जीत कर दिल का जहान हार गया सब कुछ खुश बहुत हूँ मगर खुद से हैरान बहुत हूँ मैं ।
जीत कर दिल का जहान हार गया सब कुछ खुश बहुत हूँ मगर खुद से हैरान बहुत हूँ मैं ।
तेरी मोक्ष की माया को समझें हम इतने सक्षम नहीं भगवान जब मानव थे तो हमने हरि जब मोक्ष मिला तो हरी में हम
मिट जाओगे , पाक मुहब्बत को खाक में मिलाने वाले। आसमान के, कदमों पे झुका देंगे हम है वो दिलवाले।।
मुहब्बत (💘) के गुनहगार जरा होश में आ जाओ। कब्र खोदे हो किस के लिए जरा यह तो बताओ।।
शीशे से बेरहम पत्थर को तोड़ता रहा । मेरे रकीब मुझ पर तोहमत लगाता रहा।।
माँ की ममता कभी भी झूठी नहीं होती। रूठी होकर भी कभी माँ रूठी नहीं होती।।
आज के इस दौर में उल्फत के हर रस्म झूठे लगते हैं। अपने घर में भी सभी एक दूजे से रूठे-रूठे लगते हैं। ।
मधुसूदन के चरणों में है सारा संसार होंठो पर मुस्कान है और दिल में प्रेम अपार
चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मियां व्यापित है इस जेठ में । दशा बताये क्या प्राणियों की छाया भी जाए छाया की हेठ में।।
एक नकाब है चेहरे का ,दूसरा नकाब है हिजाब का। हमने कयी गुलाब देखे है पर ,देखा न चेहरा जनाब का।।
देश धर्म के ख़ातिर है अपनी जान हथेली पे। वीर सिपाही हैं हिन्दी हम कुर्बां जन्महवेली पे।।
तीर किसी को घायल करके बोलो कब पछताता है? कड़वा बोल कहो दुनिया में कब भला काम कर पाता है??
देख अनीति को चुप रहना सचमुच एक अनाचार हुआ। पाठ अहिंसा का पढ़ाकर खुद हिंसा का शिकार हुआ ।।
ये समाज है जिसका क्या ठिकाना। किसी को मान दे किसी को दे अपमाना।।
पेड़ रहे नित धूप में बाँटे सबको छांव। ऐसे हीं परोपकार में लगे हाथ और पांव।।
कौन कहता है कि दिल में सुराग नहीं होते। गर ना होते तो बेवफा कभी फरार नहीं होते।।
दिल की बात दिल में ही रह जाती है रात खामोश हो कर भी बहुत कुछ कह जाती है
इम्तिहान -ए-इश्क़ में सारे शरीक होते हैं। जो पास हो गए वही तो खुशनसीब होते हैं।।
तुम्हारे नजर- ए-रहम से तेरे,सब मीत बन जाते हैं। मेरे अल्फाज तेरे लबों से छूकर गीत बन जाते हैं।।
किसी को अपनी खता दिखाई नहीं देती जिस तरह तिमिर में दिखाई परछाई नहीं देती
ए सनम कहाँ खो गये हो । बोलो न ए सनम कहाँ खो गये हो।। किस खता की सजा हमने पायी। एक मर्तबा बता तो दे ए हरजाई।।
मुहब्बत के कई रंग देखे हैं। जो भी मिला उसे तंग देखे हैं। यूँ तो बड़ी सुहानी है ये दुनिया पर कहीं खुशी तो कहीं गम देखे हैं।।
तुम अपने मुहब्बत में कर लो परीक्षा सनम। पास निश्चित करुँगा पर आगे की तेरी इच्छा सनम।।
कुछ छंद अनोखे लाए हैं कुछ गीत सुहाने लाए हैं। हम तो तुम्हारे आशिक़ हैं कुछ भाव तराने लाए हैं।।
दुनिया दरकिनार होना चाहती थी हमसे पर दरकिनार हो न पाई । मुहब्बत ने ईंटे तो काफी लगाए पर इश्के मीनार हो न पाई।।
गीत बन्द पड़े हैं कल्पनाओं के अंतस में मीत सुनने को बेताब है
एक वक्त ऐसा भी लाऊँगी मैं जो हमें देख के अनदेखा कर देते हैं वो हमें देखने को तरसेंगे
ये कोरोना की छुट्टी भी अब बेकार हो गई । मोबाइलों में होम वर्क और पव जी बेकार हो गई।।
गर्मी की छुट्टी हो गई गर्मी के आने से पहले। शायद स्कूल लग जाऐंगे नानी 🏡 जाने से पहले।।
ऐ वक्त जरा रुक जा कुछ देर के लिए। दुनिया में लाॅकडाउन है नये सबेर के लिए।।
चौथापन है लाॅकडाउन का फिर भी कोरोना अभी जवान है। करते रहो अध्यादेश जारी तुम्हें क्या जनता कितनी परेशान है।।
आलिंगन भी दिल से दिल को ना मिलाता। फिर बेबफाई से दिल आखिर क्यों टूट जाता।।
जीवन चलता है चलता रहेगा कल घुटनों के बल चलते थे आज पैरों पर खड़े हैं
कसम दे देकर बर्बाद किया तुमने जहर की बात तुम ना करो तो अच्छा है
गीत मुस्कुरा के गाता हूं जाने क्यों ग़ज़ल लिखने में आंख भर आती है
दूरियां बनाने से कुछ नहीं मिलता रिश्ते नज़दीकियों से ही चलते हैं
कब से जाम लिये बैठा हूँ नजरों से पिलाने वाले कहाँ गए
ए नागन ज़रा देखें तो तुझ में कितना है जहर। तूने अनगिनत आशिकों के दिल ढाया है कहर।।
फलक के सितारे भी तारीफ़ करते हैं तेरी अदा को। जरा मैं भी तो देखूं खुदा ने किस कदर बनाया है आपको।।
किरदार निभा रहा हूँ अपना नया भारत हूँ मैं और दिल का तिरंगा लहरा रहा हूँ
तूने दूर किया है मुझको अपने साये से मेरी दीवानगी देखो तुझमे ही डूबा रहता हूँ
मैंने जिस दिन से आलिंगन किया तुझे रात दिन खुमार में ही रहता हूँ
फूल की राहों में काँटे बिखरेता है कौन? चांदनी रात में अकेला यहाँ आता है कौन?
मत माड़ ए माँ मुझे, तू अपनी कोख में। बेटा बन कर दिखाउंगी, आ जाने दे जग में।।
उनका एक थप्पड़ इश्क़ में घी का काम कर गया। बुझे चिंगारी को बेशर्म शोला और शबनम बना दिया।।
मै अपनी जवानी गुजार दी मय के मयख़ाने में। अब तो बस खाली पैमाना बच गया मेरे जिंदगानी में।।
किताबें खोल कर देखा नहीं तुमने शायद पुराना बहुत हूँ पर अंदाज़ वही है
बरसों बाद आया हूँ उसी अंदाज़ में वही स्फूर्ति का तूफान लेकर मैं
गज़ल बन जाओ तुम गीत हम बने कुछ तुम कहो तो कुछ हम कहें
एक तरफ सावन के रुसवाई तो दूसरे तरफ महबूब की जुदाई। ए मेरे खुदा तू ही बता कैसी है सावन व महबूब की खुदाई।।
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