बेइंतेहा दर्दो को सहने की, अश्कों को पीने की सांसो की घुटन में रहने की, गमों में जीने की आदतें सारी यह किस किस की ग़ुलाम हो गई यह ज़िन्दगी तो बस मौत का दूसरा […]

शय नही कोई मुकम्मल इस जहां में कमी ढूंढ़ोगे जो एक किसी शय में दिखेंगी हजार तुम्हे वो उस शय में खुशी ढूंढ़ोगे जो तुम उसी शय में देगी वोह शय लूटा ह्ज़ार तुमपे                     […]

मेरा हर रोज़ तुझको याद करना रोज़ तुझको ख़ुदकी याद दिलाना यही हैं मोहब्बत की चँद रसमें जो साल दर साल निभायी हैं मैंने                       …… यूई

जिस्म और रूह की कश्मकश में रूह इश्क जिस्म से कहीं ज्यादा लगा बैठी रूह मेरी पिरो कर मेरे ज़ज़्बातो को खुदमें बन गले का हार तेरा, ख़ुद को सजा बैठी                                    …… यूई

सुनते थे गहन मुश्किलों में साया भी छोड़ देता है साथ रात के अँधेरे स्याह साय में मुड़ देखा ना था साया कहीं जब ख़ुद के होने का शक़ हुआ दाएँ हाथ से पकड़ बाईं […]

प्यार की यह अनमोल खुशियाँ मिलती कहां है ऐसी कलियाँ ए दिल से भरे दिलदार मेरे है तुझसे ज़िन्दगी में बहार मेरे                  …… यूई 

कोई क्यों मेरे लिए परेशान रहे कोई क्यों मेरे लिए आरजुमंद रहे ख़ुदकी आरजु सबकी ख़ुद घेरे रहे किसके पास किसके लिए वक्त रहे                           …… यूई 

क्यों घिरी ही अजीब सी कश्मकश में रही हो सोच, पाऊँ या छोड़ दूँ प्यार को बना नही वह तराजू जो तोले प्यार को कौनसे बाज़ार में जा तुम यह तुलवाओगी                                    …… यूई 

मुझसे मेरी मंजिल ना पूछो पागलपन कबका छोड़ दिया हाल क्यो हुआ बेहाल ना पूछो आँखों में जीना था छोड़ दिया                                               ….. यूई

हसीन सूरत की देखकर असली सीरत अपनी नजरों से ही शिकायत कर बैठे कह्ते रहे लोग इश्क होता है अंधा हम बहरे हो ख़ुद ही अन्धे हो बैठे                                                            ….. यूई

मंज़िल का कुछ पता नही कह्ता है मैँ तो मुसाफिर हूँ मैं भटका नही हूँ ख़ुद की राह से मैँ तो उसकी राह् का मुसाफिर हुँ                               ….. यूई

जरूरी नही के हर सफर की हो मंज़िल बिन मंज़िल भी कभी चल कर देखो सफर में खो जाओगे भूल कर मंज़िल पल पल ज़िन्दगी खुशी में जीकर देखो                               ….. यूई

मुझ जैसी भोली भाली को, “काली” बता दिया । झाङु ,पोछा, छितका की तो, घर वाली बता दिया । सज संवर के निकली तो मतवाली बता दिया । रोती बिलखती गुङिया को दिलवाली बता दिया […]

दिल की दवात से स्याही लहू का बहता रहा, कभी वक्त ने मुझको लिखा, कभी तारीख अपनी मैं लिखता रहा ।   कभी लिखा बेमुकद्दर दस्ताने-जीस्त अपनी, कभी अस्क बहाती आरज़ूओं को कहता रहा । […]

वो मिला ले नज़र तो इनायत, वो फेर ले नज़र तो शिकायत । वो पत्थर की सही पर, करता मैं उसकी इबादत ।   चखता वो मेरे दिल को देकर अपनी उल्फ़त, बढ़ता है नशा […]