Category: शेर-ओ-शायरी

  • तुझे कुछ कर दिखाना है

    भूतकाल के डर को
    वर्तमान में ख़तम कर
    भविष्य आगे भड़ाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    दुनिया के जाल से निकलकर
    तुझे अपना मान बढ़ाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    तेरा मन तुझे रोकेगा
    तेरे हर काम पे टोकेगा
    अपने इरादों के पंखो को फैलाये
    तुझे उड़के दिखाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    दिल से किया काम
    तेरे काम आएगा
    कर मेहनत
    तेरा भी वक्त आएगा

    हर हाल में मंज़िल को तुझे पाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    – हिमांशु ओझा

  • ऐ ज़िन्दगी

    ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है
    तेरे लिए किया क्या है
    तूने मेरे गम पे खुशियों के वस्त्र ढक दिए
    तेरे लिए मैंने सिया किया है

    ना रखा तुझे खुश
    ना रखा ऐशो आराम में
    हर पल तुझसे माँगा
    तुझे दिया क्या है

    मैं पराया मांगू हर चीज़ स्वार्थ में
    तू अपना समझ कर दे निस्वार्थ में
    आखिर समझ नहीं आया
    ये रिश्ता क्या है

    तूने हर वक्त साथ दिया
    मेने हर कीमती वक्त है खोया
    तू तो हर वक्त मेरे लिए ही जिया है
    पर ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है

  • कैद

    तुम्हारी जुल्फों की कैद मिले
    तो हर गुनाह कर जाऊं ।
    कत्ल करूं कातिल बनूं
    फिर तेरे पहलू में आऊं।
    वीरेंद्र

  • नकाब

    कोई किसी के सुख में सुखी ना होये
    ना होये किसी के दुःख में दुखी
    बदल रहे नकाब बस कुछ मतलबी

  • ‘नजरों को बस’….

    नजरों को बस तेरी ही तलाश रहती है
    सुकून भी बस तेरे ही साथ आता है,
    मुलाकात भले ही ना होती हो हमारी
    पर सारा वक्त तेरी याद में गुजरता है।

  • शायरी

    सितम गैरों की बस्ती में सही
    मेरा भी नाम हो जाए
    मेरी नींदें छीन कर
    चैन से सोने वाली
    आज की रात
    तेरी नींद भी हराम हो जाए
    वीरेंद्र

  • Shayri

    हर बीमारी का हल दवा नहीं होती
    हर छोटी चीज़ रवा नहीं होती
    भुज जाते है दीये कभी तेल की कमी से
    हर बार कुसूरवार हवा नहीं होती
    – हिमांशु ओझा

  • दग़ाबाज़

    जिन्हें पाने की चाहत में, मैं सदा अपनों से लड़ता था
    वो देंगे दग़ा हमको कभी हमने ना सोचा था
    मिला आघात भी हमको उस मोड़ पे जा के
    जहां से लौट के आना बड़ा मुश्किल सा लगता था।।

  • रात

    कब्र की रात 🌃 है ,या कयामत की रात है।
    पूछ तो लूं मीर इशारा, आखिर किस तरफ है।।

  • जनाजा

    शायद फिर किसी का आशियाना जला।
    जनाजे के संग फिर बे -वफा रोते चला।।

  • शाहील

    अश्कों के समंदर में ए ग़ालिब, गोता लगाए जा रहा हूँ मै।
    शाहील मुकद्दर में है या नहीं, बस यही सोचे जा रहा हूँ मैं।।

  • ढूँढते हैं

    बनके दुश्मन बहार का
    नजारे बहार ढूँढते है।
    दिल में रख वैमनस्य
    जनाब प्यार ढूँढते हैं।।

  • आप आए बहार आई

    जब लिखता था मैं, ग़ज़ल मयखाने में,
    तब सुबह से शाम हो जाया करता था।
    ए दोस्त जब वह आते थे सज धज कर,
    तब मेरी जान में जान आ जाया करता था।।

  • इज़्ज़त

    बड़ों की इज़्ज़त करने से इज़्ज़त कम नहीं होती,
    बल्कि कई गुना बढ़ जाती है।

  • आंसुओं की कसम

    हर तरफ तेरी याद का दर्द गहरा है
    ना जाने किस बात पर ये दिल ठहरा है,
    तेरी आँखों में ठहरे आंसुओं की कसम
    ए दोस्त! ये दर्द का रिश्ता बहुत ही गहरा है।

  • आजाद फिज़ाओ में

    आजाद फिज़ाओ में बस है एक ही नाम
    बाँके बिहारी राधे राधे श्याम

  • तेरी याद

    बेबाक निशानियाँ रह गई बस
    तेरी याद ही रह गई बस

  • गूंजती फ़िजाओ में

    गूंजती फ़िजाओ में रंग कितनें बिखरे हैं
    और रेशम के धागे भी उलझे हैं,
    कितनी मशरूफ है ज़िन्दगी अपनी
    हम भी उलझे हैं वो भी उलझे हैं ।

  • डूब जाना तो

    डूब जाना तो आसान है मगर
    डूब कर पार होना
    बड़ा मुश्किल ।

  • कश्ती

    चप्पे-चप्पे पर नज़र रखता हूँ
    मैं तो कश्ती हूँ
    जो हर दरिया पार करता हूँ ।

  • मोहलत कम दी है

    मोहलत कम दी है खुदा ने तुझे मनाने की
    पर तुझे तो आदत है बिन वजह रूठ जाने की ।

  • मेरा दर्द ज़्यादा है

    गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है
    तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है

  • मेरा दर्द ज़्यादा है

    गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है
    तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है

  • मैं तो शुक्र

    अफसोस नहीं होता है मुझे तेरे दूर जाने का
    मै तो शुक्र गुजार हू तेरे बेवफ़ा हो जाने का

  • सोचता हूँ मैं

    सोचता हूँ मैं कि कब आयेगी बहार
    बगिया में?
    कब महकेंगे सुगंधित सुमन
    दिल के आँगन में?

  • मासूमियत

    अपनी मासूमियत पर भी शक करते हैं लोग
    हम जो पानी भी पियें तो शराब कहते हैं लोग ।

  • फैसले

    मैं अपने फ़ैसले खुद लेता हूँ और
    कोशिश करता हूँ कि
    उन फैसलों पर कभी
    पछताना ना पड़े ।

  • इरादा

    इरादा बुलंद रखता हूँ
    मेहनत खूब करता हूँ
    ऊपर वाले की मोहलत के
    हिसाब से सब करता हूँ ।

  • मैं खुद

    मैं खुद बनाता हूँ रास्ते अपने
    दूसरों के इशारों पर नहीं चला करता।

  • मुकद्दर

    बाजुओं में दम रखने वाले
    मुकद्दर से नहीं डरा करते।

  • गरूर

    कितना गरूर था डगर को अपने
    लम्बे होने पर
    लेकिन एक गरीब के हौसले ने
    उसे कदमों में नाप दिया ।

  • गमे-फुर्सत

    गमे-फुर्सत जब से मिली
    बड़ा बेफिक्र सा रहता हूं,
    अब तो जहान बड़ा खूबसूरत लगता है
    और अनगिनत ख्वाबों को सच करता रहता हूं।

  • रो लेता हूँ

    इस बंजर-सी धरती पर कुछ अश्कों के बीज बो लेता हूँ।
    जब जब तुहारी याद आती है तो छुप छुप के रो लेता हूँ।।

  • कभी-कभी

    कभी कभी हम किसी को कुछ ऐसा कह देते हैं
    कि कहने के बाद पछताना पड़ता है
    बड़ी तकलीफ होती है
    ऐसे शब्द मुंह से निकालने के बाद
    बड़ा अफसोस होता है अपनी गलती पर।

  • खुशी और गम

    किसकी की किस्मत है
    जो बस खुशियां ही खुशियां पाए
    खुशी और गम तो धूप और छांव
    की तरह जिंदगी के हर कदम पर
    आते जाते ही रहते हैं
    आज खुशी है तो कल गम का अंधेरा भी छाएगा।

  • निष्ठुर

    निष्ठुर है क्यों ये जहान मेरा
    कभी भी गम के सिवा कुछ दिया ही नहीं ।

  • वो तेरे समतूल नहीं

    कौन कहता है
    बहार- ए-चमन में फूल नहीं।
    हैं तो बहुत प्रीतम
    मगर वो सब तेरे समतूल नहीं।।

  • रिश्तो के झमेले

    अकेला होता है जहान में हर कोई
    बस रिश्तो के झमेले होते हैं
    जिंदगी गुजारने को कुछ ख्वाब ही जरूरी होते हैं

  • तुम्हें कोई फिक्र

    तुम्हें तो कोई फिक्र ही नहीं
    बेपरवाह घूमते हो
    यहां दिन-रात गुजरते हैं बस तुम्हारी फिक्र में

  • बेचैनियां

    बेचैनियां बटोर के सारे जहान की
    खुदा ने मेरा दिल बना दिया
    और खूबसूरती कल्पनाओं की
    मेरे मुकद्दर में डालकर मुझे शायर बना दिया।

  • तंबाकू

    तंबाकू खाने से होता है टीवी कैंसर
    इसलिए इसे खाना करो आज से कैंसिल

  • तंबाकू निषेध

    तंबाकू निषेध दिवस है आज
    आज प्रण करो
    तंबाकू सेवन मत करो
    वरना सब लुट जायेगा
    तेरी तलब ही तेरे मौत का कारण बन जाएगी

  • मैं तो

    सच है तुम्हरा इरादा भी
    मगर मैं तो इश्क के बगैर जी ही नहीं सकता।

  • ए ज़िन्दगी!!

    लड़ाई किस्मत से है तुझसे नहीं ए ज़िन्दगी!
    तू परेशान बेकार होती है ।

  • जब हमें तुम याद आये रात भर

    जब हमें तुम याद आये रात भर
    आंसुओं ने ग़म बहाये रात भर।

    ख़्वाब कितने ही सजाये रात भर
    जिनको चाहा वो न आये रात भर।

    एक सूरज ढल गया जब शाम को
    चांद तारे मुस्कुराये रात भर।

    कल मुझे इक फूल पन्नों में मिला
    दिन पुराने याद आये रात भर।

    जिनके प्रियतम दूर थे परदेस में
    चांदनी ने दिल जलाये रात भर।

    कहते हैं जो किस्मतों का खेल है
    ख़्वाब उनको क्यों जगाये रात भर।

  • जमाना

    अब मैसेज से ही काम चलाना।
    यही कहे आज कोरोना जमाना।।

  • दिल ए नादान

    संभल संभल दिल ए नादान।
    यहाँ कोई नहीं इश्क़ ए क़द्रदान।।

  • यही कहते है

    पागल, आवारा, लोफर, दीवानापन, यही इनाम मिला है मुझे।
    कागज की किश्ती दरिया में नहीं चलती, यही कहते हैं वो मुझे।।

  • शायरी

    यूँ ना बुलाओ करके नजर के इशारे
    इस दिल पे तो डाका पर जाएगा।
    भला तुम्हारा क्या बिगड़ेगा
    मेरा सब कुछ लुट जाएगा।।

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