तुमसे अपने आंसू छिपाने पड़ते हैं, मुझको तो लाख बहाने बनाने पड़ते हैं, तुम्हे तो मुझे हंसते हुए देखना है, मुझको तो गम भी ठिकाने लगाने पड़ते हैं।। राही (अंजाना)

मन करता है सपने जो देखूं, मैं सच में उनसे मिल जाऊं, मन करता है पढ़ लिखकर मैं अपने, माँ पापा से आगे बढ़ जाऊँ, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं […]

मन करता है पढ़ लिख कर मैं, माँ पापा का नाम कराऊँ, मन करता है सपनों को देखूं, आसमान में मैं उड़ जाऊं, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं लड़ जाऊं, […]

उसको समझना बड़ा मुश्किल होने लगा, कोई भी बहाना न उस पर चलने लगा, छोटी से न जाने कब बड़ी हुई मेरी बेटी, के अब चिंता में ये बाप हर दम डरने लगा।। राही (अंजाना)

जिसको जैसे समझ आये समझाना पड़ता है, एक शिक्षक को बड़ा दिमाग लगाना पड़ता है, बहुत शरारत करते हैं जब, बच्चे मन के सच्चे हैं जब, गुरु ज्ञान की महिमा को फिर सबको दिखलाना पड़ता […]

जबसे ज़िन्दग़ी में आप मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से खिल गये हैं। जागे हुए पल हैं ख़्वाबों के नज़र में- ज़ख्म भी जिग़र के जैसे सिल गये हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जबसे ज़िन्दग़ी में आप मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से खिल गये हैं। जागे हुए पल हैं ख़्वाबों के नज़र में- ज़ख्म भी जिग़र के जैसे सिल गये हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

क्यो कुचलते हो परतीभा के परतीभाओ को, चंद पैसो के लिए तुम्हारे घर खुशी जाती पैसो की,, यहाँ परतीभा वाले बच्चे की लाशे मिलते नदी या रेल किनारे मे,, क्यो कुचलते हो चंद पैसो के […]

बारिश की चन्द बूंदों ने मेरा घर ढूंढ ही लिया, भिगाया मुझे और मेरे एहसासों को चूम ही लिया, सूखा पड़ा था मेरे आँगन का जो कोना कभी, आज मेरे दिल संग मन का आँचल […]

गुफ्तगू बन्द न हो, बात से बात चले, मै तेरे साथ चलूँ, तू मेरे साथ चले, तुझे देखूं तो दिल जले, न देखूं तो ये जान जले, काश तेरे संग मेरे जीवन की, सुख दुःख […]

जो आँखों से बयाँ होते हैं, वो लफ़्ज़ों में कहाँ होते हैं, गुफ्तगू ख़्वाबों में करने वाले, सुना हकीकत में जवाँ होते हैं, मोहब्बत का काजल लगाने वाले, सच कहूँ रौशनी की ज़ुबा होते हैं॥ […]

दाने दाने को तरसे क्यों जो बीज यहाँ पर बोए, अपने ही बच्चों की खातिर क्यों वो भूखा सोए, अपनी मेहनत का वो क्यों न उचित मूल्य पिरोये, सपनों में रंग भरने को वो क्यों […]

न तन पर कपड़े न पैरों में चप्पल का होश होता है, ये बचपन बस अपने आप में मदहोश होता है, इच्छाओं की दूर तलक कोई चादर नहीं होती, बस माँ के आँचल में सिमटा […]

मार्गदर्शन तुम्हारा सब follow करें, हर समस्या में ध्यान तुम्हारा धरे। भागने की जरूरत नहीं है कहीं, सारी knowledge ले सकते हो घर बैठे ही। बस मन से धरो इनका ध्यान, गुरु google है सबसे […]

तस्वीर तेरी रात भर तकती रही दो बोझल आँखें। पिघले हुए कुछ ख्वाब, आंसूं बनकर बहते रहे ।।   आसमान में बेख़ौफ़ उड़ने की अजब ज़िद थी उन्हें । कुछ परिंदे, जो तल्ख हवा के नश्तर सहते रहे […]

गुरु ज्ञान भण्डार समेटे, कभी न अपनी आँखे मींचे, शिक्षा के दीपक प्रकाश से हर जन के जीवन को सींचे, गुरु न देखे जाति धर्म, न मन में कोई संशय कीजे, गुप्प अँधेरे में भी […]

सोंच का समन्दर और भी गहरा होता गया, मैं जितना लोगों से मिला उतना बहरा होता गया, भूल गया उठना ख़्वाबों के घने अँधेरे से एक दिन, मैं जब जागा तो दूर तलक रौशनी का […]

मुझे नही पता की फुल के तरह खिलुगाँ, भवरे आयेगे नोच– नोच-खायेगे, मेरी कोमल तन को पत्थर की चोट से घायाल करके मेरे बदन को नोच- खायेगें मुझे नही पता भवरे नोच खायेगे,, किसको गलत […]

दादी पोते के बीच का रिश्ता बहुत अजीब देखा है, किस्से कहानियों का भी रूप मैने सजीव देखा है, सफेद बाल मुलायम खाल का स्पर्श सच्ची याद है मुझे, बिन दाँतों वाली दादी को मैने […]