीं दिल लगाकर दिल तोड़ने की गुस्ताखियां करना ठीक नहीं मेरी मोहब्बत का तो खुद हाफिज गवाह है मेरी पाक मोहब्बत की यू बदनामियां करना […]
मुस्कुराहटें बेहद कीमती हैं, रोके ना गवाओं यूं ही। आंसुओं को छोड़ो.. रोते-रोते भी हंस जाओ कभी। जिंदगी दुखों का सागर है, सागर से प्रेम और हंसी के मोती भी ढूंढ लाओ कभी। अकेले-अकेले ना […]
मैं कैसे मोहब्बत को दूं झुकने जब मेरा मेहरम मुझ में मैं उसमें
कल्पना का कला की छाया नहीं थी सत्य पांव पसार रहा था रण भूमि की दहलीज पर जाकर दुश्मन को ललकार रहा था दुश्मन की आंखों में देखें कितनी होशियारी है पीठ पर बिस्तर बांध […]
नगर कुमारी देख कर बोली करूप है कोयल काली मेरे उपवन आकर लजाए बैठी कदंब की डाली मैं सुर के सिंगार से सजती भले रंग मेरा काला अभूषण के सिंगार सजे तू पहन वैजयंती माला […]
जब शब्दों के बाण चलाने में मर्यादा ना लागी जाए जब सभी मन में प्राण यह ले ले किसी और का हक ना खाएं जात-पात और ऊंच-नीच के जब सभी भेद मिटा दिए जाए तब […]
तुझसे मोहब्बत से पहले क्या पता था मुझे मेरे प्यार की अर्जी या एक साथ रद्द होगी रोज लेता है मेरी मोहब्बत का इंतिहान तेरे शक के कोई एक हद तो होगी
मान लिया खुद को खुदा ले आलम को आगोश में वो खाता खा गए खजालत के ढंग मे खजालत-लजजा
मेरी भोली सी कविता कहीं खो सी गई है उसकी मासूम हंसी आंखों से ओझल हो सी गई है ये खोई है तर्क वितर्को मैं इस गद भाषा के फर्को में आज के इस दर्द […]
मेरी कब्र को बनाना शमशान की दहलीज पे सुना है वहां सब अच्छे लोग रहते हैं मुझे देना है पहरा उन सभी काफिरों से जिन से दुखी ये जिंदा लोग रहते हैं जीवन भर गालियां […]
सूरज ने जलन की धूप से जलाया धरा को तो बादलों ने प्रेम वर्षा कर आ कर पुचकारा जब वृक्षों से छीन लिया पतझड़ ने शृंगार तो बहारों के पुष्पों ने आकर दुलारा जब दुख […]
मजाक ना बनाना कभी फक्कड़ फकीर का राज जाने बैठा है वह जीवन की लकीर का साधारण लिवाज मे क्या जानोगे उसकी हस्ती एशो आराम छोड़ आया है वह अपनी तकदीर का
अलग ही सुकून है खुदा की दिखाई राह में ऊंचा उठा दिया है मेहरम निगाह
लाखो दर्द सहकर भी रहते हैं खामोश जिंदगी बिता दी तुम्हारी तकदीर बनाने में जिनकी एक हंसी देखने को तरसती है मेरी निगाहें तुम 1 मिनट लगाती हो उनको रुलाने में
मैं कहती हूं बिल्कुल गरीब है तू यह जानकर कि तुझ पर संपत्ति विराट है दौलत से नहीं जो दिलों से राज करें वही तो असल में होता सम्राट है
आब ए चश्म की नुमाइश ना आंखें करें मेरी एहतियात से दूर करें अख्ज की भीड़ को आफताब की किरण भी ना छू सके मुझे अकिबत की फिक्र है दिल अजीज को
ना जाने क्यों लड़ते रहते हैं लोग जिंदगी बिताते हैं एक दूसरे पर रोष में ना जाने क्यों सभी भूल जाते हैं एक दिन सोना होगा मौत के आगोश में
आकाश से पाताल की होगी बातें पर बातों का कोई भी तर्क ना होगा जो शब्दों के सागर से ढूंढे ना मोती तो मुझ में और मुझमे फर्क क्या होगा
गजब एहसास है तुम्हारे पास होने का दूर जाने का गम भी कम नहीं तुम्हारी महक आज भी महसूस होती है जैसे सूखे फूलों में बास आती है
सिलसिला यूँ ही चलता रहे मुलाकातों का बीते ना पल यूं ही चलता रहे तेरा मेरा मिलना बिछड़ना फिर मिलना और हमेशा के लिए बिछड़ जाना
रूहानियत नहीं रही अब तेरे अल्फाजों में क्या करें मौत तगाजए ने तुझे रह ही बना दिया
तुम्हारे पास दास्तां सुनने को वक्त नहीं…. तो हमारे पास भी कहने को कोई लफ्ज़ नहीं…. अगर बसा लिया है तूने गैरों को घर में तो मेरे दिल में भी तू कमबख्त नहीं …. वो […]
फूलों में महक है कागज़ में अल्फ़ाज़ आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं दिल में उतर आया है चांद। और बरस रहा है सावन कितनी ही यादें ताज़ा हो गई हैं
लफ्जों को कविता में पिरोते जा रहे हैं जज्बातों को सहेज कर रखते जा रहे हैं । बहुत हो गया अब मरने का सामान चलो छोड़ दिया तुम्हें अब जीने जा रहे हैं
तू ही तो था वो कन्धा जिस पर सिर रख रो लेती थी। तू ही तो था यार मेरा जिसको कान्हा मैं कहती थी
उसका चेहरा ही नज़र आता है देखूँ मैं जिधर वो रूबरू आता है मुझे अक्सर नज़र
मेरी बदकिस्मती थी जो तुम ना मिले मैंने तुम्हें ढूंढा है मूंगफली के दाने की तरह।
है कितनी ताकत तुझमें मुझे तोड़ने की बता तू मुझे मै हद देखना चाह्ती हूँ तेरे गिरने की।
उनसे बिछड़ कर हम रोए हैं देखना चाहिए क्या वह भी रोए
दिल की अठखेलियां और अंगड़ाइयाँ धीमे-धीमे बढ़ती जा रही हैं उम्र चांदनी की तरह घटती जा रही है तुम्हें होश है कि नहीं अब सितम करना बंद कर बेखयाली में भी खयाल आता है तेरा […]
आँखों के सामने बैठे हुए हैं सिर झुकाए हुए शायद उन्हें एहसास है मेरे साथ किये जुल्म सितम का।
मोहलत की जरुरत थी थोड़ा सा इंतजार कर लेते बहुत कुछ सोंचा था तुम्हारे लिये हमनें।
दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए वो फिर किसी के दिल को, शीशे सा तोड़ेंगे उस बदनसीब का अभी से गम मनाइए
दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए वो फिर किसी के दिल को, शीशे सा तोड़ेंगे उस बदनसीब का अभी से गम मनाइए
जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसमें पत्थर हैं या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]
जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसने पत्थर है या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]
नीली छतरी कुर्ता ढीला ढीला पहनकर पजामा निकला वह छैल छबीला…… हाथ में गुब्बारे और बच्चे प्यारे-प्यारे पीछे पीछे उसके दौड़े जा रहे थे…… थोड़ा सा बूढ़ा पर होठों पर मुस्कान हाथों में खिलौने और […]
गुलाबी आसमान ख़्वाब धुंधले से धुआं धुआं है चारों तरफ कोई उम्मीद भी दिखाई नहीं देती तुझे सुधारने की हर कोशिश नाकाम ही रही तूने कभी भी कोशिश ही नहीं की मुझे समझने की या […]
आंसुओं से नहा कर धूप का चंदन घिस कर तेरे प्रेम का उबटन लगाकर उजली तो थी ही और निखर भी गई
कयामत से पहले तेरा चांद देखना चाहते हैं सितारों के जुगनू खुद में समेटना चाहते हैं आसमान जैसा मेरा दिल ज़मी है तू मेरी हम तुझमें उतरना चाहते हैं।
छुप कर आंसू बहाते हैं रो-रोकर जातेहैं सपने मेरे तड़पकर टूटते जा रहे हैं या खुदा हम तेरे पास आ रहे हैं
सफ़र की शाम हो गई ज़िन्दगी की आरज़ू में मौत बदनाम हो गई ।
जुस्तजू की और खो बैठे चैन और करार आते हैं सपनें उसके बार-बार
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