जहजे दिल को सभाँरने का काम कर रहा, जेपी अपनो का कीमत अपनो से दे रहा। जेपी सिह
जहजे दिल को सभाँरने का काम कर रहा, जेपी अपनो का कीमत अपनो से दे रहा। जेपी सिह
गांधी,भगत,चद्रशेखर ,झाँसी की महारानी हम सब की खातिर जिसने,अपनी जान गवा दी अम्बर से धरती पर आये,ये वतन बचाने आज़ादी क्या होती है,ये मूल पाठ पढ़ाने -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुम धरा सी धीरजता, सूर्य सी तपन बन जाओ आंच न देश पर आये, चिंगारी हो,अगन बन जाओ रोक दो आतंक को, वीरो तुम प्रलय बन जाओ बाँध कर सर पे कफ़न, तुम तूफ़ान से […]
निज नहीं कुछ स्वार्थ इनका, जीते हैं बस देश की खातिर हर वक़्त,पहरेदार बनकर, जागते हैं इस वतन की खातिर -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बचपन के वो खेल, वो झूले, हंसी ठिठोली ,हम न भूले वो रूठना और मनाना, और मिलजुलकर हर ख़ुशी मनाना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
गहरा है ये मेरा प्यार, बहना करती है इंतज़ार जा बसे तुम विदेश भैया कैसे बांधूंगी अब राखी राखी के धागों में पिरोये प्यार के मोती तेरा सुखी रहे संसार मत भूलना मेरा प्यार आया […]
जीत लिया संसार तूने, ये न तेरी जीत है जीता वही मानव, जिसे मानवों से प्रीत है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बहना की राखी में, राखी के धागों में रक्षा है,शिक्षा है आशीष है, दुआ है अटूट बंधन है रोली है चन्दन है पावन पर्व का अभिनन्दन है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
झूठ के रस्ते पे सच का फ़रिश्ता मिला, मुझे हर कोई रिश्ता बड़ा पक्का मिला।। राही (अंजाना)
जिस्म छोड़ कर रूह पे असर उसका होता रहा, दवा नहीं मर्ज़ ऐ मोहब्बत की चपेट में था मैं।। राही (अंजाना)
आज दिल में छुपे हर राज़ लिखने बैठा हूँ, तुझको अपने ख़्वाबों किस्सों का सरताज लिखने बैठा हूँ, एतराज़ हो कोई तो मुझसे खुल कर कह देना, आज खामोशी को भी तेरी आवाज लिखने बैठा […]
सच के समन्दर में झूठ की कश्तियाँ डूबती नज़र आती हैं, जहाँ तलक नज़र जाती है बस सच की कश्तियाँ नज़र आती हैं, बढ़ते झूठ के सुनामी हैं कई सच की बस्तियाँ गिराने को, मगर […]
किसके कहने पे ये डाली झूम- झूम इठलाती है, तेज हवा के झोंके से ये पत्ती क्यूँ गिर जाती है, बारिश की ये बूँद भला क्यूँ खुदपर इतना इतराती है, धरती से मिल जब अपना […]
ख्वाबों में आकर वो हमसे रोज़ मिलते रहे, और हम मासूम बस उनसे यूँहीं छलते रहे।। राही (अंजाना)
मोहब्बत की तालीम कहीं मिलती नहीं यहाँ पर, फिर भी इस रंग में लोग रंगे नज़र आते हैं।। राही (अंजाना)
हर सुबह ज़िन्दगी की नई जंग शुरू करता हूँ, हर शाम तजुर्बों से अपनी किस्मत बुनता हूँ।। राही (अंजाना)
अब एन्टिना कोई घुमाता नहीं, छत पर यूँहीं कोई जाता नहीं, बैठे रहता हर एक यहां फैल कर, अब रिमोट से ऊँगली हटाता नहीं।। राही (अंजाना)
जवाब देने में हाजिरजवाब बताये गए हम, अपने ही घर में खामोश कराये गए हम।। राही (अंजाना)
जब बोलते रहे तो कोई सुनने वाला न मिला, जब खामोश हो गए तो बहुत सुना गया हमें।। राही (अंजाना)
आँखों पर पड़ा पर्दा हटाना होगा, कुछ तो अर्थपूर्ण कर दिखाना होगा, यूँही मिलता नहीं सम्मान जगत में, कोई चित्र तो परिपूर्ण बनाना होगा।। राही (अंजाना)
आँखों पर पड़ा पर्दा हटाना होगा, कुछ तो अर्थपूर्ण कर दिखाना होगा, यूँही मिलता नहीं सम्मान जगत में, कोई चित्र तो परिपूर्ण बनाना होगा।। राही (अंजाना)
मान लिया था हमने हर सबेरा है अपना, फिर कुछ यूँ हुआ के कभी रात हि ना गुजरी… —विद्या भारती —
वो कहती है लिखा हुआ आज सुना दो मैंने सिर्फ इतना ही कहा जुबाँ लड़खड़ा जाएगी एहसास बड़े गंभीर हैं -मनीष
मेरी चादर का मैल हटा दे, माया मोह की फांस मिटा दे आये जग में हैं क्यूँ वो मकसद बता दे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
है कर्तव्य यही, माता पिता का ध्यान रखो सीख मिले जो उनसे, उसको सर माथे धरो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
उथल पुथल सी होती है क्यों, मन की गति को रोक सही भटक भटक कर थक गया, स्थिर हो तू बैठ कहीं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जी ले जीवन ऐ मनवा, ये जग तो रैन बसेरा न हो बंधन न हो मुक्ति, नित रहे प्रिय का पहरा जी ले जीवन ऐ मनवा, ये जग तो रैन बसेरा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
न हो मन उदास, सावन के मास आयंगे सांवरिया, बुहार ले डगरिया रख विश्वास प्रिय तेरे पास सावन के मास -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ये सावन है,मनभावन मन में उठे उमंग हज़ार क्यों लगे ये बार बार संजू सवरू करूँ श्रंगार नैना तकें,पिया का आवन ये सावन है मनभावन -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बिछड़ गए मीत जिनके, मनवा उन्हें बुलाये छाये घटा सावन की जब, नैना भर भर आये मन सावन गीत गए, मेरा पिया,जब घर आये -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ये कैसी मृगतृष्णा है, जो न मिठे सदियों तक नज़रों तक आये मधु, आये न पर अधरों तक -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
आ गया सावन देखो साथ,सात रंगों को लेकर हरियाली और खुशहाली बिखरी हुई है कण कण पर -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
दिन दिवस ,रैन अँधेरी दुष्प्रवत्तियाँ हैं घनेरी मुझको प्रकाश दिखला दो, अपना हाथ बड़ा दो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरी चादर का,मैल हटा दे माया मोह की,फांस मिटा दे आये जग मैं क्यों,वो मकसद बता दे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरे गुरुवार,मन का दिया जला दो ठहर ठहर जाते मेरे पग, मुझको पंथ दिखा दो, मन का दिया जला दो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विवेक संयम नियम अनुशासन सही मार्ग गुरु से मिले, वो करे जीवन मैं शासन -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सोई हुई चेतना को, आप गुरुवार जाग्रत करदो मन की इस मरुस्थल मैं, स्नेह की बरसात करदो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
वरदहस्त रख दे,सर पे तो मुझको चैन मिले तू बैठा है अंतर मैं कब तुझसे नैन मिले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
आईने को देख कर,ठहर जाता हु में कहता है जो आइना,सहज जाता हु मैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जख्म ज़माने से मिले, जुल्म के, आलम मिले है वक़्त की पाबंदियां बिखरे न कोई आशियाँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
फिक्र किसी को नहीं किसी की, है ऐतराज सभी को औरों से क्या लेना,रखना अपनी बात सभी को -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जिसके पास ज़मीर है, वह मनुज ही अमीर है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कविता,अस्त्र है,शाश्त्र है तलवार है होगा परिवर्तन, यह विचार है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे मनुज तू स्वच्छंद नहीं है अब तू पाबंद फिर क्यों है तू मंद हे मनुज तू स्वच्छंद -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मिला है जो तुमको अवसर, न उसको व्यर्थ गवाना अर्थ जीवन का है यही की, खो कर फिर है कुछ पाना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुझको अपने सिरहाने रख सोता हूँ, मैं तुझ संग ही अपने सपने बोता हूँ।। राही (अंजाना)
इंतज़ार के बाद मिलने का मज़ा आ गया, सुबह दरवाजे पर मेरे उसका तार आ गया।। राही (अंजाना)
बारिश में नहाये तो हम सभी थे मगर, जिनके उतरने थे सारे रंग उतर गए।। राही (अंजाना)
उसके चेहरे को देखकर मैं दीवाना हो गया, मेरी छोड़ो आइना भी उसका दीवाना हो गया।। राही (अंजाना)
कोई दवा कोई दुआ काम न आई, आँख जब बन्द की तो सामने माँ आई।। राही (अंजाना)
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