किसी को साधन नहीं, दो रोटी क्या दामन नहीं, कोई बस्ती में है बचपन से मस्ती के पैमानों की, बहुत बदल गई है दुनियाँ रस्में रीत गुनाहों की, तोड़ दीवारें लुट जाती हैं अस्मत यहां […]

तेरा नाम कागज़ पर बार-बार लिखता हूँ। तेरे प्यार को दिल में बेशुमार लिखता हूँ। टूटेगा न सिलसिला तेरी तमन्नाओं का- तेरे ख़्यालों पर गमें-इंतज़ार लिखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मीठी सी है वो हँसी तेरी, आँसू तेरा भी खा़रा है, उन उम्र-दराज़ नज़रों का तू ही तो एक सहारा है। मेंहंदी से सजी हथेली भी करती तुझको ही इशारा है, कानों में गूँजी किलकारी […]

…..………………….Just A Few Lines……………….. उसकी खुशबू से महकी हैं सारी फ़िज़ाये गुलों के रंग भी यूँ फीके पड़ जाए न मय न मय-खाना ये जादू कर पाए उसका नशा यूँ, कोई क्या ही कर पाए…. […]

मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं, कुछ लोग इसी तरह हमें गुमराह किये बैठे हैं, रहते हैं साथ मगर खुद से दूर किये बैठे हैं, कुछ लोग जलकर भी रौशनी किये […]

मैं तेरी गुफ्तगूं की राह ढूंढ़ता रहता हूँ। मैं तेरी ज़ुल्फ़ों की पनाह ढूंढ़ता रहता हूँ। जब भी नज़र में आती हैं तस्वीरें यादों की- मैं अपनी मयकदों में आह ढूंढ़ता रहता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कैसा होगा अपना हिंदुस्तान…! ————————————— सुनो..सुनाई देगी तुम्हें भारत माँ की चीत्कार लहू बहे जो मेरे बेटों के- क्यों होता जा रहा बेकार—? शहादत मेरे लाल की– चुप पत्थरों में सिमट गई है मुझपर मरना […]

कलम की स्याही को फीकी होने न देना, जो ज़िंदा हैं इतिहासों में मुर्दा होने न देना, छीन भी ले गर तुमसे कोई कविता तुम्हारी, अपनी कलम का वजूद पर कभी मिटने न देना।। राही […]

किरदार कई बदले पर यार न बदला हालात कई बदले पर उसका प्यार न बदला जीवन के सफर में ठोकरें लगी कई हज़ार पर बार-बार वो यही बोला “तू इतनी चिंता क्यों करता है मेरे […]

मेरी दोस्ती पर लिखी ये कविता, दोस्तों को समर्पित ये दोस्ती अल्हड़पन के लंगोटिये, ५० साल से साथ चल रहे हैं दोस्ती की किताब में रोज़, नये अध्याय लिख रहे हैं हमारी दोस्ती जगह, जाति, […]

तुमसे टकराकर मैं हर पल बिखर जाती हूँ, मैं बूंद हर बार मगर जिद्दी पर उतर आती हूँ, सिलसिला रुकता नहीं मैं थमती नहीं कहती हूँ, के आसमाँ से धरती को मैं भिगाने चली आती […]

ह्र्दयतल में बंशीधर ने सखा सुदामा कुछ ऐसे बसाये लिए, दुःख सुख सब जैसे श्रीधर ने सारे आप ही दूर भगाए दिए, रहे ग्वालों और ग्वालिन के संग राधे, प्रेम रस गगरी छलकाए दिए, जब […]

माफ़ करना, ये मैं नहीं, मेरी निराशा बोल रही है नासमझ, मेरी सहनशीलता को, फिर तोल रही है सुकून गायब है, ज़िंदगी उलझी २ सी लग रही है कोशिशों के बाद भी, कोशिश, बेअसर लग […]

ख्वाइशों का पंछी गगन में उड़ता रहता है, बैठता एक पल नहीं धरती से उठा रहता है, आंसुओं का बहना कम नहीं होता एक पल, इंसा का सर बस रब के आगे झुका रहता है।। […]

तुमसे मिलने की तमन्ना अब भी लगा बैठा हूँ,, सुबह से शाम तुम्हारी गलीयो मे चक्कर लगा –लगा कर दिल को समझा रहा हूँ, तुमसे मिलने की तमन्ना अब भी लगा बैठा हूँ, बीत गई […]

तेरा ख़्याल ख़ुद को समझाने का रास्ता है। तेरी याद दिल को बहलाने का रास्ता है। जब जाग जाती है लबों पर तेरी तिश्नगी- हर शाम मयखानों में जाने का रास्ता है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

वक्त निकल गया निगाहों से निगाहें मिलाने में, सफर में एक दूजे को समझने -समझाने में, परिचय तो पहली मुलाक़ात में हो गया मगर, ढूढ़ते रहे हम खुद को अपने ही मकानों में।। राही (अंजाना(

ऐ खुदा बोल तेरी रजा क्या हैं मेरे नादान दिल की सजा क्या है चले हैं सच की तलाश में तेरे ठोकरो का अंजाम क्या है अपना हम किसको कहे तेरे अपनो ने तोह रास्ता […]

अपने ही घर में क्यों बंटवारे हो गए, जो अपने थे अपनों से किनारे हो गए, बहुत शिद्दत से जुड़े थे जो खून के रिश्ते, दो गज़ ज़मीं की खातिर बे-सहारे हो गए, जान के […]

माँगने पर तस्वीर अपनी पुरानी दे दी, हमने जिनको अपनी पूरी जवानी दे दी, ख़्वाबों की दरख्तों में दफ़्न हुई थी कभी, कोरे कागज़ पर लिखने को वही कहानी दे दी।। राही (अंजाना)

अनजान रस्तों पर उनसे यूँ मुलाक़ात हो गई, बिन मौसम जैसे उस एक रोज़ बरसात हो गई, बादल, आसमाँ, हवाओं सबकी साज़िश थी मानो, दो दिलों को मिलाने को साथ कायनात हो गई।। राही (अंजाना)

मैं ख़ुद की तरह ज़ीने का जुनून रखता हूँ। मैं दिल में अरमानों का मज़मून रखता हूँ। हौसला क़ायम है अभी दर्द को सहने का- मैं ख़ुद में तूफ़ानों को मक़नून रखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय