Category: हिन्दी-उर्दू कविता

  • जो हूँ मैं – 4

    जो हूँ मैं वह पूर्ण एह्सास हूँ,

    जो नहीं मैं वह शून्य का वास हूँ

  • जो हूँ मैं – 3

    जो हूँ मैं वह तो है मेरे सुकर्म,

    जो नहीं मैं वह थे मेरे दुष्कर्म

    जो हूँ मैं वह सबका मीत है,

    जो नहीं मैं वह ख़ुद का गीत है

  • जो हूँ मैं – 2

    जो हूँ मैं वह हूँ हवाओ में,

    जो नहीं था मैं वह है चिताओ में

    जो हूँ मैं वह है सब जगह,

    जो नहीं मैं उसकी ना कोई जगह

  • जो हूँ मैं – 1

    जो हूँ मैं वह है स्दीवि यहीं,

    जो नहीं मैं वह था कभी नहीं

    जो हूँ मैं बचा वह तो है असल,

    जो नहीं बचा वह था नकल

  • पल – पल – 4

    पल पल

    बदलतीरचतीघटती इस दुनिया मॆं ,

    मन कैसे कहे ,  तुझे पा ही लिया ,

    है यूई जानता अब ,

    था जो कल , है वोह आज नहीं ,

    है जो आज , होगा वोह कल नहीं

  • पल – पल – 3

    पल पल

    घटता बहुत कुछ यहां ,

    जो रिश्ते कल बुने , देखा उनका अंत आज यहीं ,

    ख्वाब नये जो देख रहा , होगा उनका भी अंत यहीं

  • पल – पल – 2

    पलपल

    रचता यहां कुछ नया ,

    जो था कल तक सच , जिंदा वोह आज नहीं ,

    है लगता जो आज सच , मौत उसकी कल यहीं

  • पल – पल – 1

    पलपल

    बदलता सब कुछ यहां ,

    जो कल था तूं , है वोह आज नहीं ,

    है जो आज तूं , होगा वोह कल नहीं

  • कोई कोना जिस्म का

    कोई कोना जिस्म का
    उड़ के बैठा किसी कोने में
    अब सफर साँसों का गुजरता है
    कभी जिस्म में कभी, किसी कोने में
    राजेश’अरमान’

  • कुछ परछाइयाँ

    कुछ परछाइयाँ सी चलती है मेरे पीछे ,
    वक़्त भी बहरूपिया होता है गुमाँ न था
    राजेश’अरमान’

  • कभी मन करता है

    कभी मन करता है
    फिर से दुनिया को
    औरों की नज़र से देखूँ
    शायद मेरी नज़र में
    कोई भ्रान्ति दोष हो
    एक बार देखा
    जब दुनिया को
    दूसरी नज़र से
    लगा आँखों पे
    कोई चाबुक सा पड़ा
    जिसके दर्द से
    आज भी कराह रहा हूँ
    राजेश’अरमान’

  • वोह दर्द

    आँखों से जो बह निकले ,

                                  वोह दर्द ज़रा से हल्के थे

           जो दिल ही दिल में द़फन हुए ,

                                  वोह दर्द यूई के अपने थे  

                                                                         …… यूई

  • गहरे राज़

    गहरे राज़ छुपे है अपनी ही साँसों में
    लो तो ठंडी छोड़ों तो गर्म -गर्म
    राजेश’अरमान’

  • आँखें तो बस देखती रही

    आँखें तो बस देखती रही
    ज़िंदगी के आवागमन को
    राजेश’अरमान’

  • याद-ए-बचप्न

    यादबचप्न

    दिल को मुसकराती है

    यादमेह्बूब

    खूनअश्क रूलाती है

    ख़ुदा

    मेरा यार लौटा दे

    या अगले बचपन में पहूँचा दे

     

                                                  ..….  यूई

  • कोई पुल ऐसा भी होता

    कोई पुल ऐसा भी होता
    जिस पर चलते सिर्फ तुम
    राजेश’अरमान’

  • मर गई आत्मा

    मर गई आत्मा ,शरीर कहने को ज़िंदा है
    पंछी मन का उड़ गया ,आँखों में परिंदा है
    राजेश’अरमान’

  • मैं खामोश

                           उदास लम्हों की गहराईयों में

                           मैं खामोश

                           महफिलो की रंगीनीयों में

                           मैं खामोश

                           यह खामोशी ही अब

                           यूई की पहचान है

    …….यूई

  • सैलाब

    यह रुके हुए आँसुओं का हिज़ाब है

                           या फिर आने वाला कोई सैलाब है

     

                                                                 ….. यूई

  • न सूत न

    न सूत न कपास
    फिर भी बंधी आस
    जुलाहे ले के बैठे लट्ठ
    कभी तो आएगी कपास
    राजेश’अरमान

  • चारों और अधर्म

    चारों और अधर्म के जंगल
    भक्ति हो गई दावानल
    राजेश’अरमान’

  • दर्द

    इस दर्द में जीने की

    आदत सी हो गई

    लगता था उस पल

    कि मर जायेंगे

    तेरे बिन

    अब तो

    यह मौत ही

    अपनी ज़िन्दगी हो गई

     

                                          ……   यूई

  • नशा

    यह नशा

    वोह नशा

    इसमे नशा

    उसमें नशा

    नशे में नशा

    सबसे रंगीन नशा

    रुक जाओ ज़रा

    इतनी जल्दी क्यों है

    तुमने वोह नशा चखा ही कहाँ

    अभी मैंने तुम्हे छुआ ही कहाँ

    एक पल  यूई  को छूने तो दो

    फिर बताना कौनसा नशा

                        ………. यूई

  • मेरा वज़ूद

    कभी यहॉ तो कभी वहॉ

    मेरा यार मुझ्से पूछे

    कि तुम कहॉ

    मेरा मन कहे

    कि तुम ही हो

    मैं कहाँ

  • यह हमारा इशक

    दो इशको का मिलन है

                 यह हमारा इशक

    है खुदा की तसवीर यह इशक

                 यह तेरा इशक और यह मेरा इशक

  • मेरा इशक – तेरा इशक

    है यह तेरा भी इशक

                  और है तो मेरा भी इशक

    ना कम तेरा इशक

                  ना कम मेरा इशक

    दो एह्सासो का मिलन है

                 यह हमारा इशक

  • तेरा इशक

    मेरा इशक तेरे मन में सिमटा हुआ परिंदा

                  तेरा इशक मेरे मन को अपने संग ऊङाता हुआ परिंदा

    मेरा इशक तेरे आँचल में सिमटी हुई मेरी रूह

                  तेरा इशक मेरी रूह में सिमटी हुई तेरी रूह

  • मेरा इशक

    मेरा इशक झील का रुका हुआ पानी

                  तेरा इशक नदी की बहती हुई धारा

    मेरा इशक वोह आग, जो आग को पानी कर दे

                  तेरा इशक वोह आग, जो पानी को आग कर दे

  • रिश्तों का जुड़ना

    रिश्तों का जुड़ना

    रिश्तों का जुड़ना

     

    कभी टूटी हड़ियों का , जुड़ना देखा है क्या ?

    टूटे हुए दोनों हिस्सों को , साथ में रख,

    श्वेत सीमेंट की लेप लगा , श्वेत कपड़े की खेप लगा ,

    खयाल सिर्फ़ इतना कि , कोई ठोकर ना लगे I

     

    कभी टूटे हुए रिश्तों का , दर्द सहा है कभी ?

    समझ आता है अब , टूटे रिश्तों को जोड़ पाना ,

    विश्वास के सीमेंट की लेप , प्यार के धागे की खेप ,

    खयाल सिर्फ़ इतना कि , कोई ठोकर ना लगे I

     

    समझ आता है अब , टूटे हुए रिश्तों का सच I

    विश्वास का सीमेंट लग पाया होगा ,

    या प्यार की डोरी क्च्ची लग गई होगी ,

    या शायद रिश्तों के पकने से पहले ,

    कोई ठोकर लग गई होगी I

     

    समझ आता है अब , हर पक्के रिश्ते का सच I

    विश्वास , प्यार और पलपल सजीव मन I

    यूई अब कोई रिश्ता टूटने ना पाएगा I

    और हर टूटा हुआ रिश्ता भी बंध जाएगा I

                                              ……….   यूई

  • अच्छा हुआ आँखों

    अच्छा हुआ आँखों से बह गए आँसूं
    जो जिगर में जम जाते तो हादसा होता
    राजेश’अरमान’

  • अपनी हर सांस तो

    अपनी हर सांस तो बस तेरी चाह में गुजरी
    तेरी सारी उम्र जमाने की परवाह में गुजरी
    सोचा था कहोगे उदास तुम मेरी खातिर न हो
    क्या कहेगा ज़माना ,फिक्र ज़िंदगी की राह में गुजरी
    राजेश’अरमान’

  • एक कोई राह

    एक कोई राह अपना लो ,

    वो राह यूई को दिखला दो 

    या तो मुझे अपना बना लो,

    नहीं तो इस रिश्ते को दफना दो 

                          ……… यूई

  • धड़कन

    अपनीयत को गर है जन्मना तो ,

    शिकवेशिकायतें सब दफ्ना दो 

    दिल से दिल की धड़कन  मिला दो ,

    अपनी रूह में मेरी रूह बसा दो

  • ज़ख्म

    दर्द देना गर फितरत है तेरी ,

    अपनीयत का तुम गला दबा दो 

    चाहें जितने भी फिर ज़ख्म दिला दो,

    अपनीयत के दर्द से मुझे बचा दो

                                                          ……  यूई

  • रिश्ता

    दिल और रूह से जुड़ा ,

    हमारा यह रिश्ता 

    दो नावो की सवारी ,

    सह नहीं सकता

  • मेरे लफ्ज़

    मेरे लफ्ज़ ग़ुलाम बन गए
    तेरे लफ़्ज़ों की सरफ़रोशी से
    राजेश’अरमान’

  • दर्द

    दर्द अपनों को ,

    भूले से भी दिया नहीं करते 

    गर देना ही है दर्द तो ,

    अपना उन्हें कहा नहीं करते 

                                                          ……  यूई

  • कभी बादलों से

    कभी बादलों से
    कभी बिजलिओं से
    बनती है सरगम

    कलकल बहते पानी
    चलती हवाओं से
    बनती है सरगम

    इठलाती घूमती
    बेटियां होती झंकार
    बनती है सरगम

    अपनी साँसें भी
    जब सुर में हो
    बनती है सरगम

    कुछ यादें भी
    होकर मधुर
    बनती है सरगम

    किसी साज़ का दर्द
    खुद सा लगे तब
    बनती है सरगम

    राजेश’अरमान’

  • कल रात फिर आँखों में गिरफ्तार हुए

    कल रात फिर आँखों में गिरफ्तार हुए
    कई ख्वाब नशे में आवारागर्दी करते
    राजेश’अरमान ‘

  • कोई वज़ह यूँ भी

    कोई वज़ह यूँ भी
    निकल आती
    तेरे मिलने की
    तारों की सजी डोली
    लेके आता कहार
    मेरे मन के द्वार
    मैं मन ही मन में
    रूप लेता निहार
    काश उस डोली में
    कोई ख्वाब सजा होता
    आँखों ने लिए थे
    संग जिसके सात फेरे
    राजेश’अरमान’

  • देख लेता

    देख लेता मैं भी तेरे जलवे
    गर तेरे जलवे पराये न होते
    राजेश’अरमान’

  • की परवरिश जिन

    की परवरिश जिन ख़्वाबों की औलाद की तरह
    दफ़न कर मुझे फ़र्ज़ निभाया औलाद की तरह
    राजेश’अरमान

  • गम की फसलें

    गम की फसलें सींचता
    आँखों की बारिश से
    हर ख्वाब ने दम तोडा
    अपनी ही गुजारिश से
    राजेश’अरमान’

  • किसी ने सूद

    किसी ने सूद से भरी पुरवाइयां चुनी
    किसी ने दर्द भरी शहनाइयां चुनी
    हमें कुछ चुनने का हुनर न आता था
    सो गम से लिपटी तन्हाईयाँ चुनी
    राजेश’अरमान’

  • चल पड़ा फिर जिस्म

    चल पड़ा फिर जिस्म
    किसी राह में
    मन को छोड़ अकेला
    क्यों नहीं चलते
    दोनों साथ -साथ
    कोई रंजिश नहीं
    फिर भी रंजिश
    फूल की बगावत
    किसी टहनी से
    भवरे की शिकायत
    किसी फूलों से
    मन की तिजारत
    किसी जिस्म से
    मन रहता है
    जिस्म में किसी
    मुसाफिर की तरह
    जिस्म की हसरत
    जिस्म की तरह
    नश्वर है
    काश रग़ों में
    मन दौड़ता
    जिस्म की
    उमंगों जैसा
    किसी जिस्म
    किसी मन
    की राह अलग न होती
    राजेश’अरमान’

  • रात अपना ही

    रात अपना ही कोई
    किस्सा बन जाता हूँ
    दिन के उजाले में कोई
    हिस्सा बन जाता हूँ
    निकल तो जाता हूँ
    बाज़ारों में कहीं
    शाम के होते ही
    न चलने वाला कोई
    सिक्का बन जाता हूँ
    राजेश’अरमान’

  • जरूरत के हिसाब से

    जरूरत के हिसाब से , खुद से पहचान हुई
    कई हिस्से अब भी अजनबी है मेरे अंदर
    राजेश’अरमान’

  • उसकी नज़रों की

    उसकी नज़रों की तलाशी में
    मेरे किरदार बदले से मिले
    मैं ढूंढ़ता रहा उसकी आँखों में
    चंद कतरे पर जमे से मिलें
    राजेश’अरमान’

  • अब मंज़िल

    अब मंज़िल मेरे साथ-साथ चलती है
    जब से बनाया मंज़िल अपने साये को
    राजेश’अरमान’

  • चंद क़दमों में

    चंद क़दमों में थक के बैठ गया राही
    मंज़िल मुसीबत नहीं जो बैठे- बैठे गले पड़े
    राजेश’अरमान’

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