कागज़ की कश्ती भी पार लगाई है हमने, लहरों को चीर कर मन्ज़िल पाई है हमने, बहुत मुश्किल था तैर कर उस पार जाना, हौंसलों के बाज़ुओं से जीत पाई है हमने।। राही (अंजाना)

दूसरों को पढाने लगे तो खुद को पढ़ना भूल गए, चेहरे ऐसे भी थे जिन्हें हम गढ़ना भूल गए, समझ ली मोहब्बत की किताब सबसे पहले हमने, तो बाकी सारे विषयों से हम जुड़ना भूल […]

दूसरों को पढाने लगे तो खुद को पढ़ना भूल गए, चेहरे ऐसे भी थे जिन्हें हम गढ़ना भूल गए, समझ ली मोहब्बत की किताब सबसे पहले हमने, तो बाकी सारे विषयों से हम जुड़ना भूल […]