मुट्ठी में भर लेती सारे जहां के तारे जलते हुए सूरज की तपन को भी सहते हुकुमत करते हम दुनिया में सारी मोहब्बत की नजर जो मैहरम तेरी होती
मुट्ठी में भर लेती सारे जहां के तारे जलते हुए सूरज की तपन को भी सहते हुकुमत करते हम दुनिया में सारी मोहब्बत की नजर जो मैहरम तेरी होती
मेरी लेखनी कुछ ऐसा कमाल कर दिखा दे इन तीनों दुनिया को एक साथ ला दे करूंगी मैं उम्र भर तेरी जी हजूरी जो मेरे लिखे शब्द को हजूर तक पहुंचा दे
तकदीर बनाने वाले ने क्या खूब ही खेल रचाया है इंसान बनाया दुनिया में इंसानियत को कहीं छुपाया है
ऐ मौत तू इतनी बेरहमी न दिखाया कर यमराज अगर भेजें किसी सैनिक को बुलावा तू यमराज से थोड़ी सी बेईमानी कर जाया कर
भारतवासी गर्व है तुझ पर तेरी एकता सच्चे मजहब पर प्रेम अखंडता की परिभाषा है तू स्नेह से दुलारी हुई भाषा है तू दंगों से हुआ था ना दिल तेरा कच्चा तू भारत का पूत […]
मैंने पूछ ही लिया था एक दिन गुडहल से इतनी हिम्मत तू कहां से लाता है मैं मुरझा जाती हूं थोड़े से दर्द से तू टहनी से टूट कर भी खिल जाता है खूबसूरती से […]
जीवन की राह में सहता है वो दर्द तेरे संग मैं झेलू जो कहे कि साथ निभाएगा तू तो तेरी बला मैं अपनी सिर लेलू
कोई क्या होड़ करेगा भारतीय नारी की क्या खूब ही संवारती हैं वो अपने सिंगार को वहीं वीरता के चर्चे भी कम नहीं उनके उंगली पर जाँचती हैं तलवार की धार को
माना मौत से सबको डर लगता है, पर बुरे काम करने से परहेज नही है। परहित करके देखो शान्ति मिलती है, न हुआ फायदा तो कोई नुकसान भी नही है।।
कश्तियाँ नही हौसला तो हमारे पास है। कह दो स्वम्भू खुदाओं से….ऊपर वाला मेरे साथ है।।
समय पर सीख लो रिश्ते निभाने। वरना हो जाओगे बिल्कुल बीराने।।
इश्क वो नहीं जिसमें भावनाओं का मजाक बनाया जाता है इश्क तो वह है जो रूहानियत से निभाया जाता है
माना बहुत दूर है आशिया तुम्हारा इतने दिन हो गए तुम्हें आते आते इंतजार की घड़ी इतनी बड़ी हो गई मेरी कलम थक गई तुम्हारी यादों को बताते
हिन्दी होली गीत – मत तरसाओ ना | होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम , मुझे मत तरसाओ ना | अबकी फागुन तुमको लगाएंगे रंग | मुझे मत तड़पाओ ना | गोरे गालो गुलाल लगाएंगे […]
क्योंकि तकलीफ तो हमें भी होती है तो दवा नहीं करते सदाबहारी का मोहब्बत कर हिस्से में आई बदनामी एक जख्म दे दिया है तुमने यारी का
सौ दफा दफन किया मैंने तेरी याद को कब्र की धूल को उड़ा के दिल कुरेदती है कैसे
एक बात तो सोचने वाली है जरा तुम भी गौर फरमाओगे किसी घायल की जो मदद करो तो वीडियो कैसे बनाओगे तुमसे ना होगा जाने दो तुम वीडियो बनाते ही रहना कोई मरता है तो […]
समय नहीं देते अभिभावक फिर बाद में पछताते हैं जब छोटे-छोटे बच्चों को बड़े फोन दिलाए जाते हैं पहले बच्चे खेलने जाते जाने संयम की रस्मों को अब तो मुखोटे बन कर बैठे देखो बड़े-बड़े […]
जब देश की विकास दर बढ़ती है तो जाल फैलाया जाता है सोशल मीडिया के पिंजरे में नई पीढ़ी को फसाया जाता है कुछ बाज सयाने उड़ जाते हैं जो जान गए रणनीति को नीति […]
जब हवा दर्द भरा किस्सा सुनाती है मेरी रूह भी सहम सी जाती है कहे मैं गई एक दिन कदम की डारी अंडों के पास मरी चिड़िया बेचारी कहे सब जग हवा हवाई विषैली जब […]
लोग कहते हैं मुझे भी ला देना वह मुस्कुराहट का मुखौटा जिसके पीछे यह दर्द भरा चेहरा छुपाती है मेरी तड़प उन दीवानों से पूछो जो मेरे दर्द से दहल सी जाती है
धरती पनपाती वृक्षों को, वृक्षों पर बसेरा जीवो का। ये वृक्ष नहीं ये मुखिया हैं, धरती माता का प्यार यहां। कितना सुंदर ये घर बगिया, रहते सुंदर परिवार यहां। कुछ जा रहते कोटर के अंदर […]
धरती पनवाती वृक्षों को, वृक्षों पर बसेरा जीवो का। ये वृक्ष नहीं ये मुखिया हैं, धरती माता का प्यार यहां। कितना सुंदर ये घर बगिया, रहते सुंदर परिवार यहां। कुछ जा रहते कोटर के अंदर […]
सुलग रही है प्रतिदिन ज्वाला मानवता के पराली में कायरता की राख छनेगी कलयुग की इस जाली में पसरा होगा बस सन्नाटा मर्यादा की दहलीजो में बिक जाएगी प्रेम अखंडता नीलामी की चीजों में बना […]
वह कहते हैं तबाह हो गए हम तेरे इश्क में कैसे कहे तबाही तो हमारी मोहब्बत की हुई है
उन्हें पाने की कोशिश में हम खुद को बुलाते गए हम दिल लगाते गए वो दिल जलाते गए
सिर न झुकाना अपना फर्ज की राह में क्योंकि सर तो झुकेगा सिर्फ खुदा की पनाह में
हिमराज के सौंदर्य रीझे तपस्विनी सी बैठी थी नजर को अपने बनाई थी सारंग शीलीमुख नजरे ऐठे थी स्वेत वस्त्र वो करे थी धारण वनमाला गल पहने थी राजमुकुट सी धरे थी सीस पे लालू […]
जन्नत नसीब न होगी गर कर्तव्य पालन न किया। मनुष्य होकर जो मानवता का फर्ज अदा न किया।।
देश स्वाधीन है तब किस बात की आज़ादी यह चांदी के चमच्च ले के जन्म लेने वाले क्या समझेंगे होते अगर दलित या आदिवासी के बेटे तोह समझ आती तुम्हारे मंदिरों में हमें घुसने न […]
सजनी है गौर और सजना क्यों काला? आओ हम खेलें खेल रंग रंग वाला। लाल से रंग दो हरे से रंग दो। नीला और पीला गुलाबी से रंग दो। रंग डालो अज बेनीआहपीनाला। आओ हम […]
हिन्दी कविता- बसंत आने लगा | बागो मे फूल कलियों बाहर अत्यंत आने लगा | मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा | शरद ऋतु शने शने बिगत अब होने लगी | धूप की […]
भोजपुरी होली गीत 3-मस्त फागुन | आया है मस्त फागुन उड़ती है तेरी चुनरिया | सर सर बहती है मह मह महकति है हवा | तुझे रंग लगाऊँगा मै हर हाल मे | होली खूब […]
हिन्दी गजल- वतन को बचाने चले है | लगा मजहबी आग आज वो वतन जलाने चले है | भड़का सियासी चिंगारी वो वतन मिटाने चले है | भरा नहीं दिल उनका फैला दंगा फसाद देश […]
हिन्दी गजल-संग जो चले होते | दो कदम तुम दो कदम हम संग चले होते | तन्हा न मै तन्हा न तुम कभी दोनों रहे होते | याद किया होता गर दिल से कभी तुमने […]
हिन्दी गजल- हम सहने लगे | तेरे बेगैर तन्हा ही हम रहने लगे | याद तेरी अश्क आंखो बहने लगे | हुआ रुसवा शहर कोई बात नहीं | लेके तेरा नाम आशिक कहने लगे | […]
हिन्दी गजल- उसे बुझाओ लोगो | टूट रहे जो रिश्ते भाईचारे उसे बचाओ लोगो | खींच रही जो दिवार दुश्मनी उसे गिराओ लोगो | जल रहा जो मकान वो हमारा और तुम्हारा भी | धु […]
दंगाई ——- आजाद देश में रहकर तुम, आजादी पाना चाहते हो! सही बात समझ में आती नहीं, और द्रोह यहां फैलाते हो!! अनपढ़ लोगों को फुसलाकर, भ्रामक बातें फैलाते हो। जिस देश में रहते खाते […]
माई री हम दोनों का दुःख साझा है.। तू कुम्हलाई तू मुरझाई ््अंग-अंग तेरे पड़ी बिवाई ्अंबर हारा दस दिश हारे सूख गया आंखों का पानी तू ही बतला तुझ पर रोऊं या बाबा की […]
सुमधुर ध्वनि मुखरित है होली के राग का। लो आ गया भैया महीना रंग बिरंगी फाग का।। धरती भी रंगीन है अम्बर भी रंगीन है। नवल कुसुम संग पत्र नवल है सुरभित जगत नवीन है।। […]
धन्यवाद कहना भी कितना आसान होता है। इससे छोटा सा गुनाह आसानी से माफ होता है।।
दावत तो देते है जैसे हमारे इंतजार मे ही बैठे हो। पर चौखट पर कदम रखते ही फिर क्यूं मुंह मोड़ लेते है???
दंगे —- रात के छम्म सन्नाटे में, एक भय की आहट है। घबराहट की दस्तक है, कोई है!! का एहसास है। कल क्या होगा? की सोच है। बीते कल तक जो जिंदगानीया शांति थी आज […]
जीना है अगर तो खुद को खुश रखना सीखो हजारो है यहाँ आपको आँसू देने वाले
सुना है कोई आया है मेरा हाल पूछने उनसे कह दो मै ठीक हो गया हूँ जब किसी ने इतना वक़्त निकाला है मेरे लिये देखकर उन्हे अब चैन आ जायेगा दीदार से उनको मुझे […]
खूब खेली मोहन मेरे दिल से होली नैनों से नींदो की कर ली है चोरी तुझसे मिलने पहले मैं थी चित् कोरी अब चित मेरा तुझ में ना मिले कोई ठोरी तू आकर मिले ना […]
उलझन भड़ी ज़िन्दगी को सरल लिख रहा हूँ। तुम्हारे प्यार को ज़ुबान -ए-गजल लिख रहा हूँ।। एक गुनगुनाहट भड़ी आवाज़ देकर ऐ प्रीतम तेरी वफाओं के दास्तान -ए-फजल लिख रहा हूँ।।
हंसों के झुंड में बगुलु की आबादी बूंदों ने की है बादलों से शादी बैठे हैं बनकर हम कब से मुरादी एक बार दीदार दे दे वो महलों की शहजादी
मैं कैसे उड़ा गुलाल जब भी हिंसा का धुआं उड़ रहा है मैं कैसे जलाऊं होली जब मेरा देश चल रहा है मैं कैसे खेलू रंग की होली जब हर जगह तो रक्त पड़ा है […]
दिल जलाया है हमने एक शमा बनाकर उजाला जो करना था तेरे मोहब्बत के आशियाने में
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